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Kurukshetra News: यूजीसी समानता विनियम-2026 पर अग्रवाल वैश्य समाज ने जताई आपत्ति
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कुरुक्षेत्र। अग्रवाल वैश्य समाज हरियाणा के प्रदेश सचिव राजेश सिंगला।
कुरुक्षेत्र। अग्रवाल वैश्य समाज हरियाणा ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू किए जा रहे यूजीसी समानता विनियम-2026 पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाई गई रोक का स्वागत किया है।
समाज ने इन विनियमों पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे भारतीय संविधान की मूल भावना के विपरीत बताया और समाज की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजकर इन प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की। प्रदेश अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने कहा है कि यूजीसी समानता विनियम-2026 संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का खुले तौर पर उल्लंघन करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नए नियमों से उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत विभाजन को बढ़ावा मिलेगा और सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों व शिक्षकों के अधिकारों का हनन होगा।
प्रदेश सचिव राजेश सिंगला ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सामाजिक न्याय होना चाहिए लेकिन ऐसे नियम जो किसी एक वर्ग के अधिकारों को कमजोर करें, वे न तो न्यायसंगत हैं और न ही देशहित में। उन्होंने बताया कि ज्ञापन में यूजीसी समानता विनियम-2026 के कुछ प्रमुख प्रावधानों पर विशेष आपत्ति जताई गई है। इनमें सबसे अहम बिंदु यह है कि आरक्षित वर्ग के विद्यार्थी बिना ठोस प्रमाण के सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकेंगे। समाज का कहना है कि यदि बिना किसी साक्ष्य के शिकायत दर्ज कर किसी विद्यार्थी या शिक्षक का भविष्य प्रभावित किया गया, तो यह गंभीर अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के नियम सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को मानसिक दबाव और असुरक्षा की स्थिति में डाल देंगे।
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समाज ने इन विनियमों पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे भारतीय संविधान की मूल भावना के विपरीत बताया और समाज की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजकर इन प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की। प्रदेश अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने कहा है कि यूजीसी समानता विनियम-2026 संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का खुले तौर पर उल्लंघन करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नए नियमों से उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत विभाजन को बढ़ावा मिलेगा और सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों व शिक्षकों के अधिकारों का हनन होगा।
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प्रदेश सचिव राजेश सिंगला ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सामाजिक न्याय होना चाहिए लेकिन ऐसे नियम जो किसी एक वर्ग के अधिकारों को कमजोर करें, वे न तो न्यायसंगत हैं और न ही देशहित में। उन्होंने बताया कि ज्ञापन में यूजीसी समानता विनियम-2026 के कुछ प्रमुख प्रावधानों पर विशेष आपत्ति जताई गई है। इनमें सबसे अहम बिंदु यह है कि आरक्षित वर्ग के विद्यार्थी बिना ठोस प्रमाण के सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकेंगे। समाज का कहना है कि यदि बिना किसी साक्ष्य के शिकायत दर्ज कर किसी विद्यार्थी या शिक्षक का भविष्य प्रभावित किया गया, तो यह गंभीर अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के नियम सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को मानसिक दबाव और असुरक्षा की स्थिति में डाल देंगे।
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