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Kurukshetra News: दहशत के एक साल बाद बिशनगढ़ के तालाब में छिपे मगरमच्छ को पकड़ने की कवायद शुरू
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कुरुक्षेत्र। दहशत में एक साल बिताने के बाद बिशनगढ़ गांव के लोगाें को आखिरकार तालाब में छिपे छह फुट लंबे मगरमच्छ से मुक्ति मिलने की कवायद शुरू हो गई है। मगरमच्छ को पकड़ने के लिए वन्य प्राणी विभाग और गोताखोर प्रगट सिंह की टीम संयुक्त रूप से काम कर रही है। हालांकि उनको अभी सफलता प्राप्त नहीं हुई है, क्योंकि तालाब में ज्यादा पानी होने की वजह से मगरमच्छ पकड़ में नहीं आ रहा है। लिहाजा टीम ने तालाब का पानी सरस्वती नदी में निकालने का निर्णय लिया है। इस दौरान टीम रात को तालाब के पास ही पहरा लगाएगी, ताकि मगरमच्छ पानी के साथ सरस्वती में न उतर जाए।
यह मगरमच्छ पिछले करीब एक साल से गांव के तालाब में छिपा हुआ है। उसके खाने के लिए तालाब में मछली और अन्य तरह के कई जीव है। हालांकि उसने गांव के किसी व्यक्ति या पशु को नुकसान नहीं पहुंचाया है, मगर उसकी वजह से पूरे गांव में दहशत फैली हुई है। मगरमच्छ के डर के कारण पंचायत ने तालाब की तरफ जाने पर पाबंदी तक लगा रखी है, जबकि तालाब के आसपास बसे लोग सबसे ज्यादा मुश्किल में फंसे हुए हैं। वह अपना घर छोड़कर कहीं और नहीं जा सकते, जिस कारण खतरे के साए में रहने को मजबूर हैं। उनको अकेले में अपने बच्चों को बाहर भेजने में भी डर लगता है, जबकि रात के समय कोई भी घर से बाहर निकलने में घबराता है।
ऐसा भी नहीं है कि ग्रामीणों ने मगरमच्छ को पकड़ने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले को लेकर प्रशासन से लेकर सीएम विंडो तक कई बार शिकायत भेजी है, मगर प्रशासन की ओर से मगरमच्छ को पकड़ने का कोई प्रयास नहीं किया गया। अब कुछ दिन पहले कांग्रेस नेता सूर्या प्रताप राठौर उनके गांव में जनसंपर्क के लिए पहुंचे तो उन्होंने यह समस्या उनके समक्ष रखी। इस पर उन्होंने अपने स्तर पर ग्रामीणों की मदद का आश्वासन दिया। अब उनके सहयोग से मगरमच्छ को पकड़ने की कार्रवाई शुरू की गई है।
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पिछले वर्ष बाढ़ आने के बाद तालाब तक पहुंचा था मगरमच्छ
पवन वर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष आई बाढ़ में उनका गांव भी चपेट में आ गया था। तालाब के साथ ही सरस्वती नदी गुजर रही है। आशंका यही है कि बाढ़ के साथ मगरमच्छ तालाब में पहुंच गया। बाढ़ के बाद पहली बार तालाब में मगरमच्छ देखे जाने के बाद प्रशासन को अवगत कराया गया था, मगर प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। गोताखोरों ने भी मगरमच्छ को पकड़ने का प्रयास किया था। पिछले साल दबखेड़ी, उदारसी और जोगना खेड़ा से मगरमच्छ पकड़े गए थे।
एक नहीं तालाब में दो मगरमच्छ होने की आशंका
गोताखोर प्रगट सिंह ने बताया कि तालाब में करीब छह फुट का एक मगरमच्छ देखा गया है। इसके अलावा एक और मगरमच्छ होने की आशंका ग्रामीण जता रहे हैं। करीब डेढ़ एकड़ में फैला तालाब 15 से 20 फुट गहरा है। इसलिए मगरमच्छ पकड़ में नहीं आ रहा है। इसलिए उन्होंने तालाब का पानी सरस्वती में छोड़ने का निर्णय लिया है और यह कार्रवाई शुरू भी कर दी गई है। तालाब से पांच-सात फुट की गहराई तक पानी निकालने के बाद मगरमच्छ को पकड़ने का अभियान चलाया जाएगा। सरस्वती की तरफ जाल लगाया गया है ताकि मगरमच्छ सरस्वती तक न पहुंच जाए साथ ही विभाग और उनकी टीम तालाब के पास पहरा लगाकर बैठी है।
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यह मगरमच्छ पिछले करीब एक साल से गांव के तालाब में छिपा हुआ है। उसके खाने के लिए तालाब में मछली और अन्य तरह के कई जीव है। हालांकि उसने गांव के किसी व्यक्ति या पशु को नुकसान नहीं पहुंचाया है, मगर उसकी वजह से पूरे गांव में दहशत फैली हुई है। मगरमच्छ के डर के कारण पंचायत ने तालाब की तरफ जाने पर पाबंदी तक लगा रखी है, जबकि तालाब के आसपास बसे लोग सबसे ज्यादा मुश्किल में फंसे हुए हैं। वह अपना घर छोड़कर कहीं और नहीं जा सकते, जिस कारण खतरे के साए में रहने को मजबूर हैं। उनको अकेले में अपने बच्चों को बाहर भेजने में भी डर लगता है, जबकि रात के समय कोई भी घर से बाहर निकलने में घबराता है।
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ऐसा भी नहीं है कि ग्रामीणों ने मगरमच्छ को पकड़ने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले को लेकर प्रशासन से लेकर सीएम विंडो तक कई बार शिकायत भेजी है, मगर प्रशासन की ओर से मगरमच्छ को पकड़ने का कोई प्रयास नहीं किया गया। अब कुछ दिन पहले कांग्रेस नेता सूर्या प्रताप राठौर उनके गांव में जनसंपर्क के लिए पहुंचे तो उन्होंने यह समस्या उनके समक्ष रखी। इस पर उन्होंने अपने स्तर पर ग्रामीणों की मदद का आश्वासन दिया। अब उनके सहयोग से मगरमच्छ को पकड़ने की कार्रवाई शुरू की गई है।
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पिछले वर्ष बाढ़ आने के बाद तालाब तक पहुंचा था मगरमच्छ
पवन वर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष आई बाढ़ में उनका गांव भी चपेट में आ गया था। तालाब के साथ ही सरस्वती नदी गुजर रही है। आशंका यही है कि बाढ़ के साथ मगरमच्छ तालाब में पहुंच गया। बाढ़ के बाद पहली बार तालाब में मगरमच्छ देखे जाने के बाद प्रशासन को अवगत कराया गया था, मगर प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। गोताखोरों ने भी मगरमच्छ को पकड़ने का प्रयास किया था। पिछले साल दबखेड़ी, उदारसी और जोगना खेड़ा से मगरमच्छ पकड़े गए थे।
एक नहीं तालाब में दो मगरमच्छ होने की आशंका
गोताखोर प्रगट सिंह ने बताया कि तालाब में करीब छह फुट का एक मगरमच्छ देखा गया है। इसके अलावा एक और मगरमच्छ होने की आशंका ग्रामीण जता रहे हैं। करीब डेढ़ एकड़ में फैला तालाब 15 से 20 फुट गहरा है। इसलिए मगरमच्छ पकड़ में नहीं आ रहा है। इसलिए उन्होंने तालाब का पानी सरस्वती में छोड़ने का निर्णय लिया है और यह कार्रवाई शुरू भी कर दी गई है। तालाब से पांच-सात फुट की गहराई तक पानी निकालने के बाद मगरमच्छ को पकड़ने का अभियान चलाया जाएगा। सरस्वती की तरफ जाल लगाया गया है ताकि मगरमच्छ सरस्वती तक न पहुंच जाए साथ ही विभाग और उनकी टीम तालाब के पास पहरा लगाकर बैठी है।