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Kurukshetra News: कलायत के सीनंद में दो सप्ताह में 48 पशु मरे
Mon, 02 Feb 2026 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Mon, 02 Feb 2026 01:58 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। उपमंडल के गांव सीनंद में पिछले करीब दो सप्ताह से फैली एक अज्ञात बीमारी ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। इस रहस्यमयी बीमारी के कारण अब तक करीब 48 भैंसों और कटड़ों की मौत हो चुकी है, जिससे गांव में भय का माहौल बना हुआ है।
पशुपालक शमशेर, सतपाल, सूरजभान, राजेश, पाल और बलराज सहित अन्य किसानों ने बताया कि उनके कई पशु इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं, जिससे उन्हें लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
ग्रामीणों के अनुसार बीमारी के लक्षण बेहद गंभीर हैं। पहले पशु को तेज बुखार होता है, फिर वह चारा खाना बंद कर देता है और सांस लेने की गति असामान्य रूप से तेज हो जाती है। स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि लक्षण दिखाई देने के 10 से 12 घंटे के भीतर ही पशु दम तोड़ देता है।
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ठंड व फेफड़ों में संक्रमण की आशंका : चिकित्सक
मामले की गंभीरता को देखते हुए पशुपालन विभाग की टीम ने गांव का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है। पशु चिकित्सक डॉ. हरीश रोहिल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह बीमारी भीषण शीत लहर के कारण पशुओं के फेफड़ों में हुए गंभीर संक्रमण से जुड़ी प्रतीत हो रही है। विभाग द्वारा बीमार पशुओं के सैंपल लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिए गए हैं। डॉ. रोहिल ने पशुपालकों से घबराने की बजाय सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने सलाह दी कि पशुओं के बाड़ों में फर्श सूखा रखें, ठंड से बचाव के लिए पशुओं को कपड़े या पल्ली से ढंकें और संक्रमण से बचाव हेतु फर्श पर चूने का छिड़काव करें।
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कलायत। उपमंडल के गांव सीनंद में पिछले करीब दो सप्ताह से फैली एक अज्ञात बीमारी ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। इस रहस्यमयी बीमारी के कारण अब तक करीब 48 भैंसों और कटड़ों की मौत हो चुकी है, जिससे गांव में भय का माहौल बना हुआ है।
पशुपालक शमशेर, सतपाल, सूरजभान, राजेश, पाल और बलराज सहित अन्य किसानों ने बताया कि उनके कई पशु इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं, जिससे उन्हें लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
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ग्रामीणों के अनुसार बीमारी के लक्षण बेहद गंभीर हैं। पहले पशु को तेज बुखार होता है, फिर वह चारा खाना बंद कर देता है और सांस लेने की गति असामान्य रूप से तेज हो जाती है। स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि लक्षण दिखाई देने के 10 से 12 घंटे के भीतर ही पशु दम तोड़ देता है।
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ठंड व फेफड़ों में संक्रमण की आशंका : चिकित्सक
मामले की गंभीरता को देखते हुए पशुपालन विभाग की टीम ने गांव का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है। पशु चिकित्सक डॉ. हरीश रोहिल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह बीमारी भीषण शीत लहर के कारण पशुओं के फेफड़ों में हुए गंभीर संक्रमण से जुड़ी प्रतीत हो रही है। विभाग द्वारा बीमार पशुओं के सैंपल लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिए गए हैं। डॉ. रोहिल ने पशुपालकों से घबराने की बजाय सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने सलाह दी कि पशुओं के बाड़ों में फर्श सूखा रखें, ठंड से बचाव के लिए पशुओं को कपड़े या पल्ली से ढंकें और संक्रमण से बचाव हेतु फर्श पर चूने का छिड़काव करें।