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Kurukshetra News: एचएसजीएमसी के अधीन 51 गुरुघर, 100 करोड़ से ज्यादा का सालाना बजट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jan 2025 02:02 AM IST
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51 Gurughar under HSGMC, annual budget of more than Rs 100 crore
कुरुक्षेत्र। आज होने वाले पहले चुनाव में हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी की कमान किसे मिलेगी, यह चुनाव के बाद स्पष्ट होगा लेकिन एसजीपीसी अमृतसर से अलग होने से लेकर आज तक कमेटी चर्चा का विषय बनी रही है। चुनाव के बाद नई कमेटी प्रदेश के गुरुघरों व अन्य सिख संस्थानों का संचालन करेगी।
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प्रदेश में दिल्ली कमेटी की तर्ज पर एसजीपीसी अमृतसर से अलग हरियाणा कमेटी बनाए जाने का मौका 24 साल बाद आया है, जिसको लेकर इन चुनावों पर हर किसी की निगाहें टिकी हैं। गुरुघरों व अन्य संस्थानों से होने वाली 200 करोड़ से ज्यादा की आय एसजीपीसी द्वारा यहां खर्च न करने व यहां के सिखों व कर्मचारियों की अनदेखी के आरोप ही शुरूआत में प्रदेश की अलग कमेटी बनने के मुख्य मुद्दे बने।
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वरिष्ठ सिख नेता दीदार सिंह नलवी की मानें तो अलग कमेटी की नींव 23 दिसंबर 2001 में कुरुक्षेत्र के सेक्टर सात स्थित मकान नंबर 239 पर रखी गई थी जहां एक अहम बैठक हुई थी। इस बैठक में तारा सिंह बचकी, सुखचैन सिंह, बेअंत सिंह, कुलवंत सिंह नगला सहित 19 लोग शामिल थे। नलवी बताते हैं कि छह माह बाद हाबड़ी जिला कैथल के गुरुद्वारा में उनकी मुलाकात जगदीश झींडा से हुई। वहां दोनों ने खुलकर चर्चा की तो एक साथ लड़ाई लड़ना तय किया और इसके बाद लगातार आंदोलन बढ़ता रहा। 14 जुलाई 2014 को तत्कालीन हुड्डा सरकार में अलग कमेटी के लिए अधिसूचना जारी हुई जिसके विरोध में एसजीपीसी ने सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी थी। 20 सितंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने भी हरियाणा की अलग कमेटी पर मुहर लगा दी थी।
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100 करोड़ से ज्यादा का सालाना बजट



हरियाणा कमेटी सामान्य नहीं बल्कि बेहद विस्तार दायरे के साथ है। हालांकि प्रदेश में 84 गुरुघर माने जाते हैं लेकिन वर्तमान कमेटी 51 गुरुघरों को अपने अधीन करार देती रही है। यही नहीं कमेटी के अधीन दो स्कूल, दो कॉलेज व करीब चार हजार एकड़ कृषि भूमि भी है। कमेटी के पास बड़ी संख्या में दुकानें भी है, जिनसे लाखों की आमदनी होती है। मार्च 2023 में तत्कालीन एडहॉक कमेटी के प्रधान महंत कर्मजीत सिंह की अगुवाई में 106 करोड़ का सालाना बजट पास किया गया था। वर्तमान प्रधान भूपिंद्र असंध के नेतृत्व में भी 100 करोड़ 45 लाख 70 हजार 200 रुपये का सालाना बजट पास किया जा चुका है। कमेटी के अधीन वर्तमान में करीब एक हजार कर्मचारी माने जाते हैं, जिनका वेतनमान व भत्ते आदि ही करीब 16 करोड़ रुपये माने जाते हैं। हालांकि पीरी मीरी मेडिकल कॉलेज शाहाबाद आज तक एसजीपीसी के ही अधीन है, जिसको लेकर कानूनी प्रक्रिया आज भी जारी है।




चंडीगढ़ की जायदाद में भी माना जाता है एचएसजीएमसी का 40 प्रतिशत हिस्सा

वर्ष 2023 में तत्कालीन प्रधान बाबा कर्मजीत सिंह ने दावा किया था कि जब वर्ष 1966 में हरियाणा को अलग प्रदेश बनाया गया, तो उस समय एक्ट में यह भी जिक्र किया गया था कि चंडीगढ़ में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री अमृतसर की जितनी भी प्रॉपर्टी है, हरियाणा की अलग कमेटी बनने पर कुल जायदाद का 40 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा में बनने वाली अलग कमेटी को देना पड़ेगा। तत्कालीन कमेटी ने यह हिस्सा दिए जाने की मांग भी जोर-शोर से उठाई थी।





सितंबर 2023 से प्रधान है भूपिंद्र असंध


वर्तमान में एडहॉक कमेटी की कमान सितंबर 2023 से जत्थेदार भूपिंद्र सिंह असंध संभाले हुए हैं और उन्हें लगातार दो बार यह जिम्मेदारी मिल चुकी है। वे 1996 से लगातार शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री अमृतसर के सदस्य रहे हैं। इस बार खुद चुनाव नहीं लड़ रहे। वहीं सरकार द्वारा मनाेनीत कमेटी के पहले प्रधान होने का मौका महंत कर्मजीत सिंह को मिला था, जिन्होंने विवाद के चलते इस्तीफा दे दिया था। वहीं शुरुआत में सबसे पहले हरियाणा कमेटी की प्रधानी जगदीश सिंह झींडा ने संभाली थी।
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