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लाखों रूपये प्रीमियम कटा, 1350 एकड़ फसल तबाह, बीमा कंपनी नदारद
Updated Tue, 04 Jul 2017 12:05 AM IST
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सेवा सिंह
कुरुक्षेत्र।
लाखों रुपये प्रीमियम कटा तो जिले भर में करीब 325 से अधिक किसानों की 1350 एकड़ फसल भी बारिश से तबाह हो गई, लेकिन इसके लिए बीमा देने वाली कंपनी नदारद है। ऐसे में किसानों को फसली नुकसान की भरपाई हो पाएगी या नहीं, इसको लेकर किसानों मेें संशय है। अब वे कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं तो उनमें खराब फसलों के लिए सर्वे कब होगा यह भी तय नहीं हो पाया है।
ऐसी स्थिति में जहां किसानों पर बारिश के चलते दोहरी मार पड़ी है वहीं पिछले वर्ष ही शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर भी सवाल खड़े किए जाने लगे है। बता दें कि पहले 19 जून को बारिश हुई तो किसानों के चेहरे खिल गए थे, जिसके बाद धान लगाने के कार्य में एकाएक तेजी आ गई थी। इसके बाद 28 से लेकर 30 जून तक हुई बारिश ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया। हालांकि कृषि विभाग की मानें तो जिला भर में दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों की करीब 5 हजार एकड़ फसल अधिक बारिश से प्रभावित हुई, लेकिन बारिश बंद होने के अगले 48 घंटे के दौरान करीब 325 किसानों ने मुआवजे के लिए आवेदन किया। इसमें सबसे अधिक किसान थानेसर व पिहोवा ब्लॉक से है। विभाग ने भी आवेदन धड़ल्ले से लिए और उच्चाधिकारियों को भी इन किसानों की रिपोर्ट भेज दी, लेकिन बीमा कंपनी को लेकर किसानों व अधिकारियों की चिंता बढ़ने लगी है।
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बीमा कंपनी का न कार्यालय न अधिकारी
किसानों की फसल के बीमे के लिए इस बार जिस कंपनी को सरकार ने अधिकृत किया है, कृषि विभाग के अनुसार भी अभी तक उसका जिला में न तो कोई कार्यालय ही खुल पाया है और न हीं कोई अधिकारी व प्रतिनिधि ही यहां पहुंचा है। कंपनी यहां अपना कार्यालय कब खोलेगी यह किसानों को तो दूर कृषि विभाग के अधिकारियों को भी मालूम नहीं हो पा रहा है। उधर कृषि अधिकारियों की ओर से दिए गए कंपनी के संबंधित अधिकारी अरूण चौहान से प्रयास के बावजूद संपर्क नहीं हो पाया।
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कुदरत भी मार रही तो सरकार भी
खराब हुई फसलों को लेकर पहले आवेदन और बाद में सर्वे करवाए जाने की मांग को लेकर कृषि विभाग कार्यालय में पहुंचे गांव जखवाला के किसान सुखदेव व कर्म सिंह के अलावा ईशाकपुर, बालापुर व कलावड़ सहित कई गांवों के किसानों का कहना है कि पहले कुदरत ने मारा तो फिर सरकार की भी मार पड़ रही है। जब उनकी फसलों के बीमे को लेकर प्रीमियम एक जून से ही काट लिया गया तो खराब हुई फसलों का सर्वे बारिश रूकने के चार दिन बाद भी नहीं किया जा रहा है। ऐसे में किसान दुविधा में है कि सर्वे होगा या नहीं और बीमा राशि भी मिल पाएगी या नहीं। ऐसे में किसान न तो दोबारा धान की रोपाई कर पा रहे है और न ही उन्हें कोई सटीक जानकारी ही मिल पा रही है। अनेकों किसानों की तो पूरी फसल ही तबाह हो चुकी है।
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धान, मक्का, बाजरा व कपास है योजना में शामिल
जिला में वर्तमान खरीफ सीजन में धान, मक्का, बाजरा व कपास को बीमा योजना के अंतर्गत शामिल किया गया जबकि रबी के सीजन में गेहूं, जौ, चना व सरसों शामिल की जाती है। बारिश से जिला में सबसे अधिक धान की फसल ही खराब हुई है जबकि इस बार 1 लाख 5 हजार हेक्टेयर एरिया में धान का लक्ष्य रखा गया था।
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18 वर्ष बाद हुई जून माह में इतनी बारिश
वर्ष (जून माह) बारिश की मात्रा
1991 104 एमएम
1995 105 एमएम
1998 282 एमएम
2008 113 एमएम
2011 145 एमएम
2013 177 एमएम
2017 193 एमएम
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8 जुलाई के बाद हो सकता है सर्वे : उपनिदेशक
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ कर्मचंद का कहना है कि संबंधित बीमा कंपनी की ओर से बारिश में नष्ट हुई फसल का सर्वे 8 जुलाई के बाद होने की संभावना है। कंपनी के अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है और उच्चाधिकारियों को भी पूरी स्थिति से अवगत करवा दिया गया है। सर्वे से ही स्पष्ट हो पाएगा कि वास्तविकता में कितनी और किस किसान की फसल नष्ट हुई है। अभी जो भी किसान आवेदन कर चुके है, उनकी रिपोर्ट तैयार की गई है।
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कुरुक्षेत्र।
लाखों रुपये प्रीमियम कटा तो जिले भर में करीब 325 से अधिक किसानों की 1350 एकड़ फसल भी बारिश से तबाह हो गई, लेकिन इसके लिए बीमा देने वाली कंपनी नदारद है। ऐसे में किसानों को फसली नुकसान की भरपाई हो पाएगी या नहीं, इसको लेकर किसानों मेें संशय है। अब वे कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं तो उनमें खराब फसलों के लिए सर्वे कब होगा यह भी तय नहीं हो पाया है।
ऐसी स्थिति में जहां किसानों पर बारिश के चलते दोहरी मार पड़ी है वहीं पिछले वर्ष ही शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर भी सवाल खड़े किए जाने लगे है। बता दें कि पहले 19 जून को बारिश हुई तो किसानों के चेहरे खिल गए थे, जिसके बाद धान लगाने के कार्य में एकाएक तेजी आ गई थी। इसके बाद 28 से लेकर 30 जून तक हुई बारिश ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया। हालांकि कृषि विभाग की मानें तो जिला भर में दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों की करीब 5 हजार एकड़ फसल अधिक बारिश से प्रभावित हुई, लेकिन बारिश बंद होने के अगले 48 घंटे के दौरान करीब 325 किसानों ने मुआवजे के लिए आवेदन किया। इसमें सबसे अधिक किसान थानेसर व पिहोवा ब्लॉक से है। विभाग ने भी आवेदन धड़ल्ले से लिए और उच्चाधिकारियों को भी इन किसानों की रिपोर्ट भेज दी, लेकिन बीमा कंपनी को लेकर किसानों व अधिकारियों की चिंता बढ़ने लगी है।
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बीमा कंपनी का न कार्यालय न अधिकारी
किसानों की फसल के बीमे के लिए इस बार जिस कंपनी को सरकार ने अधिकृत किया है, कृषि विभाग के अनुसार भी अभी तक उसका जिला में न तो कोई कार्यालय ही खुल पाया है और न हीं कोई अधिकारी व प्रतिनिधि ही यहां पहुंचा है। कंपनी यहां अपना कार्यालय कब खोलेगी यह किसानों को तो दूर कृषि विभाग के अधिकारियों को भी मालूम नहीं हो पा रहा है। उधर कृषि अधिकारियों की ओर से दिए गए कंपनी के संबंधित अधिकारी अरूण चौहान से प्रयास के बावजूद संपर्क नहीं हो पाया।
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कुदरत भी मार रही तो सरकार भी
खराब हुई फसलों को लेकर पहले आवेदन और बाद में सर्वे करवाए जाने की मांग को लेकर कृषि विभाग कार्यालय में पहुंचे गांव जखवाला के किसान सुखदेव व कर्म सिंह के अलावा ईशाकपुर, बालापुर व कलावड़ सहित कई गांवों के किसानों का कहना है कि पहले कुदरत ने मारा तो फिर सरकार की भी मार पड़ रही है। जब उनकी फसलों के बीमे को लेकर प्रीमियम एक जून से ही काट लिया गया तो खराब हुई फसलों का सर्वे बारिश रूकने के चार दिन बाद भी नहीं किया जा रहा है। ऐसे में किसान दुविधा में है कि सर्वे होगा या नहीं और बीमा राशि भी मिल पाएगी या नहीं। ऐसे में किसान न तो दोबारा धान की रोपाई कर पा रहे है और न ही उन्हें कोई सटीक जानकारी ही मिल पा रही है। अनेकों किसानों की तो पूरी फसल ही तबाह हो चुकी है।
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धान, मक्का, बाजरा व कपास है योजना में शामिल
जिला में वर्तमान खरीफ सीजन में धान, मक्का, बाजरा व कपास को बीमा योजना के अंतर्गत शामिल किया गया जबकि रबी के सीजन में गेहूं, जौ, चना व सरसों शामिल की जाती है। बारिश से जिला में सबसे अधिक धान की फसल ही खराब हुई है जबकि इस बार 1 लाख 5 हजार हेक्टेयर एरिया में धान का लक्ष्य रखा गया था।
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18 वर्ष बाद हुई जून माह में इतनी बारिश
वर्ष (जून माह) बारिश की मात्रा
1991 104 एमएम
1995 105 एमएम
1998 282 एमएम
2008 113 एमएम
2011 145 एमएम
2013 177 एमएम
2017 193 एमएम
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8 जुलाई के बाद हो सकता है सर्वे : उपनिदेशक
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ कर्मचंद का कहना है कि संबंधित बीमा कंपनी की ओर से बारिश में नष्ट हुई फसल का सर्वे 8 जुलाई के बाद होने की संभावना है। कंपनी के अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है और उच्चाधिकारियों को भी पूरी स्थिति से अवगत करवा दिया गया है। सर्वे से ही स्पष्ट हो पाएगा कि वास्तविकता में कितनी और किस किसान की फसल नष्ट हुई है। अभी जो भी किसान आवेदन कर चुके है, उनकी रिपोर्ट तैयार की गई है।