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म्हारे छोरे-छोरियां फिल्मों में भी आगे, कैमरे में दिखा अनूठा हरियाणा

Thu, 12 Oct 2017 12:47 AM IST
Updated Thu, 12 Oct 2017 12:47 AM IST
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म्हारे छोरे-छोरियां फिल्मों में भी आगे, कैमरे में दिखा अनूठा हरियाणा
अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र।
हरियाणा के युवाओं में एक अच्छे फिल्मकार की झलक लघु फिल्म प्रतियोगिता में नजर आई। केयू में रत्नावली महोत्सव के दूसरे दिन सीनेट हॉल में हरियाणवी लघु फिल्म प्रतियोगिता के दौरान प्रदेशभर की टीमों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में हरियाणा के युवाओं में एक अच्छे फिल्मकार की झलक देखने को मिली। युवा कलाकारों ने कैमरे के माध्यम से हरियाणा की सामाजिक और सांस्कृतिक समस्याओं पर कटाक्ष भी किया और इन समस्याओं से निपटने के रास्ते भी बताए।
इस प्रतियोगिता में दीपल कमल सहारण, वैराम मस्त और गीतू पुरी ने निर्णायक मंडल की भूमिका निभाई। प्रथम हरियाणवी लघु फिल्म राजकीय महाविद्यालय भिवानी की दिखाई गई। इसमें युवाओं में फेल रही नशे की लत के बारे में बताया गया कि कैसे आज का युवा नशे में धुत होकर अपनी एक अलग ही दुनिया बनाने में लगा हुआ है। इस फिल्म में यह दिखाया गया कि नशा किस तरह जीवन को समाप्त करता है। द्वितीय प्रस्तुती डीएवी गर्ल्स कॉलेज यमुनानगर ने दी। इसमें प्रगतिशील किसान के सफल प्रयासों को दर्शाया गया और कृषि को आधुनिकता से कैसे जोड़ा जा रहा है, यह दिखाया गया।
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अंतरजातीय विवाह पर यूटीडी ने समाज में फैली कुरीतियों पर केंद्रित एक फिल्म प्रस्तुत की। इसमें दिखाया गया कि हमारा समाज आज भी जातिवाद से जुड़ा है। इसको समाप्त करने के लिए अंतरजातीय विवाह अहम भूमिका निभा सकता है। आर्य पीजी कॉलेज पानीपत ने ‘नकाब’ फिल्म प्रस्तुत की। यह फिल्म धर्म के नाम पर अधर्म करने वाले ढोंगी बाबाओं की पोल खोलती है। प्रदेश के सभी प्रतिभागियों की प्रस्तुती को दर्शकों ने जमकर सराहा।
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आर्केस्ट्रा की धुन पर थिरके दर्शक
कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय रत्नावली महोत्सव के दूसरे दिन आडिटोरियम हॉल में हरियाणवी आर्केस्ट्रा प्रतियोगिता हुई। इसमें कुल 16 टीमों ने भाग लिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। हरियाणा की संस्कृति को परिलक्षित करती हरियाणवी आर्केस्ट्रा की इस प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल के निर्णायक और बुजुर्ग भी नाचते नजर आए। इस विधा में हरियाणा के प्राचीन वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया। इनमें क्रमश: बेंजो, ढोलक, ताशा, गाढा, ढेरू, चिमटा, हरियाणा तुंबा, घुंघरू, मंजीरा, गबचू का प्रयोग किया गया। युवाओं ने हरियाणवी संस्कृति और हरियाणवी वाद्य यंत्रों को सराहा। इस प्रतियोगिता में डीएवी कॉलेज यमुनानगर, गवर्नमेंट कालेज छछरौली, भगवान परशुराम कॉलेज कुरुक्षेत्र, जीएनजी कॉलेज संतपुरा, केएम गवर्नमेंट कॉलेज नरवाना ने भाग लिया।

रागिनी में गवर्नमेंट कॉलेज हांसी ने बाजी मारी
रत्नावली महोत्सव में आयोजित पॉप सांग हरियाणवी में आर्य पीजी कॉलेज और रागिनी प्रतियोगिता में गवर्नमेंट कॉलेज हांसी की टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की। हरियाणवी रीति-रिवाज में डीएन कॉलेज हिसार और हरियाणवी भजन में हिंदू कन्या महाविद्यालय जींद के कलाकारों ने जीत हासिल की। युवा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक डॉ. सीडीएस कौशल ने बताया कि हरियाणवी भजन प्रतियोगिता में हिन्दू कन्या महाविद्यालय जींद प्रथम, जीएन खालसा कॉलेज करनाल दूसरे, यूनिवर्सिटी कॉलेज आफ एजुकेशन तीसरे, केएम गवर्नमेंट कालेज नरवाना चौथे और आईजी महिला महाविद्यालय कैथल की टीम पांचवें स्थान पर रही।

हरियाणवी भाषण प्रतियोगिता में शाह सतनाम जी कालेज सिरसा रहा प्रथम
सोलो डांस पुरुष में आर्य कॉलेज पानीपत प्रथम, यूटीडी दूसरे और गवर्नमेंट कॉलेज पंचकूला की टीम तीसरे स्थान पर रही। सोलो डांस महिला वर्ग में डीएवी कॉलेज फार वूमेन यमुनानगर की टीम प्रथम, आर्य कॉलेज पानीपत दूसरे, यूटीडी कुरुक्षेत्र और गवर्नमेंट कॉलेज पंचकूला की टीम संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रही। हरियाणवी गजल प्रतियोगिता में जीएन खालसा कॉलेज प्रथम, आईजी महिला महाविद्यालय कैथल और आर्य पीजी कॉलेज पानीपत संयुक्त रूप से दूसरे, यूनिवर्सिटी कालेज ऑफ एजुकेशन तीसरे, यूटीडी कुरुक्षेत्र चौथे और एसडी कॉलेज पानीपत की टीम पांचवे स्थान पर रही।

आर्य कॉलेज ने बनाई सबसे बेहतरीन फुलझड़ी
डॉ. कौशल ने बताया कि फुलझड़ी बनाओं प्रतियोगिता में आर्य कालेज पानीपत प्रथम, डीएवी कालेज यमुनानगर दूसरे और गवर्नमेंट कालेज जींद तीसरे स्थान पर रही। हरियाणवी बेस्ट सेल्फी प्रतियोगिता में केएम गवर्नमेंट कॉलेज नरवाना के विक्रम प्रथम, आईजी महिला महाविद्यालय की ईशा दूसरे, सीआर किसान कॉलेज जींद की सोनाक्षी, डीएवी कॉलेज यमुनानगर की अपूर्वा संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रही। हरियाणवी रीति-रिवाज प्रतियोगिता में डीएन कॉलेज हिसार प्रथम, गवर्नमेंट कॉलेज भिवानी दूसरे और केएम गवर्नमेंट कॉलेज नरवाना तीसरे स्थान पर रहे। पॉप सांग हरियाणवी प्रतियोगिता में आर्य कालेज पानीपत प्रथम, आईजी महलिा महाविद्यालय दूसरे, जीएन खालसा कॉलेज करनाल तीसरे स्थान पर रहा। हरियाणवी दुर्लभ आभूषण प्रतियोगिता में भगवान परशुराम कॉलेज कुरुक्षेत्र की टीम प्रथम, आरकेएसडी कॉलेज कैथल दूसरे, पंडित चिरंजीलाल गवर्नमेंट कॉलेज करनाल की टीम तीसरे स्थान पर रही। रागिनी प्रतियोगिता में गवर्नमेंट कॉलेज हांसी प्रथम, आईजी महिला महाविद्यालय कैथल दूसरे, जनता कालेज कौल तीसरे, गुरुनानक गर्ल्स कॉलेज यमुनानगर चौथे और राजीव गांधी महिला महाविद्यालय उचाना की टीम पांचवें स्थान पर रही।

आज शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा होंगे मुख्य अतिथि
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय रत्नावली महोत्सव के तीसरे दिन हरियाणा के शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा करेंगे। शाम के कार्यक्रम में लाडवा के विधायक डॉ. पवन सैनी मुख्य अतिथि होंगे।

खा ए.. खीर हीर तेरे खातर छोडया मणै सारा भाईचारा
कुरुक्षेत्र।
रत्नावली महोत्सव के दौरान आडिटोरियम हॉल में युवा थिरकते रहे तो खुले मंच पर पिछले दो दिनों से चल रही सांग की प्रस्तुति बुजुर्ग दर्शकों को आकर्षित कर रही है। मंगलवार देर शाम इस मंच पर पंडित लख्मीचंद को याद करते हुए दंपत सिंह सांगी द्वारा रचित हीर रांझा सांग पर कुलदीप सांगी ने अपनी प्रस्तुति दी। खा ए.. खीर हीर तेरे खातर छोड्या मणै सारा भाईचारा... पर तू ही करगी मणै आज अपने ते न्यारा...। हरियाणा में सांग का एक अलग ही महत्व है। कार्यक्रम की आश्चर्यजनक बात यह रही कि बुजुर्ग पीढ़ी के साथ-साथ युवा वर्ग ने भी बड़े चाव से सांग का लुत्फ उठाया। नारनौल से आए एक बुजुर्ग ने बताया कि इस प्रकार के आयोजनों से नई पीढ़ी को हरियाणवी संस्कृति जानने का अवसर मिलता है। वह पिछले सात सालों से हरियाणवी सांग को देखने आते हैं।
इसी प्रकार कैथल से आए बुजुर्ग दंपति ने बताया कि सांग के प्रत्येक किस्से में छिपे संदेश के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलती है। युवा वर्ग संस्कृति की और जागरूक होता है। यमुनानगर के डीएवी कॉलेज की छात्रा ने बताया कि रत्नावली के माध्यम से हरियाणा प्रदेश की लुप्त हो रही लोकनृत्य कला सांग को जागृत किया जाता है। युवा पीढ़ी तक पहुंचाया जाता है। उत्तर प्रदेश से आए बुजुर्ग गजेंद्र सिंह ने बताया कि इस तरह के आयोजन संस्कृति को बढ़ावा देेते हैं। किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी लोक संस्कृति से है। हरियाणा की युवा पीढ़ी रत्नावली के माध्यम से हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत को जिंदा रखने का काम कर रही है।

हरियाणवी संस्कृति का आइना है रत्नावली : सुधा
थानेसर के विधायक सुभाष सुधा ने कहा है कि रत्नावली हरियाणवी संस्कृति की पहचान है। यह इस प्रदेश की संस्कृति का एक ऐसा आइना है, जिसके माध्यम से कलाकार हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को इस मंच से मंचित करते हैं। वे मंगलवार को देर शाम कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आडिटोरियम हॉल में आयोजित रत्नावली महोत्सव के सांय कालीन सत्र में कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। सुधा ने कहा कि आज रत्नावली के माध्यम से हरियाणा प्रदेश के साथ पूरी दुनिया में कुरुक्षेत्र का प्रचार हो रहा है। विधायक ने सफल आयोजन के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा और कुलसचिव डॉ. प्रवीण कुमार सैनी को बधाई देते हुए कहा कि हरियाणा स्वर्ण जयंती वर्ष में राष्ट्रीय स्तर पर रत्नावली का आयोजन कर एक सराहनीय प्रयास है।

‘छोड़ चली मां मैं तो तेरा आंगना...’
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। रत्नावली महोत्सव के आरके सदन के मंच से बुधवार को हरियाणा की लोक संस्कृति की महक हरियाणवी लोकगीतों में दिखी। प्रदेश भर के कॉलेजों से आए प्रतिभागियों ने हरियाणवी लोकगीतों को ऐसे अंदाज में प्रस्तुत किया कि दर्शक सुनते ही रह गए। इस प्रतियोगिता में प्रदेशभर से 20 से अधिक टीमों ने भाग लिया। प्रथम प्रस्तुति आर्य पीजी कॉलेज पानीपत की टीम ने दी जिसके बोल थे ‘छोड़ चली मां मैं तो तेरा आंगना...’। इसकी प्रस्तुत पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। लोकगीत प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. स्मृति भारद्वाज, डॉ. प्रीति सैरावत और डॉ. वैराम शामिल थे। हरियाणवी लोकगीत प्रतियोगिता में दूसरी प्रस्तुति डीबी कॉलेज पानीपत ने दी। इसके बोल थे ‘भाण तू अपना परण निभाइये...’। इसके बाद राजीव गांधी कॉलेज उचानाकलां ने ‘छोरी मंगल गावण लगी...’ की प्रस्तुत दी। द्रोणाचार्य डिग्री कॉलेज कुरुक्षेत्र के विद्यार्थियों ने तीज का त्यौहार सखी सब झूलन चालइयों..., तो भगवान परशुराम कॉलेज ने ‘वा हे गुजरिया मेरे मन में बसी...’ लोकगीत की प्रस्तुति दी। छठी प्रस्तुति डीएवी गर्ल्स कॉलेज यमुनानगर ने ‘सखी तू अपना परण निभाईये...’ की दी। इस दौरान मंच संचालन रत्नावली टीम के सदस्यों ने किया। इस प्रतियोगिता में राजकीय महिला महाविद्यालय जींद, सीआर किसान कॉलेज जींद, डीबीजी राजकीय महाविद्यालय पानीपत, आईजी महिला महाविद्यालय कैथल, डीएवी कॉलेज यमुनानगर, आर्य कॉलेज पानीपत, एसडी कॉलेज पानीपत, राजकीय महाविद्यालय जींद, गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय हिसार, राजकीय महाविद्यालय हांसी, राजकीय महाविद्यालय पंचकूला, आरकेएसडी कॉलेज कैथल, द्रोणाचार्य कॉलेज कुरुक्षेत्र, आईजी हकॉलेज लाडवा, भगवान परशुराम कॉलेज कुरुक्षेत्र, यूटीडी कुरुक्षेत्र की टीम ने भाग लिया।
हरियाणवी पगड़ी की धूूम
रत्नावली महोत्सव के दूसरे दिन हरियाणवी पगड़ी का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोला। इस प्रतियोगिता में कुल नौ प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें 5 लड़कियों ने हरियाणवी वेशभूषा का हिस्सा रही पगड़ी को मनमोहक अंदाज में पेश किया। इस मंच पर लड़कियां एक बार फिर बेहतर साबित हुईं। बुधवार को दूसरे दिन आडिटोरियम हॉल में हरियाणवी पगड़ी बांधने की प्रतियोगिता हुई। प्रतियोगिता के दौरान गाया गाना संभालो या पगड़ी, पगड़ी अपना सम्मान... को सभी ने पसंद किया। प्रतियोगिता के दौरान पगड़ी बांधने के लिए चार मिनट दिए गए। इस प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल मेें रघुविंदर, सुमेर और हरियाणवी शामिल थे। प्रतियोगिता में आरकेएसडी कॉलेज कैथल, माता सुंदरी गर्ल्स कॉलेज करनाल, पीसीएलएस गवर्नमेंट कॉलेज करनाल, डीएवी कालेज फार गर्ल्स यमुनानगर, यूटीडी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, हिंदू कन्या महाविद्यालय जींद आदि टीमों ने भाग लिया।

रत्नावली उत्सव में आज के कार्यक्रम
केयू युवा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक डॉ. सीडीएस कौशल ने बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में चल रहे राष्ट्र स्तरीय रत्नावली उत्सव के तीसरे दिन गुरुवार को आडिटोरियम हाल में सुबह 10 बजे चौपाल, शाम तीन बजे ग्रुप डांस रसिया, आरके सदन में सुबह 10 बजे ग्रुप सांग हरियाणवी, ओपन एयर थियेटर में सुबह 10 बजे हरियाणवी फोक इंस्ट्रूमेंटल सोलो, सीनेट हाल में सुबह 10 बजे कविता पाठ प्रतियोगिता और दोपहर दो बजे हरियाणवी क्विज, खुला मंच प्रतियोगिता में दोपहर एक बजे सांग प्रतियोगिता, क्रश हाल में सुबह 11 बजे ऑन द स्पॉट पेंटिंग और दोपहर दो बजे एग्जीबिशन ऑफ पेंटिंग प्रतियोगिता होगी।


उजाडूं तेरे बाग नै... ने किया भरपूर मनोरंजन
मंगलवार को ओपन एयर थियेटर में हरियाणवी रागिनी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इसमें प्रदेश भर की टीमों ने भाग लिया। कार्यक्रम में रागिनी विधा को सम्मिलित करने का उद्देश्य हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा देना और दर्शकों को इससे अवगत कराना है। रागिनी के माध्यम से दर्शक हरियाणवी संस्कृति से रूबरू हुए। हरियाणवी रागिनी प्रतियोगिता में प्रतिभागियों के साथ दर्शकों ने भी खूब आनंद लिया। मैं के उजाडूं तेरे बाग नै... जैसी रागनियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। निर्णायक मंडल में सतीश हरियाणवी, मंजू देवयानीर और रामपाल बलारा शामिल थे। प्रथम प्रस्तुति डीएवी कॉलेज यमुनानगर ने दी। दूसरी प्रस्तुति आर्य पीजी कॉलेज पानीपत ने दी। इसके अलावा केएम कालेज नरवाना गर्वनमेंट कालेज जींद, डीएवी कालेज साढौरा, आईजी पीजी महिला महाविद्यालय कैथल, आईजी नेशनल कॉलेज लाडवा, भगवान परशुराम कॉलेज कुरुक्षेत्र, यूटीडी कुरुक्षेत्र, यूसीके कुरुक्षेत्र आदि टीमों ने अपनी अच्छी भागीदारी दिखाई।
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