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आलू के दाम लुढ़के तो भड़के किसान, प्रदर्शन

Wed, 27 Dec 2017 12:49 AM IST
Updated Wed, 27 Dec 2017 12:49 AM IST
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आलू के दाम लुढ़के तो भड़के किसान, प्रदर्शन
आलू के दाम लुढ़के तो भड़के किसान, प्रदर्शन
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अमर उजाला ब्यूरो
बाबैन। आलू के दिनोंदिन घटते दामों को लेकर किसानों में भारी रोष है। इससे गुस्साए किसानों ने मंगलवार को जमकर रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान लोकतंत्र सुरक्षा मंच के जिलाध्यक्ष नायब सिंह पटाकमाजरा ने कहा कि किसान को उसकी फसल के दोगुने दाम देने का वादा भाजपा सरकार ने किया था। अब उनके दावों की पोल खुल रही है।

उन्होंने कहा कि किसानों को आलू की फसल में मुनाफा कमाना तो दूर उसकी लागत निकालने के भी लाले पड़ते दिख रहे हैं। किसान की फसल पहले ही सही दामों पर नहीं बिक रही। अब खेती करना घाटे का सौदा बनकर रह गया है। कहा कि आलू की फसल तैयार करने में किसानों का 30 से 35 हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च आ चुका है। अब दाम कम होने के कारण उसका खर्च निकालना तक मुश्किल हो रहा। किसान को फसल का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सब्जी की फसलों के न्यूनतम मूल्य पर लिए जाने की योजना अब तक शुरू नहीं की है। इससे भाजपा का किसान विरोधी चेहरा जनता के सामने उजागर हो रहा है। यदि आलू की फसल का न्यूनतम दाम किसान को दिया जाता तो उसे आने पौने दामों में आलू नहीं बेचना पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि प्रदेश सरकार आलू की खरीद के लिए कोई अच्छी नीति तैयार करती तो प्रदेश का किसान कर्जे में कभी न डूबता। उन्होंने कहा कि किसान को अन्नदाता कहा जाता है, आज वही परेशान होगा तो देश कैसे तरक्की करेगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार फसलों को तैयार करने में आने वाली लागत को देखते हुए फसल का न्यूनतम मूल्य तय कर दे तो किसानों को राहत मिल सकती है। लेकिन, भाजपा अपने किए वादों से मुकर रही है। सत्ता में आने से पूर्व भाजपा ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की घोषणा की थी, अब उसे लागू न करके किसानों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही किसानों के हित को देखते हुए कदम नहीं उठाया तो उन्हें किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इस मौके पर गुलजार सिंह कौलापुर, फूल सिंह, शीशपाल, सतबीर बहलोलपुर, मनोज, अमर सिंह, जसमेर सिंह, धर्मपाल आदि मौजूद रहे।
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