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बेहतर समाज निर्माण के लिए समाज कार्य विषय में अपार संभावनाएं
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केयू के समाज कार्य विभाग उत्तर भारत के अग्रणी एवं प्रतिष्ठित विभागों में से एक है। विभाग की स्थापना 1981 में हुई थी। मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) में दाखिला लेने के लिए किसी भी विषय में 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक की डिग्री होना जरूरी है। दो वर्ष के इस कोर्स में विद्यार्थियों को चार दिन कक्षा कार्य और दो दिन क्षेत्रीय कार्य के द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है। द्वितीय वर्ष में स्पेशलाइजेशन पर आधारित पाठ्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के ऐच्छिक पाठ्यक्रम प्रदान किये जाते हैं। जिनमें मुख्य रूप से मानव संसाधन प्रबंधन व श्रम कल्याण, परिवार व बाल कल्याण, सामुदायिक विकास तथा चिकित्सीय और मनोचिकित्सीय समाज कार्य शामिल हैं। समाज कार्य विभाग में ऑनलाइन दाखिला लेने की अंतिम तिथि 21 अगस्त है।
समाज कार्य विभाग का उद्देश्य समाज कल्याण तथा संबंधित क्षेत्रों में व्यावसायिक मानव संसाधन शक्ति प्रदान करना। इस विषय की डिग्री लेने के उपरांत विद्यार्थी उद्योगों में श्रम कल्याण अधिकारी, मानव संसाधन अधिकारी/प्रबंधक के पद पर रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं। इसके अलावा उद्योगों में सी. एस. आर. के लागू होने से समाज कार्य की इस क्षेत्र में मांग काफी बढ़ गयी है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में विभिन्न समाज कल्याण अधिकारी एवं कल्याण अधिकारी व अन्य राजपत्रित पदों पर मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एम. एस. डब्ल्यू) डिग्री प्राप्त करने के उपरांत नौकरी हासिल की जा सकती है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन व अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों में समाज कार्य विभाग के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाती है। सरकारी संस्थानों के साथ साथ बहुत सी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की गैर सरकारी संस्थाओं में भी समाज कार्य विभाग के विद्यार्थियों के लिए रोजगार की संभावनाएं रहती हैं। इसके अतिरिक्त चिकित्सकीय व मनो चिकित्सकीय संस्थानों में भी पैरामेडिकल स्टाफ में कांउसलर/समाज कार्यकर्ता के रूप में भी कार्य कर सकते हैं।
विभागाध्यक्ष प्रो. दर्शन सिंह ने बताया की आज के समय में जब पूरा देश कोविड- 19 के कारण सामाजिक व आर्थिक रूप से कठिन दौर से गुजर रहा है व कई तरह की शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं उत्पन्न हो रही है ऐसी स्थिति में समाज कार्य में डिग्री प्राप्त विधार्थी सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओ के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। अत: आने वाले समय में समाज कल्याण के क्षेत्र में बढ़ती हुई संभावनाओं को देखते हुए मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) पाठ्यक्रम का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
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समाज कार्य विभाग का उद्देश्य समाज कल्याण तथा संबंधित क्षेत्रों में व्यावसायिक मानव संसाधन शक्ति प्रदान करना। इस विषय की डिग्री लेने के उपरांत विद्यार्थी उद्योगों में श्रम कल्याण अधिकारी, मानव संसाधन अधिकारी/प्रबंधक के पद पर रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं। इसके अलावा उद्योगों में सी. एस. आर. के लागू होने से समाज कार्य की इस क्षेत्र में मांग काफी बढ़ गयी है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में विभिन्न समाज कल्याण अधिकारी एवं कल्याण अधिकारी व अन्य राजपत्रित पदों पर मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एम. एस. डब्ल्यू) डिग्री प्राप्त करने के उपरांत नौकरी हासिल की जा सकती है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन व अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों में समाज कार्य विभाग के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाती है। सरकारी संस्थानों के साथ साथ बहुत सी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की गैर सरकारी संस्थाओं में भी समाज कार्य विभाग के विद्यार्थियों के लिए रोजगार की संभावनाएं रहती हैं। इसके अतिरिक्त चिकित्सकीय व मनो चिकित्सकीय संस्थानों में भी पैरामेडिकल स्टाफ में कांउसलर/समाज कार्यकर्ता के रूप में भी कार्य कर सकते हैं।
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विभागाध्यक्ष प्रो. दर्शन सिंह ने बताया की आज के समय में जब पूरा देश कोविड- 19 के कारण सामाजिक व आर्थिक रूप से कठिन दौर से गुजर रहा है व कई तरह की शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं उत्पन्न हो रही है ऐसी स्थिति में समाज कार्य में डिग्री प्राप्त विधार्थी सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओ के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। अत: आने वाले समय में समाज कल्याण के क्षेत्र में बढ़ती हुई संभावनाओं को देखते हुए मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) पाठ्यक्रम का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
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