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पिहोवा में सूखे मिले सरस्वती तीर्थ के घाट, बिना पानी किया श्रद्धालुओं ने तर्पण
Updated Sun, 19 Nov 2017 12:22 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र/ पिहोवा।
मार्गशीर्ष की शनिश्चरी अमावस्या पर कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर और सन्निहित सरोवर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। वहां उन्होंने पूजा अर्चना और तर्पण कर स्नान किया। यहां लोग अल सुबह ही पहुंचने लगे थे। शनिश्चरी अमावस्या के चलते बड़ी संख्या में पंडे भी पूजा अर्चना करवाने पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पितरों के लिए तर्पण और पूजा की और दोनों सरोवर में स्नान किया।
शनिश्चरी अमावस्या पर शनि मंदिरों में भी विशेष आयोजन किए गए। पिहोवा स्थित सरस्वती सरोवर को जलविहिन देखकर श्रद्धालु परेशान दिखे। यह पहला मौका नहीं था कि श्रद्धालु बिना स्नान किए लौट गए हों। जींद के गांव जामनी से आए रामफल सैनी ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ तीर्थ पर पितरों के लिए पूजा करने पहुंचे थे। सरोवर में जल न होने के कारण उन्हें आचमन के लिए भी जल नसीब नहीं हुआ। तर्पण भी सूखे सरोवर में ही करना पड़ा। श्रद्धालुओं को प्रेत पीपल पर लोटे से ही जल अर्पित कर संतोष करना पड़ा। नप सचिव सुशील कुमार ने बताया कि सरस्वती में बहते जल के लिए लेवलिंग और महिला घाट का निर्माण प्रगति पर है। इसलिए सरोवर को खाली किया गया है। श्रद्धालुओं के लिए वाल्मीकि घाट पर व्यवस्था की गई थी।
पहले करना चाहिए था प्रबंध: कौशिक
तीर्थ पुरोहित परवेश कौशिक ने बताया कि करीब-करीब हर अमावस्या पर श्रद्धालुओं को सरोवर में पानी से संबंधित परेशानी का सामना करना पड़ता है। कभी सरोवर का पानी गंदा और दूषित होता है, तो कभी सरोवर में पानी ही नहीं होता। आस्था की चलते ही श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। लेकिन, तीर्थ की दशा को देकर श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचती है। इस बार भी तीर्थ में जल नहीं था। उन्होंने बताया कि तीर्थ पर घाटों का निर्माण कार्य चल रहा है। इसलिए प्रशासन को पहले ही अलग से व्यवस्था करनी चाहिए थी।
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तमिलनाडु की राज्यसभा सांसद पहुंची सरस्वती तीर्थ
अमावस्या पर तमिलनाडु की राज्यसभा सांसद शशिकला सरस्वती तीर्थ पर पहुंचीं। उनके साथ तमिलनाडु के जज रामानाथन भी थे। उन्होंने पितरों के लिए पूजा करवाई।
गीता जयंती महोत्सव पर भी सूखे रहेंगे
पिहोवा में 28 नवंबर से तीन दिवसीय गीता जयंती महोत्सव होगा। इस बार सरस्वती तीर्थ जल विहीन रहेगा। तीर्थ में बहते जल के लिए लेवलिंग का काम चल रहा है। इस कारण सरस्वती सरोवर को खाली किया गया है।
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कुरुक्षेत्र/ पिहोवा।
मार्गशीर्ष की शनिश्चरी अमावस्या पर कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर और सन्निहित सरोवर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। वहां उन्होंने पूजा अर्चना और तर्पण कर स्नान किया। यहां लोग अल सुबह ही पहुंचने लगे थे। शनिश्चरी अमावस्या के चलते बड़ी संख्या में पंडे भी पूजा अर्चना करवाने पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पितरों के लिए तर्पण और पूजा की और दोनों सरोवर में स्नान किया।
शनिश्चरी अमावस्या पर शनि मंदिरों में भी विशेष आयोजन किए गए। पिहोवा स्थित सरस्वती सरोवर को जलविहिन देखकर श्रद्धालु परेशान दिखे। यह पहला मौका नहीं था कि श्रद्धालु बिना स्नान किए लौट गए हों। जींद के गांव जामनी से आए रामफल सैनी ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ तीर्थ पर पितरों के लिए पूजा करने पहुंचे थे। सरोवर में जल न होने के कारण उन्हें आचमन के लिए भी जल नसीब नहीं हुआ। तर्पण भी सूखे सरोवर में ही करना पड़ा। श्रद्धालुओं को प्रेत पीपल पर लोटे से ही जल अर्पित कर संतोष करना पड़ा। नप सचिव सुशील कुमार ने बताया कि सरस्वती में बहते जल के लिए लेवलिंग और महिला घाट का निर्माण प्रगति पर है। इसलिए सरोवर को खाली किया गया है। श्रद्धालुओं के लिए वाल्मीकि घाट पर व्यवस्था की गई थी।
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पहले करना चाहिए था प्रबंध: कौशिक
तीर्थ पुरोहित परवेश कौशिक ने बताया कि करीब-करीब हर अमावस्या पर श्रद्धालुओं को सरोवर में पानी से संबंधित परेशानी का सामना करना पड़ता है। कभी सरोवर का पानी गंदा और दूषित होता है, तो कभी सरोवर में पानी ही नहीं होता। आस्था की चलते ही श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। लेकिन, तीर्थ की दशा को देकर श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचती है। इस बार भी तीर्थ में जल नहीं था। उन्होंने बताया कि तीर्थ पर घाटों का निर्माण कार्य चल रहा है। इसलिए प्रशासन को पहले ही अलग से व्यवस्था करनी चाहिए थी।
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तमिलनाडु की राज्यसभा सांसद पहुंची सरस्वती तीर्थ
अमावस्या पर तमिलनाडु की राज्यसभा सांसद शशिकला सरस्वती तीर्थ पर पहुंचीं। उनके साथ तमिलनाडु के जज रामानाथन भी थे। उन्होंने पितरों के लिए पूजा करवाई।
गीता जयंती महोत्सव पर भी सूखे रहेंगे
पिहोवा में 28 नवंबर से तीन दिवसीय गीता जयंती महोत्सव होगा। इस बार सरस्वती तीर्थ जल विहीन रहेगा। तीर्थ में बहते जल के लिए लेवलिंग का काम चल रहा है। इस कारण सरस्वती सरोवर को खाली किया गया है।