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Kurukshetra News: एनआईटी कुरुक्षेत्र में भवन सेवाओं पर एक साप्ताहिक लघु अवधि पाठ्यक्रम शुरू
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कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र के वास्तुकला और नियोजन विभाग की ओर से एक सप्ताह का लघु अवधि पाठ्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका शुभारंभ सोमवार को हुआ। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य संकाय सदस्यों, वास्तुकारों और भवन पेशेवरों को भवन सेवाओं के मूल सिद्धांतों और वास्तुशिल्प डिजाइन में उनके एकीकरण को लेकर शिक्षित करना और जागरूक बनाना है।
वास्तुकला और नियोजन विभाग के समन्वयक प्रो. एचके शर्मा ने बताया कि विभाग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी कड़ी में यह प्रयास भवन डिजाइन से जुड़े मानकों, सुरक्षा और नियोजन से जुड़ी जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। यह कार्यक्रम हाइब्रिड मोड में संचालित हो रहा है, जिससे दूरदराज के प्रतिभागियों को भी ऑनलाइन माध्यम से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
डॉ. जितेंद्र यादव और डॉ. कंचन गर्ग ने बताया कि पाठ्यक्रम में अग्निशमन सेवाएं, विद्युत, जल आपूर्ति, स्वच्छता, ध्वनिकी, लिफ्ट व एस्केलेटर, हीटिंग व वेंटिलेशन आदि विषयों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों में वास्तुशिल्प सोच की क्षमता विकसित करना है जिससे वे सुरक्षित और टिकाऊ भवन डिजाइनों की योजना बना सकें। डॉ. राजीव गर्ग ने बताया कि पाठ्यक्रम में दो समारोहों और 12 तकनीकी सत्रों के माध्यम से 40 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र में डीन (अकादमिक) प्रो. आरपी चौहान ने मूल्यों पर आधारित शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया। प्रतिभागियों ने पहले ही दिन विशेषज्ञों से मिले ज्ञान को संतोषजनक और उपयोगी बताया। इससे पहले जून 2025 में भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता में वास्तुकला डिजाइन पहलुओं पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को भी देशभर से सराहना मिली थी।
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वास्तुकला और नियोजन विभाग के समन्वयक प्रो. एचके शर्मा ने बताया कि विभाग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी कड़ी में यह प्रयास भवन डिजाइन से जुड़े मानकों, सुरक्षा और नियोजन से जुड़ी जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। यह कार्यक्रम हाइब्रिड मोड में संचालित हो रहा है, जिससे दूरदराज के प्रतिभागियों को भी ऑनलाइन माध्यम से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
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डॉ. जितेंद्र यादव और डॉ. कंचन गर्ग ने बताया कि पाठ्यक्रम में अग्निशमन सेवाएं, विद्युत, जल आपूर्ति, स्वच्छता, ध्वनिकी, लिफ्ट व एस्केलेटर, हीटिंग व वेंटिलेशन आदि विषयों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों में वास्तुशिल्प सोच की क्षमता विकसित करना है जिससे वे सुरक्षित और टिकाऊ भवन डिजाइनों की योजना बना सकें। डॉ. राजीव गर्ग ने बताया कि पाठ्यक्रम में दो समारोहों और 12 तकनीकी सत्रों के माध्यम से 40 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र में डीन (अकादमिक) प्रो. आरपी चौहान ने मूल्यों पर आधारित शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया। प्रतिभागियों ने पहले ही दिन विशेषज्ञों से मिले ज्ञान को संतोषजनक और उपयोगी बताया। इससे पहले जून 2025 में भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता में वास्तुकला डिजाइन पहलुओं पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को भी देशभर से सराहना मिली थी।
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