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एचएसएससी के नशा रोकने के दावे फेल

Sun, 26 Jun 2016 01:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र Updated Sun, 26 Jun 2016 01:09 AM IST
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Acsssi the drug failed to prevent claims, Kurukshetra
भर्ती के दौरान चक्कर खाकर गिर अभ्यर्थियों का इलाज करते रेडक्रास के सदस्य। - फोटो : Amar Ujala

पुलिस भर्ती को नशे के साये पूरी तरह से अपने आगोश में ले लिया है। इसका खुलासा होने के बाद भी एचएसएससी नशे के प्रयोग और उसे पकड़ने में असफल रही है। लगातार मामले सामने आने के बाद एचएसएससी के अधिकारियों ने नशे की रोकथाम के दावे किए थे, लेकिन उनमें से एक भी पूरा नहीं किया। अभ्यर्थियों ने नशा किया या नहीं, इसकी जांच के लिए डॉक्टर किट तक उपलब्ध नहीं हो सकी। न ही किसी अभ्यर्थी की इससे जांच ही की गई। दो अभ्यर्थी की मौत और इससे पहले हुए उत्पात के बाद भी शनिवार को भर्ती में पुराना ढर्रा ही चला। कई अभ्यर्थी चक्कर खाकर गिरे। एक अभ्यर्थी की हालत गंभीर होने पर उसे एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। भर्ती स्थल के पास शनिवार को फिर यूज की गईं सिरिंज मिलीं। इससे भर्ती में नशे की आशंका मजबूत हो गई है।

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एचएसएससी हरियाणा पुलिस भर्ती करा रही है। भर्ती में शामिल होने आए तीन अभ्यर्थियों की मौत हो चुकी है। इनमें से एक की मौत ब्रह्मसरोवर में डूबने से हुई, जबकि दो की मौत का कारण नशे की ओवरडोज बताई जा रही है। इसके बाद भी भर्ती में नशे के प्रयोग को गंभीरता से नहीं लिया गया। भर्ती प्रक्रिया के तीसरे दिन ही भारी मात्रा में नशे में उपयोग की जाने वाली सामग्री अस्थाई बाथरूमों में मिली थी। ‘अमर उजाला’ ने इस प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बावजूद आयोजक सचेत नहीं हुए। भर्ती के पांचवें दिन अभ्यर्थियों ने जमकर उत्पात मचाया था।
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पुलिसकर्मी, सुरक्षाकर्मी और रेडक्रॉस के कर्मचारी के साथ एक अभ्यर्थी ने नशे में मारपीट तक कर दी थी। एक अन्य अभ्यर्थी का गला दबाने की कोशिश की गई थी। एक ने पॉलीक्लीनिक में बिजली के तार पकड़कर आत्महत्या का प्रयास किया था, जबकि एक ने एंबुलेंस के शीशे तोड़ दिए थे। इन सब घटनाओं के बाद भी एचएसएससी ने मामले की गंभीरता को नहीं लिया और गर्मी का असर बता कर शाम की भर्ती का शेड्यूल बदलकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।
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दावों पर भी अमल नहीं
एचएसएससी चेयरमैन भारत भूषण भारती ने कहा था कि स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र लिखा है कि वे यहां के चिकित्सकों को मदद के लिए भेजें। यह चिकित्सक भर्ती में आए अभ्यर्थियों की कंप्लीट मेडिकल रिपोर्ट तैयार करते। लेकिन, अभी तक एक भी अभ्यर्थी की मेडिकल रिपोर्ट सामने तैयार नहीं हुई है।

फिर दावा किया गया कि दौड़ से पहले अभ्यर्थी के नशे में होने की जांच की जाएगी। इसके लिए डॉक्टर किट बुलाने की बात भी कही गई। इतने दिनों में एक बार भी किसी अभ्यर्थी की जांच नहीं की गई। अभ्यर्थी नशे में दौड़ते रहे, गिरते रहे और उत्पात करते रहे। इसके बाद भी डॉक्टर किट का प्रयोग नहीं किया गया।  

हर दिन 25 अभ्यर्थी पहुंच रहे अस्पताल
दौड़ में शामिल अभ्यर्थियों के चक्कर खाकर गिरने की संख्या लगातार बढ़ रही है। पॉलीक्लीनिक में हर दिन औसतन करीब 25 अभ्यर्थी घायल या मानसिक संतुलन खोकर पहुंच रहे हैं। किसी-किसी दिन यहां आंकड़ा 40 के पार पहुंचा जाता है। इनमें से 55 अभ्यर्थियों को एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती किया जा चुका है।


शनिवार को भी बरती गई लापरवाही
भर्ती प्रक्रिया में शनिवार को भी वही ढर्रा रहा। सुबह पांच बजे शुरू हुई प्रक्रिया के बाद जब दौड़ शुरू हुई, तो आठ से ज्यादा अभ्यर्थी चक्कर खाकर गिर पड़े। इनमें आधे घायल हो गए। एक अभ्यर्थी जुलाना, जींद निवासी राकेश पुत्र रामफल की हालत गंभीर हो गई। बेसुध होने के बाद उसे एलएनजेपी ले जाया गया था। वहां उसे देर रात तक होश नहीं आया था। आशंका जताई जा रही है कि राकेश ने भी कोई नशे का उपयोग करके ही दौड़ लगाई होगी। इसका खुलासा उसके होश में आने के बाद ही होगा।

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