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अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव- 2018
Updated Thu, 13 Dec 2018 12:19 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। दिन भर चली बूंदाबांदी भी अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के जश्न में खलल नहीं डाल सकी। ठंड बढ़ने के बावजूद कलाकार अपने राज्य की संस्कृति की छटा खूबसूरती से बिखेरते रहे। वहीं हजारों की संख्या में दर्शकों ने इन प्रस्तुतियों का जमकर लुत्फ उठाया और तालियां बजाकर कलाकारों की हौसला अफजाई की।
वहीं, ब्रह्मसरोवर के तट पर गीता जयंती महोत्सव के तहत सरल मेले में इन दिनों दूसरे राज्यों की शिल्पकला पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। बुलंदशहर की ब्लू आर्ट पॉटरी हो, पटियाला की वाटरप्रूफ जूती हो या हाथों से बने कारपेट हों, लोग देखे बिना रह नहीं पाते। इनकी खरीदारी भी खूब की जा रही है।
सबसे ज्यादा चर्चाएं बटोर रही है- बुलंदशहर की ब्लू आर्ट पॉटरी। यूपी के बुलंदशहर के गांव खुर्जा में की जाने वाली ब्लू आर्ट पॉटरी एशिया में सबसे बेहतरीन मानी जाती है। इस गांव के घर-घर में ब्लू आर्ट पॉटरी के बेहतरीन कारीगर हैं। इस ब्लू आर्ट पॉटरी को पर्यटकों के लिए गांव खुर्जा की शिल्पकार रेखा रावत लेकर आई हैं। जब पर्यटक इस पॉटरी की प्रशंसा करता है तो रेखा का उत्साह और चेहरे की रौनक दोगुनी हो जाती है। बाउल्स, मर्तबान, लालटेन, चाय के कप और अन्य समान लेकर आई हैं।
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दिव्यांग शिल्पकार का कारपेट बना पर्यटकों की पसंद
कला किसी की मोहताज नहीं होती। सिर्फ जुनून और शिद्दत के साथ काम करने की तमन्ना दिल में होनी चाहिए। इसी जनून के साथ दिव्यांग अकलिम अहमद अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव 2018 में पहुंचे हैं। इस शिल्पकार के हाथ से बने हुए एक बेहतरीन कारपेट की कीमत 35 हजार रुपये रखी गई है। उनके पास डेढ़ हजार से 35 हजार तक के कारपेट हैं।
तिल्ले से बनी पटियाला की वाटर प्रूफ जूती...
तिल्ले से बनी पटियाला की वाटर प्रूफ जूती महिलाओं को खास पसंद आ रही है। पटियाला से पहुंचे शिल्पकार विजय का कहना है कि इस जूती का सारा काम हाथ से किया गया है। उनकी इस शिल्पकला को वर्ष 2013-14 में राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया है। इसके अलावा सूरजकुंड और सरस मेलों में भी राज्य सरकार की तरफ से सम्मानित किया जा चुका है। 15 साल से गीता जयंती महोत्सव में पहुंच रहे हैं।
सैर सपाटे के साथ ई-लर्निंग भी...
कुरुक्षेत्र। गीता महोत्सव में अगर पर्यटकों का सरस और क्राफ्ट मेले में भी सैर सपाटा नहीं होता तो वह इस कमी को दूर करने के लिए क्राफ्ट मेले में एनआईसी और शिक्षा विभाग के सहयोग से लगाए गए ई-लर्निंग स्टाल पर पहुंच सकते है। यहां पर बच्चों का सैर सपाटा बिल्कुल नि:शुल्क करवाया जाता है। इस सैर सपाटे में दुनिया की तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां देने के साथ-साथ डिस्कवरी चैनल भी दिखाया जा रहा है। साइंस टेक्नोलॉजी, गणित के बेहद आसान फॉर्मूले सिखाए जा रहे हैं।
इस पवेलियन में हरियाणवी शब्दों के अर्थ बताने पर मिलेंगे 2 लड्डू
हरियाणा सांस्कृतिक दर्शन पंडाल पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र होगा। इस पंडाल में सुबह से शाम तक हरियाणवी संगीत की स्वर लहरियां गूंजेंगी। यहां हरियाणवी सांस्कृतिक शब्दावली के अर्थ बताने वाले पर्यटकों को 2-2 लड्डू भी इनाम में दिए जाएंगे। पंडाल के प्रभारी डॉ. महासिंह पूनिया ने बताया कि पंडाल में रोज 50 से अधिक कलाकार हरियाणवी संस्कृति प्रस्तुत करेंगे। सुबह 11 बजे से 1 बजे तक तथा शाम 6 बजे से 7:30 बजे तक विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे। जिसमें अनेक कलाकार हरियाणवी संस्कृति के अलग-अलग रूपों को प्रस्तुत करेंगे। 13 को प्रात: 11 बजे हरियाणवी लोक गायकी, शाम 6 बजे आच्छी पगड़ी, चौक्खी मूच्छ, 14 को प्रात: 11 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, साय 6 बजे हरियाणवी पॉप, 15 को प्रात: 11 बजे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का सांस्कृतिक कार्यक्रम, शाम 6 बजे हरियाणवी लोक नृत्य, 16 को प्रात: 11 बजे अंतरराष्ट्रीय मंडली एवं मैक द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम, शाम 6 बजे हरियाणवी हास्य कवि सम्मेलन, 17 को प्रात: 11 बजे कला एवं संस्कृति विभाग हरियाणा द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम, शाम 6 बजे हरियाणवी फैशन शो तथा 18 दिसंबर को प्रात: 11 बजे हरियाणवी मंडप तथा उत्तर क्षेत्र कला संस्कृति केंद्र द्वारा लोकनृत्य व शाम 6 बजे हरियाणवी गायन शैलियों पर आधारित रागिनियां आयोजित होंगी।
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कुरुक्षेत्र। दिन भर चली बूंदाबांदी भी अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के जश्न में खलल नहीं डाल सकी। ठंड बढ़ने के बावजूद कलाकार अपने राज्य की संस्कृति की छटा खूबसूरती से बिखेरते रहे। वहीं हजारों की संख्या में दर्शकों ने इन प्रस्तुतियों का जमकर लुत्फ उठाया और तालियां बजाकर कलाकारों की हौसला अफजाई की।
वहीं, ब्रह्मसरोवर के तट पर गीता जयंती महोत्सव के तहत सरल मेले में इन दिनों दूसरे राज्यों की शिल्पकला पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। बुलंदशहर की ब्लू आर्ट पॉटरी हो, पटियाला की वाटरप्रूफ जूती हो या हाथों से बने कारपेट हों, लोग देखे बिना रह नहीं पाते। इनकी खरीदारी भी खूब की जा रही है।
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सबसे ज्यादा चर्चाएं बटोर रही है- बुलंदशहर की ब्लू आर्ट पॉटरी। यूपी के बुलंदशहर के गांव खुर्जा में की जाने वाली ब्लू आर्ट पॉटरी एशिया में सबसे बेहतरीन मानी जाती है। इस गांव के घर-घर में ब्लू आर्ट पॉटरी के बेहतरीन कारीगर हैं। इस ब्लू आर्ट पॉटरी को पर्यटकों के लिए गांव खुर्जा की शिल्पकार रेखा रावत लेकर आई हैं। जब पर्यटक इस पॉटरी की प्रशंसा करता है तो रेखा का उत्साह और चेहरे की रौनक दोगुनी हो जाती है। बाउल्स, मर्तबान, लालटेन, चाय के कप और अन्य समान लेकर आई हैं।
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दिव्यांग शिल्पकार का कारपेट बना पर्यटकों की पसंद
कला किसी की मोहताज नहीं होती। सिर्फ जुनून और शिद्दत के साथ काम करने की तमन्ना दिल में होनी चाहिए। इसी जनून के साथ दिव्यांग अकलिम अहमद अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव 2018 में पहुंचे हैं। इस शिल्पकार के हाथ से बने हुए एक बेहतरीन कारपेट की कीमत 35 हजार रुपये रखी गई है। उनके पास डेढ़ हजार से 35 हजार तक के कारपेट हैं।
तिल्ले से बनी पटियाला की वाटर प्रूफ जूती...
तिल्ले से बनी पटियाला की वाटर प्रूफ जूती महिलाओं को खास पसंद आ रही है। पटियाला से पहुंचे शिल्पकार विजय का कहना है कि इस जूती का सारा काम हाथ से किया गया है। उनकी इस शिल्पकला को वर्ष 2013-14 में राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया है। इसके अलावा सूरजकुंड और सरस मेलों में भी राज्य सरकार की तरफ से सम्मानित किया जा चुका है। 15 साल से गीता जयंती महोत्सव में पहुंच रहे हैं।
सैर सपाटे के साथ ई-लर्निंग भी...
कुरुक्षेत्र। गीता महोत्सव में अगर पर्यटकों का सरस और क्राफ्ट मेले में भी सैर सपाटा नहीं होता तो वह इस कमी को दूर करने के लिए क्राफ्ट मेले में एनआईसी और शिक्षा विभाग के सहयोग से लगाए गए ई-लर्निंग स्टाल पर पहुंच सकते है। यहां पर बच्चों का सैर सपाटा बिल्कुल नि:शुल्क करवाया जाता है। इस सैर सपाटे में दुनिया की तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां देने के साथ-साथ डिस्कवरी चैनल भी दिखाया जा रहा है। साइंस टेक्नोलॉजी, गणित के बेहद आसान फॉर्मूले सिखाए जा रहे हैं।
इस पवेलियन में हरियाणवी शब्दों के अर्थ बताने पर मिलेंगे 2 लड्डू
हरियाणा सांस्कृतिक दर्शन पंडाल पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र होगा। इस पंडाल में सुबह से शाम तक हरियाणवी संगीत की स्वर लहरियां गूंजेंगी। यहां हरियाणवी सांस्कृतिक शब्दावली के अर्थ बताने वाले पर्यटकों को 2-2 लड्डू भी इनाम में दिए जाएंगे। पंडाल के प्रभारी डॉ. महासिंह पूनिया ने बताया कि पंडाल में रोज 50 से अधिक कलाकार हरियाणवी संस्कृति प्रस्तुत करेंगे। सुबह 11 बजे से 1 बजे तक तथा शाम 6 बजे से 7:30 बजे तक विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे। जिसमें अनेक कलाकार हरियाणवी संस्कृति के अलग-अलग रूपों को प्रस्तुत करेंगे। 13 को प्रात: 11 बजे हरियाणवी लोक गायकी, शाम 6 बजे आच्छी पगड़ी, चौक्खी मूच्छ, 14 को प्रात: 11 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, साय 6 बजे हरियाणवी पॉप, 15 को प्रात: 11 बजे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का सांस्कृतिक कार्यक्रम, शाम 6 बजे हरियाणवी लोक नृत्य, 16 को प्रात: 11 बजे अंतरराष्ट्रीय मंडली एवं मैक द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम, शाम 6 बजे हरियाणवी हास्य कवि सम्मेलन, 17 को प्रात: 11 बजे कला एवं संस्कृति विभाग हरियाणा द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम, शाम 6 बजे हरियाणवी फैशन शो तथा 18 दिसंबर को प्रात: 11 बजे हरियाणवी मंडप तथा उत्तर क्षेत्र कला संस्कृति केंद्र द्वारा लोकनृत्य व शाम 6 बजे हरियाणवी गायन शैलियों पर आधारित रागिनियां आयोजित होंगी।