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ईश्वर का ध्यान लगाने पर टल जाता है बड़ा संकट : अनिल शास्त्री
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कुरुक्षेत्र। आरके एन्क्लेव पटियाला बैंक कॉलोनी में श्री गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा शनिवार को भी जारी रहा। भागवत प्रवक्ता वेदाचार्य अनिल शास्त्री ने कहा कि मनुष्य चाहता है कि उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण हों लेकिन संसार के किसी भी प्राणी की सभी इच्छा कभी पूरी नहीं हुई है। एक इच्छा की पूर्ति होने के बाद स्वत: दूसरी इच्छा खड़ी हो जाती है। और यही दुख का कारण है।
कथावाचक अनिल शास्त्री ने कहा कि जब तक इच्छाओं का दमन नहीं होगा तब तक हम परमात्मा की और अग्रसर नहीं हो सकते। वेदाचार्य अनिल शास्त्री ने कहा कि जितना सांसारिक चीजों में मोह माया बढ़ता जाएगा, उतना ही हम परमात्मा से दूर होते चले जाएंगे। अंत जीवन में परमात्मा प्राप्ति की इच्छा करने वाले लोगों को पहले अपनी इच्छाओं का दमन करना चाहिए और मनुष्य को अपनी इंद्रियों को बस में रखना चाहिए। वेदाचार्य अनिल शास्त्री ने कहा कि अगर मनुष्य को अपने अंदर कुछ विशेषता दिख रही है तो समझिए यह शरणागति और ईश्वर की प्राप्ति में बाधक है। जब तक मनुष्य को अपने बल का अभिमान रहता है तब तक वह भगवान के शरण में नहीं आ सकता।
ईश्वर के शरणागति होने पर मनुष्य सदा के लिए निर्भय हो जाता है। ईश्वर का ध्यान लगाने पर बड़े से बड़ा संकट टल जाता है। कथा के अवसर पर आचार्य रंगनाथ शास्त्री, उमेश साहनी, रिंकू शाक्या,वीरेंद्र बराङ, अर्जुन पासवान, सुनील कुमार, दिलीप राय, बाबू राम, प्रभु दयाल पासी, कमलेश शाक्या, किरण, गीता, अरुणा, सरोज, फूलवती, रोशनी, वंदना, सहित काफी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
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कथावाचक अनिल शास्त्री ने कहा कि जब तक इच्छाओं का दमन नहीं होगा तब तक हम परमात्मा की और अग्रसर नहीं हो सकते। वेदाचार्य अनिल शास्त्री ने कहा कि जितना सांसारिक चीजों में मोह माया बढ़ता जाएगा, उतना ही हम परमात्मा से दूर होते चले जाएंगे। अंत जीवन में परमात्मा प्राप्ति की इच्छा करने वाले लोगों को पहले अपनी इच्छाओं का दमन करना चाहिए और मनुष्य को अपनी इंद्रियों को बस में रखना चाहिए। वेदाचार्य अनिल शास्त्री ने कहा कि अगर मनुष्य को अपने अंदर कुछ विशेषता दिख रही है तो समझिए यह शरणागति और ईश्वर की प्राप्ति में बाधक है। जब तक मनुष्य को अपने बल का अभिमान रहता है तब तक वह भगवान के शरण में नहीं आ सकता।
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ईश्वर के शरणागति होने पर मनुष्य सदा के लिए निर्भय हो जाता है। ईश्वर का ध्यान लगाने पर बड़े से बड़ा संकट टल जाता है। कथा के अवसर पर आचार्य रंगनाथ शास्त्री, उमेश साहनी, रिंकू शाक्या,वीरेंद्र बराङ, अर्जुन पासवान, सुनील कुमार, दिलीप राय, बाबू राम, प्रभु दयाल पासी, कमलेश शाक्या, किरण, गीता, अरुणा, सरोज, फूलवती, रोशनी, वंदना, सहित काफी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
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