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बिना हेलमेट, कानों में लीड और ट्रिपल सवारी मतलब हादसे को न्यौता
Updated Sun, 25 Feb 2018 11:53 PM IST
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कानों में लीड और बिना हेलमेट के ट्रिपल राइडिंग करते हैं स्टूडेंट
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। बिना हेलमेट, कानों में मोबाइल की लीड व ट्रिपल सवारी तीनों ही स्थितियां हमारे सामने गंभीर स्थिति खड़ी कर देती हैं, लेकिन नियमों की परवाह किए बिना यह सब एक साथ हो तो सीधे तौर पर हादसे को न्योता देना होता है। अगर ऐसा बच्चे करते हैं तो हादसे का खतरा और बढ़ जाता है। यह सब हो रहा है। ऐसा करने वाले बच्चों को न तो नियम कानून का डर है और न ही अपनी जान की परवाह है। बच्चेे ऐसा संपर्क सड़कों के साथ मुख्य एवं व्यस्त सड़कों पर धड़ल्ले से करते हैं, जो खुद के साथ दूसरे वाहन चालकों व पैदल चलने वाले लोगों के लिए भी खतरा माने जाते हैं।
ऐसे वाहन चालकों पर पुलिस द्वारा कड़ा शिकंजा कसने के साथ स्कूल व कॉलेज स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। ऐसे वाहन जब बेहद व्यस्त बाजारों की सड़कों पर दौड़ते हैं तो सीधे यमराज का संदेश माने जाते हैं, लेकिन पुलिस की हीलाहवाली व माता-पिता की अनदेखी से ऐसे वाहनों से हादसे लगातार बढ़ रहे हैं।
नियमों के विपरित वाहन लाने वाले विद्यार्थी हों संस्थान से बाहर
शहरवासी प्रदीप कुमार, राजबीर, शमशेर सिंह व कर्म सिंह का कहना है कि नियमों के विपरीत वाहन लाने वाले विद्यार्थियों को संस्थान से बाहर कर देना चाहिए। यह जिम्मेदारी संस्थान संचालकों की तय की जानी चाहिए, ताकि ऐसे वाहनों पर रोक लग सके और हादसों में कमी आए।
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जितना उल्लंघन, उतनी कार्रवाई : एसएचओ
ट्रैफिक एसएचओ देवेंद्र कुमार का कहना है कि जो वाहन चालक नियमों का जितना उल्लंघन करता है, उसके खिलाफ उतनी ही कार्रवाई की जाती है। एक साथ कई लापरवाही पाए जाने पर वाहन इंपाउंड भी किया जाता है। ऐसे वाहन चालक दूसरे वाहन चालकों के लिए भी खतरा पैदा करते हैं। इन पर पुलिस की विशेष निगाहें टिकी होती हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। बिना हेलमेट, कानों में मोबाइल की लीड व ट्रिपल सवारी तीनों ही स्थितियां हमारे सामने गंभीर स्थिति खड़ी कर देती हैं, लेकिन नियमों की परवाह किए बिना यह सब एक साथ हो तो सीधे तौर पर हादसे को न्योता देना होता है। अगर ऐसा बच्चे करते हैं तो हादसे का खतरा और बढ़ जाता है। यह सब हो रहा है। ऐसा करने वाले बच्चों को न तो नियम कानून का डर है और न ही अपनी जान की परवाह है। बच्चेे ऐसा संपर्क सड़कों के साथ मुख्य एवं व्यस्त सड़कों पर धड़ल्ले से करते हैं, जो खुद के साथ दूसरे वाहन चालकों व पैदल चलने वाले लोगों के लिए भी खतरा माने जाते हैं।
ऐसे वाहन चालकों पर पुलिस द्वारा कड़ा शिकंजा कसने के साथ स्कूल व कॉलेज स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। ऐसे वाहन जब बेहद व्यस्त बाजारों की सड़कों पर दौड़ते हैं तो सीधे यमराज का संदेश माने जाते हैं, लेकिन पुलिस की हीलाहवाली व माता-पिता की अनदेखी से ऐसे वाहनों से हादसे लगातार बढ़ रहे हैं।
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नियमों के विपरित वाहन लाने वाले विद्यार्थी हों संस्थान से बाहर
शहरवासी प्रदीप कुमार, राजबीर, शमशेर सिंह व कर्म सिंह का कहना है कि नियमों के विपरीत वाहन लाने वाले विद्यार्थियों को संस्थान से बाहर कर देना चाहिए। यह जिम्मेदारी संस्थान संचालकों की तय की जानी चाहिए, ताकि ऐसे वाहनों पर रोक लग सके और हादसों में कमी आए।
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जितना उल्लंघन, उतनी कार्रवाई : एसएचओ
ट्रैफिक एसएचओ देवेंद्र कुमार का कहना है कि जो वाहन चालक नियमों का जितना उल्लंघन करता है, उसके खिलाफ उतनी ही कार्रवाई की जाती है। एक साथ कई लापरवाही पाए जाने पर वाहन इंपाउंड भी किया जाता है। ऐसे वाहन चालक दूसरे वाहन चालकों के लिए भी खतरा पैदा करते हैं। इन पर पुलिस की विशेष निगाहें टिकी होती हैं।