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कश्मीरी पंडितों के दुखों की दास्तान सुनकर गुरु तेग बहादुर जी हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए आए थेआगे : बाबा सुरेंद्र
Updated Sat, 25 Nov 2017 12:30 AM IST
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कश्मीरी पंडितों पुकार पर गुरु तेग बहादुर आगे आए थे हिंदू धर्म की रक्षा के लिए : बाबा सुरेंद्र
अमर उजाला ब्यूरो
बाबैन।
डेरा गुरुद्वारा मंढोखरा साहिब में हिंद दी चादर के नाम से जाने गए गुरु तेग बहादुर के शहीदी पर्व के उपलक्ष्य में कीर्तन दरबार आयोजित किया गया। इसमें देश और विदेश से आई संगतों ने भाग लिया। इस अवसर पर रागी एवं ढाडी जत्थों ने गुरु परंपरा के अनुसार गुरु कीर्तन किया और गुरु का लंगर अटूट बरताया।
संगत को संबोधित करते हुए डेरा गुरुद्वारा मंढोखरा साहिब के संस्थापक बाबा सुरेंद्र सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर बचपन से ही संत-स्वरूप, स्थिर-मना, गहन विचार वाले, त्यागी, गंभीर, दिलेर और निर्भय स्वभाव के थे। जब मुस्लिम शासक औरंगजेब हिंदुओं को प्रताड़ित कर उन्हें मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर कर रहा था, तब कश्मीर से आए पंडितों ने गुरु तेग बहादुर हिंदू धर्म की रक्षा की गुहार लगाई। इस पर गुरु तेग बहादुर आगे आए और उन्होंने अपना बलिदान देकर हिंदू धर्म की रक्षा की थी। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर के पुत्र गुरु गोबिंद सिंह ने भी उन्हीं के पद चिह्नो पर चलते हुए निष्काम भाव से मानवता की सेवा करना सिखाया। उन्होंने हमारे अंदर बलिदान की भावना पैदा की। उन्होंने कहा कि हम सब को इस पावन पर्व पर नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर गुरु ग्रंथ साहिब के दर्शाए मार्ग पर चलना चाहिए। इस अवसर पर बाबा सुरेंद्र सिंह ने अमरीका के शिकागो से विशेष रूप से पधारे अरमेंद्र सिंह, मुख्य सेवादार गुरदीप सिंह, गुरतेज सिंह सेखों, युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष हरप्रीत सिंह चीमा, हरपाल सिंह आदि को को सिरोपें भेंट कर उनका सम्मान किया।
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अमर उजाला ब्यूरो
बाबैन।
डेरा गुरुद्वारा मंढोखरा साहिब में हिंद दी चादर के नाम से जाने गए गुरु तेग बहादुर के शहीदी पर्व के उपलक्ष्य में कीर्तन दरबार आयोजित किया गया। इसमें देश और विदेश से आई संगतों ने भाग लिया। इस अवसर पर रागी एवं ढाडी जत्थों ने गुरु परंपरा के अनुसार गुरु कीर्तन किया और गुरु का लंगर अटूट बरताया।
संगत को संबोधित करते हुए डेरा गुरुद्वारा मंढोखरा साहिब के संस्थापक बाबा सुरेंद्र सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर बचपन से ही संत-स्वरूप, स्थिर-मना, गहन विचार वाले, त्यागी, गंभीर, दिलेर और निर्भय स्वभाव के थे। जब मुस्लिम शासक औरंगजेब हिंदुओं को प्रताड़ित कर उन्हें मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर कर रहा था, तब कश्मीर से आए पंडितों ने गुरु तेग बहादुर हिंदू धर्म की रक्षा की गुहार लगाई। इस पर गुरु तेग बहादुर आगे आए और उन्होंने अपना बलिदान देकर हिंदू धर्म की रक्षा की थी। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर के पुत्र गुरु गोबिंद सिंह ने भी उन्हीं के पद चिह्नो पर चलते हुए निष्काम भाव से मानवता की सेवा करना सिखाया। उन्होंने हमारे अंदर बलिदान की भावना पैदा की। उन्होंने कहा कि हम सब को इस पावन पर्व पर नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर गुरु ग्रंथ साहिब के दर्शाए मार्ग पर चलना चाहिए। इस अवसर पर बाबा सुरेंद्र सिंह ने अमरीका के शिकागो से विशेष रूप से पधारे अरमेंद्र सिंह, मुख्य सेवादार गुरदीप सिंह, गुरतेज सिंह सेखों, युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष हरप्रीत सिंह चीमा, हरपाल सिंह आदि को को सिरोपें भेंट कर उनका सम्मान किया।
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