{"_id":"68f003045022818310057b42","slug":"451-children-were-given-the-nectar-drops-of-swarnaprashan-at-shri-krishna-ayush-university-kurukshetra-news-c-45-1-knl1024-143951-2025-10-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में 451 बच्चों को पिलाई स्वर्णप्राशन की अमृत बूंदें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में 451 बच्चों को पिलाई स्वर्णप्राशन की अमृत बूंदें
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। स्वर्णप्राशन की बूंदे पीने के लिए पहुंचे बच्चे और उनके अभिभावक। स्वयं
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कौमारभृत्य विभाग की ओर से बुधवार को विश्वविद्यालय के आयुर्वेदिक अस्पताल में स्वर्णप्राशन संस्कार शिविर आयोजित किया गया। इस दौरान 451 से अधिक बच्चों को स्वर्णप्राशन की बूंदें पिलाई गईं। शिविर का उद्देश्य बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता, बुद्धि, स्मरण शक्ति और संपूर्ण विकास को बढ़ाना रहा।
प्रो. अमित कटारिया ने अभिभावकों को बताया कि हर पुष्य नक्षत्र के दिन किया जाने वाला स्वर्णप्राशन संस्कार बच्चों के लिए अत्यंत लाभकारी है। इससे बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है, स्मरण शक्ति व बुद्धि विकास में सहायता मिलती है और बार-बार बीमार पड़ने की संभावना घटती है। यह परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है और बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, बुद्धि और स्मरण शक्ति विकसित करने में अत्यंत कारगर मानी जाती है। कौमारभृत्य विभाग के चेयरमैन प्रो. वैद्य शंभू दयाल शर्मा ने बताया कि स्वर्णप्राशन के नियमित सेवन से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास होता है।
11 नवंबर को लगेगा अगला शिविर : प्रो. राजा सिंगला
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. राजा सिंगला ने बताया कि हर पुष्य नक्षत्र के दिन स्वर्णप्राशन संस्कार का आयोजन किया जाता है। यह संस्कार कौमारभृत्य विभाग के अनुभवी वैद्यों की देखरेख में विधि पूर्वक संपन्न होता है। अगला स्वर्णप्राशन संस्कार शिविर 11 नवंबर को आयोजित किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रो. अमित कटारिया ने अभिभावकों को बताया कि हर पुष्य नक्षत्र के दिन किया जाने वाला स्वर्णप्राशन संस्कार बच्चों के लिए अत्यंत लाभकारी है। इससे बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है, स्मरण शक्ति व बुद्धि विकास में सहायता मिलती है और बार-बार बीमार पड़ने की संभावना घटती है। यह परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है और बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, बुद्धि और स्मरण शक्ति विकसित करने में अत्यंत कारगर मानी जाती है। कौमारभृत्य विभाग के चेयरमैन प्रो. वैद्य शंभू दयाल शर्मा ने बताया कि स्वर्णप्राशन के नियमित सेवन से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास होता है।
विज्ञापन
11 नवंबर को लगेगा अगला शिविर : प्रो. राजा सिंगला
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. राजा सिंगला ने बताया कि हर पुष्य नक्षत्र के दिन स्वर्णप्राशन संस्कार का आयोजन किया जाता है। यह संस्कार कौमारभृत्य विभाग के अनुभवी वैद्यों की देखरेख में विधि पूर्वक संपन्न होता है। अगला स्वर्णप्राशन संस्कार शिविर 11 नवंबर को आयोजित किया जाएगा।
विज्ञापन