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पिपली अनाज मंडी में 90 लाख रूपये खर्च करने के बावजूद भी पानी की निकासी का नहीं हो सका पुख्ता इंतजाम
Updated Thu, 23 Aug 2018 12:40 AM IST
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- पिपली अनाज मंडी में 90 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद भी पानी की निकासी का नहीं हो सका पुख्ता इंतजाम
- कई बार कर चुके हैं विभाग व प्रशासनिक अधिकारियों सहित जन प्रतिनिधियों को शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। पिपली की नई अनाज मंडी में 90 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद भी पानी की निकासी का पुख्ता इंतजाम नहीं हो सका है। हलकी बारिश में ही यहां जलभराव की स्थिति बन जाती है। इसकी वजह से आढ़तियों और किसानों को ढेर सारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आढ़ती इस समस्या को लेकर कई बार विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों को लिखित में शिकायतें सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक मंडी की इस समस्या का निवारण करने की जहमत किसी ने नहीं उठाई।
आढ़तियों का कहना है कि अधिकारियों की अनदेखी के चलते नई अनाज मंडी पूरी तरह से अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ चुकी है। बारिश के दौान पानी निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के चलते बरसाती पानी कई-कई दिनों तक जमा रहता है। ऐसे में यहां से वाहनों का गुजरना भी मुश्किल हो गया है। मंडी एसोसिएशन के प्रधान बनारसी दास ने बताया कि हुड्डा सरकार में करीब 90 लाख रुपये की लागत से अनाज मंडी के पानी की निकासी के लिए नाले का निर्माण किया गया था, जो पिछले कई वर्षों से बंद पड़ा है। सीजन के दौरान सारी मंडी जलमग्न हो जाती है। वहीं मंडी में सिर्फ पांच शेड हैं जो फसल की आवक की अपेक्षा बहुत कम हैं। मंडी में अभी तीन शेड और बनाने की आवश्यकता है। उनके मुताबिक पिपली अनाज मंडी में सीजन के दौरान सात लाख क्विंटल फसल पहुंचती है। जो ज्यादातर मंडी में जलभराव के चलते खराब हो जाती है। उन्होंने बताया कि पिछले कई सालों से मंडी की सड़केेें खस्ताहाल है। किसान मंडी के मुख्यद्वार से फसल लेकर आते हैं और तुलाई होने के बाद इसी रास्ते से ट्रक में भरकर गोदामों व शेलरों को जाते हैं। सड़क पर खस्ताहाल स्थिति से कभी भी कोई हादसा हो सकता है। मंडी आढ़ती एसोसिएशन पिछले दो वर्षों से इन समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रही है, लेकिन संबंधित अधिकारी इसकी ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे।
खस्ताहाल हुई मंडी की मुख्य सड़क: तेजा सिंह
आढ़ती तेजा सिंह ने बताया कि पिछले कई वर्षों से मंडी में प्रवेश करने के लिए कोई भी रास्ता सही नहीं है। मंडी के मुख्यद्वारा पर सड़क की बजरियां उखड़ी पड़ी हैं। उखड़ी हुई बजरियों से कई बार दोपहिया वाहन चालक गिरकर हादसे का शिकार हो चुके हैं। आढ़ती मंडी की टूूटी सड़कों को लेकर मार्केट कमेटी के अधिकारियों को लिखित में शिकायत सौंप चुके हैं। लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं हुआ।
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नाले का निर्माण कार्य में हुई धांधली: बनारसी दास
मंडी एसोसिएशन प्रधान बनारसी दास ने बताया कि हुड्डा सरकार में करीब 90 लाख रुपये की लागत से बने नाले के निर्माण कार्य में धांधली हुई है। पिछले कई वर्षों से मंडी में जलभराव की समस्या है। इस समस्या को लेकर विभागीय अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को अवगत करवा चुके हैं, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ।
संबंधित अधिकारी कर रहे अनदेखी : सतबीर नैन
आढ़ती सतबीर नैन ने बताया कि संबंधित अधिकारियों व प्रशासन की अनदेखी के चलते यह अनाज मंडी पिछले कई वर्षों से अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ चुकी है। मंडी में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी है। यहां की समस्या को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों व संबंधित अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं, लेकिन अभी भी समस्या ज्यों की त्यों है।
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- पिपली अनाज मंडी में 90 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद भी पानी की निकासी का नहीं हो सका पुख्ता इंतजाम
- कई बार कर चुके हैं विभाग व प्रशासनिक अधिकारियों सहित जन प्रतिनिधियों को शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। पिपली की नई अनाज मंडी में 90 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद भी पानी की निकासी का पुख्ता इंतजाम नहीं हो सका है। हलकी बारिश में ही यहां जलभराव की स्थिति बन जाती है। इसकी वजह से आढ़तियों और किसानों को ढेर सारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आढ़ती इस समस्या को लेकर कई बार विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों को लिखित में शिकायतें सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक मंडी की इस समस्या का निवारण करने की जहमत किसी ने नहीं उठाई।
आढ़तियों का कहना है कि अधिकारियों की अनदेखी के चलते नई अनाज मंडी पूरी तरह से अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ चुकी है। बारिश के दौान पानी निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के चलते बरसाती पानी कई-कई दिनों तक जमा रहता है। ऐसे में यहां से वाहनों का गुजरना भी मुश्किल हो गया है। मंडी एसोसिएशन के प्रधान बनारसी दास ने बताया कि हुड्डा सरकार में करीब 90 लाख रुपये की लागत से अनाज मंडी के पानी की निकासी के लिए नाले का निर्माण किया गया था, जो पिछले कई वर्षों से बंद पड़ा है। सीजन के दौरान सारी मंडी जलमग्न हो जाती है। वहीं मंडी में सिर्फ पांच शेड हैं जो फसल की आवक की अपेक्षा बहुत कम हैं। मंडी में अभी तीन शेड और बनाने की आवश्यकता है। उनके मुताबिक पिपली अनाज मंडी में सीजन के दौरान सात लाख क्विंटल फसल पहुंचती है। जो ज्यादातर मंडी में जलभराव के चलते खराब हो जाती है। उन्होंने बताया कि पिछले कई सालों से मंडी की सड़केेें खस्ताहाल है। किसान मंडी के मुख्यद्वार से फसल लेकर आते हैं और तुलाई होने के बाद इसी रास्ते से ट्रक में भरकर गोदामों व शेलरों को जाते हैं। सड़क पर खस्ताहाल स्थिति से कभी भी कोई हादसा हो सकता है। मंडी आढ़ती एसोसिएशन पिछले दो वर्षों से इन समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रही है, लेकिन संबंधित अधिकारी इसकी ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे।
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खस्ताहाल हुई मंडी की मुख्य सड़क: तेजा सिंह
आढ़ती तेजा सिंह ने बताया कि पिछले कई वर्षों से मंडी में प्रवेश करने के लिए कोई भी रास्ता सही नहीं है। मंडी के मुख्यद्वारा पर सड़क की बजरियां उखड़ी पड़ी हैं। उखड़ी हुई बजरियों से कई बार दोपहिया वाहन चालक गिरकर हादसे का शिकार हो चुके हैं। आढ़ती मंडी की टूूटी सड़कों को लेकर मार्केट कमेटी के अधिकारियों को लिखित में शिकायत सौंप चुके हैं। लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं हुआ।
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नाले का निर्माण कार्य में हुई धांधली: बनारसी दास
मंडी एसोसिएशन प्रधान बनारसी दास ने बताया कि हुड्डा सरकार में करीब 90 लाख रुपये की लागत से बने नाले के निर्माण कार्य में धांधली हुई है। पिछले कई वर्षों से मंडी में जलभराव की समस्या है। इस समस्या को लेकर विभागीय अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को अवगत करवा चुके हैं, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ।
संबंधित अधिकारी कर रहे अनदेखी : सतबीर नैन
आढ़ती सतबीर नैन ने बताया कि संबंधित अधिकारियों व प्रशासन की अनदेखी के चलते यह अनाज मंडी पिछले कई वर्षों से अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ चुकी है। मंडी में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी है। यहां की समस्या को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों व संबंधित अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं, लेकिन अभी भी समस्या ज्यों की त्यों है।