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प्रशासन के लिए गले की फांस बना पशु मुक्त सड़क अभियान 19-10-09

Fri, 18 Aug 2017 12:25 AM IST
Updated Fri, 18 Aug 2017 12:25 AM IST
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प्रशासन के लिए गले की फांस बना पशु मुक्त सड़क अभियान 19-10-09
फोटो नंबर17-18
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समझ नहीं आ रहा कहां से आ रहे इतने पशु
जितने पशु किए जा रहे काबू, सुबह उससे भी अधिक सड़कों पर : कर्मचंद
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
शहर की सड़कों को गोवंश मुक्त किए जाने की मुख्यमंत्री की गई घोषणा आखिरकार जुमला बनकर ही रह गई तो वहीं इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से शुरू किया गया अभियान भी अब गले की फांस बन गया है। प्रशासन न मुख्यमंत्री की घोषणा पर खरा उतर सका है और न ही अपने द्वारा किए जा रहे दावों को ही पूरा कर पाया है। नगर परिषद के सीनेटरी इंस्पेक्टर का कहना है कि समझ में नहीं आ रहा कि इतने पशु कहां से आ रहे हैं।
आज भी धर्मनगरी की सड़कों पर पहले की तरह बेसहारा पशुओं की भरमार है। इनसे हर रोज सड़क हादसे हो रहे हैं तो कई पशु भी वाहनों की चपेट में आ चुके हैं। अब प्रशासन न इस अभियान को बंद कर पा रहा है और न ही इसमें सफलता ही मिल रही है जबकि शहर भर में इस मामले को लेकर लोगों के बीच में प्रशासन की किरकिरी होने लगी है। अब प्रदेश सरकार ने भले ही सड़कों को पशु मुक्त किए जाने को लेकर अल्टीमेटम को 31 अगस्त तक बढ़ा दिया हो, लेकिन इस दौरान भी शहर की सड़कों से पशुओं को हटाया जाना असंभव दिखाई देने लगा है। हालात यह है कि दर्जनों लोगों की टीम पशुओं को काबू करने के लिए सड़कों पर उतारी हुई है जबकि हर रोज औसतन 15 पशुओं को ही काबू किया जा रहा है, जबकि इससे अधिक नए पशु सड़कों पर आ जाते हैं।
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सफल नहीं हुए तो बढ़ती रही तारीख
नगर व जिला प्रशासन बेसहारा पशुओं को सड़कों से हटाने में अब तक सफल तो नहीं हो पाया, लेकिन इसे पूरा करने के लिए तारीख अवश्य ही बढ़ती रही। सबसे पहले जिला प्रशासन लगातार हो रहे हादसों के चलते सबसे पहले जून माह तक पशुओं को हटाने के लिए दावा किया था, जो पूरा नहीं हो सका। इसके बाद प्रदेश सरकार द्वारा भी दो बार पशुओं से मुक्त सड़कें की जाने की घोषणा की गई, लेकिन यह पूरी नहीं हो पाई और अब फिर 31 अगस्त तक का समय प्रशासनिक अधिकारियों को दिया गया है। माना जा रहा है कि इस समय के दौरान भी सड़कें पशु मुक्त नहीं हुई तो कई अधिकारी नप सकते हैं।
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12 अगस्त से चला अभियान, महज 100 पशु किए जा सके काबू
नगर परिषद ने विशेष तौर पर 15 अगस्त तक के सरकार के अल्टीमेटम के चलते 12 अगस्त को पशु मुक्त सड़कें बनाने का अभियान शुरू किया। इसके तहत अब तक करीब 100 पशुओं को ही काबू किया जा सका। वीरवार को यह अभियान सेक्टर-13 में चलाया गया और देर सायं तक 13 पशुओं को ही पकड़ा जा सका। बता दें कि परिषद की ओर से 12 से 15 अगस्त तक करीब 40 कर्मियों को इस अभियान में लगाया गया तो वीरवार को 20 कर्मी पशु काबू करने में लगे रहे।

सड़कों पर अधिकतर नंदी, भेजे जा रहे मथाना गोशाला
शहर की सड़कों पर अधिकतर बेसहारा पशुओं में नंदी ही शामिल हैं। इससे पहले गायों को बाहरी स्थित गोशाला के अलावा श्री कृष्ण कृपा गोशाला व आसपास की अन्य गोशाला में भी छोड़ा गया। अब नंदी को गांव मथाना स्थित गोशाला में ही छोड़ा जा रहा है।

जितने पशु किए जा रहे काबू, सुबह उससे भी अधिक सड़कों पर: कर्मचंद
नगर परिषद के सनेटरी इंस्पेक्टर कर्मचंद का कहना है कि सड़कों को पशु मुक्त किए जाने के लिए भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। हर रोज दर्जनों पशु काबू कर गोशाला में छोड़े जा रहे हैं, लेकिन इससे भी अधिक पशु सुबह सड़कों पर मिलते हैं। ये पशु आखिरकार कहां से आ रहे वे समझ नहीं पा रहे हैं। आशंका है कि ग्रामीण ही शहर में ये पशु छोड़कर जा रहे हैं, जिसे पुलिस ही रोक सकती है।

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आम जन का सहयोग जरूरी : डीसी
जिला उपायुक्त सुमेधा कटारिया का कहना है कि सड़कों को पशु मुक्त किए जाने जैसे अभियानों में आम जन का सहयोग बेेहद जरूरी होता है। हर व्यक्ति को इसमें सहयोग करना चाहिए और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को कम से कम एक गाय को अवश्य ही रखना चाहिए। इस अभियान को गंभीरता से चलाया जा रहा है और अधिकतर पशुओं को सड़कों से हटाया भी जा चुका है। अगले कुछ ही दिनों तक सड़कें पशु मुक्त हो जाएंगी।
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