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Kurukshetra News: ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स ऑर्गेनाइजेशनज के सम्मेलन में शिक्षाविदों ने तैयार किया प्रस्ताव
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कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को रद्द किया जाए और जीडीपी का 10 फीसदी शिक्षा पर खर्च किया जाए। यह प्रस्ताव देश भर के शिक्षाविदों ने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स ऑर्गेनाइजेशन के सम्मेलन में तैयार किया है, जिस पर समर्थन के साथ मुहर लगाई गई। इस प्रस्ताव को अब केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
सैनी समाज भवन में आयोजित तीन दिवसीय 32वां सम्मेलन रविवार को संपन्न हुआ, जिसमें अंतिम दिन शिक्षाविदों ने 32 मांगों से भरा एक पत्र भी तैयार किया। यह पत्र भी केंद्र व प्रदेश सरकारों को भेजा जाएगा। उक्त मांगें पूरी न किए जाने पर राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन चलाने की बात कही है।
देशभर के कॉलेज और यूनिवर्सिटी शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एआईफुक्टो के इस सम्मेलन में तीन दिनों तक शिक्षा नीति पर मंथन किया। उन्होंने देश की शिक्षा-व्यवस्था विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया। एआईफुक्टो के अध्यक्ष प्रो.केशव भट्टाचार्य और महासचिव प्रो.अरुण कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से कॉन्फ्रेंस में पारित 32 मांगों का मांग-पत्र भेजा जाएगा, यदि कोई कार्यवाही नहीं हुई तो जुलाई में राष्ट्र-व्यापी आंदोलन शुरू किया जायेगा।
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वैकल्पिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति का तैयार किया मसौदा
कॉन्फ्रेंस के संयोजक डॉ.नरेंद्र चाहर ने बताया कि सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 को तत्काल रद्द करने,शिक्षा बजट पर जीडीपी का 10 फीसदी खर्च करने संबंधी प्रस्ताव पारित किए गए। कॉन्फ्रेंस प्रवक्ता डॉ.रविंद्र गासो ने बताया कि प्रथम सत्र में महासचिव की रिपोर्ट को तीन दिन की बहस के बाद पास किया गया तथा वैकल्पिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे को पेश किया गया जिसे सरकार को भेजा जाएगा। समापन समारोह में मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता दिल्ली यूनिवर्सिटी शिक्षक संघ (डूटा)की दो बार अध्यक्ष रही प्रो.नंदिता नारायण और विशिष्ट अतिथि प्रो.आभा देव हबीब रहीं। दोनों वक्ताओं ने नई शिक्षा नीति का विरोध जताया। इस अवसर पर दयानंद मलिक, राजेंद्र सिंह, हीरा लाल शर्मा,धर्मवीर भारद्वाज, सुरेश कुमार, प्रवीण कुमार शर्मा, राजेंद्र देशवाल ,सुरेंद्र दलाल, विजय सिंह, एमएल सिंगला, सरिता चौधरी, दर्शन लाल,मधु गोयल,सुनीता भार्गव, संतोष कुमारी, सतीश नरवाल को सम्मानित किया गया।
ये हैं मुख्य मांगे
सभी अस्थायी शिक्षकों को स्थाई किया जाए, समान काम-समान वेतन के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को सेल्फ फाइनेंस संस्थाओं के स्टाफ के लिए भी लागू करते हुए उन्हें सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतनमान दिया जाए। पुरानी पेंशन स्कीम बहाल की जाए। खाली पदों को भरा जाए और सभी वंचित वर्गों को वैधानिक आरक्षण दिया जाए। लड़कियों और वंचित वर्गों के विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाई जाए।
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सैनी समाज भवन में आयोजित तीन दिवसीय 32वां सम्मेलन रविवार को संपन्न हुआ, जिसमें अंतिम दिन शिक्षाविदों ने 32 मांगों से भरा एक पत्र भी तैयार किया। यह पत्र भी केंद्र व प्रदेश सरकारों को भेजा जाएगा। उक्त मांगें पूरी न किए जाने पर राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन चलाने की बात कही है।
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देशभर के कॉलेज और यूनिवर्सिटी शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एआईफुक्टो के इस सम्मेलन में तीन दिनों तक शिक्षा नीति पर मंथन किया। उन्होंने देश की शिक्षा-व्यवस्था विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया। एआईफुक्टो के अध्यक्ष प्रो.केशव भट्टाचार्य और महासचिव प्रो.अरुण कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से कॉन्फ्रेंस में पारित 32 मांगों का मांग-पत्र भेजा जाएगा, यदि कोई कार्यवाही नहीं हुई तो जुलाई में राष्ट्र-व्यापी आंदोलन शुरू किया जायेगा।
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वैकल्पिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति का तैयार किया मसौदा
कॉन्फ्रेंस के संयोजक डॉ.नरेंद्र चाहर ने बताया कि सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 को तत्काल रद्द करने,शिक्षा बजट पर जीडीपी का 10 फीसदी खर्च करने संबंधी प्रस्ताव पारित किए गए। कॉन्फ्रेंस प्रवक्ता डॉ.रविंद्र गासो ने बताया कि प्रथम सत्र में महासचिव की रिपोर्ट को तीन दिन की बहस के बाद पास किया गया तथा वैकल्पिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे को पेश किया गया जिसे सरकार को भेजा जाएगा। समापन समारोह में मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता दिल्ली यूनिवर्सिटी शिक्षक संघ (डूटा)की दो बार अध्यक्ष रही प्रो.नंदिता नारायण और विशिष्ट अतिथि प्रो.आभा देव हबीब रहीं। दोनों वक्ताओं ने नई शिक्षा नीति का विरोध जताया। इस अवसर पर दयानंद मलिक, राजेंद्र सिंह, हीरा लाल शर्मा,धर्मवीर भारद्वाज, सुरेश कुमार, प्रवीण कुमार शर्मा, राजेंद्र देशवाल ,सुरेंद्र दलाल, विजय सिंह, एमएल सिंगला, सरिता चौधरी, दर्शन लाल,मधु गोयल,सुनीता भार्गव, संतोष कुमारी, सतीश नरवाल को सम्मानित किया गया।
ये हैं मुख्य मांगे
सभी अस्थायी शिक्षकों को स्थाई किया जाए, समान काम-समान वेतन के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को सेल्फ फाइनेंस संस्थाओं के स्टाफ के लिए भी लागू करते हुए उन्हें सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतनमान दिया जाए। पुरानी पेंशन स्कीम बहाल की जाए। खाली पदों को भरा जाए और सभी वंचित वर्गों को वैधानिक आरक्षण दिया जाए। लड़कियों और वंचित वर्गों के विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाई जाए।