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प्रदेश के 9 आयुर्वेदिक कॉलेज हुए श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र के अधीन
Updated Sat, 07 Jul 2018 12:40 AM IST
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कुरुक्षेत्र। चंडीगढ़ के श्री धनवंतरी आयुर्वेदिक कॉलेज सहित प्रदेश भर में स्थित 9 आयुर्वेदिक कॉलेज अब गांव फतुहपुर में प्रस्तावित श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के अधीन होंगे जबकि इनके समेत 13 कॉलेज में नए सत्र से बीएएमएस, बीएचएमएस व बीयूएमएस कोर्स के लिए होने वाले दाखिलों को लेकर इसी विश्वविद्यालय द्वारा काउंसिलिंग का आयोजन कराया जाएगा। प्रदेश सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा भी अपने स्तर पर प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अमर उजाला ने दो जुलाई के अंक में प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक कॉलेज आयुष विश्वविद्यालय फतुहपुर के अधीन करने की तैयारी शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। वीरवार को जारी उक्त दोनों अधिसूचनाओं के बाद अब आयुष विश्वविद्यालय जल्द ही अपने सही रूप में दिखाई देने की भी संभावना बढ़ गई है। अभी गांव फतुुहपुर में करीब 94 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित इस विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य भी शुरू नहीं हो पाया है और अभी विश्वविद्यालय प्राथमिक तौर पर श्री कृष्णा राजकीय आयर्वेदिक कॉलेज से ही संचालित किया जा रहा है । फिलहाल विश्वविद्यालय के कुलपति के तौर पर डॉ बलदेव धीमान व रजिस्ट्रार कृष्ण कुमार जाटियान को नियुक्त किया गया है। नियुक्त होने के बाद पिछले करीब साढ़े तीन माह से कुलपति व रजिस्ट्रार प्रदेश सरकार व विभाग के उच्चाधिकारियों को प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक कॉलेज आयुष विश्वविद्यालय के अधीन किए जाने को लेकर जहां लगातार पत्राचार कर रहे थे वहीं इसी सप्ताह इन कॉलेजों को इस विश्वविद्यालय के अधीन किए जाने की उम्मीद तैयारी भी शुरू कर दी गई थी।
विश्वविद्यालय स्तर पर भी प्रक्रिया शुरू की : कुलपति
श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलदेव धीमान का कहना है कि प्रदेश सरकार ने उक्त कॉलेज विश्वविद्यालय के अधीन किए जाने व नए सत्र के दाखिलों के लिए काउंसिलिंग करवाने को लेकर अधिसूचना जारी करी दी है, जिसके बाद अब विश्वविद्यालय ने भी अपनी प्रक्रिया शुरू की है। हालांकि अधिसूचना पत्र सभी कॉलेज व विश्वविद्यालयों को भी जारी किया गया है लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से अपने स्तर पर भी सभी जगह संपर्क करने से लेकर दूसरी आवश्यक तैयारी भी शुरू कर दी है।
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आउटसोर्सिंग से 40 कर्मचारी नियुक्त करने को भी मिली हरी झंडी
आयुष विश्वविद्यालय में जल्द ही 40 आउटसोर्सिंग नीति के तहत 40 कर्मियों की भर्ती की जाएगी, इसके लिए प्रदेश सरकार ने हरी झंडी दे दी है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ बलदेव धीमान ने बताया कि कर्मचारियों की नियुक्ति में सरकार द्वारा तय किए गए सभी नियमों की पारदर्शिता से पालना की जाएगी।
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अमर उजाला ने दो जुलाई के अंक में प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक कॉलेज आयुष विश्वविद्यालय फतुहपुर के अधीन करने की तैयारी शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। वीरवार को जारी उक्त दोनों अधिसूचनाओं के बाद अब आयुष विश्वविद्यालय जल्द ही अपने सही रूप में दिखाई देने की भी संभावना बढ़ गई है। अभी गांव फतुुहपुर में करीब 94 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित इस विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य भी शुरू नहीं हो पाया है और अभी विश्वविद्यालय प्राथमिक तौर पर श्री कृष्णा राजकीय आयर्वेदिक कॉलेज से ही संचालित किया जा रहा है । फिलहाल विश्वविद्यालय के कुलपति के तौर पर डॉ बलदेव धीमान व रजिस्ट्रार कृष्ण कुमार जाटियान को नियुक्त किया गया है। नियुक्त होने के बाद पिछले करीब साढ़े तीन माह से कुलपति व रजिस्ट्रार प्रदेश सरकार व विभाग के उच्चाधिकारियों को प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक कॉलेज आयुष विश्वविद्यालय के अधीन किए जाने को लेकर जहां लगातार पत्राचार कर रहे थे वहीं इसी सप्ताह इन कॉलेजों को इस विश्वविद्यालय के अधीन किए जाने की उम्मीद तैयारी भी शुरू कर दी गई थी।
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विश्वविद्यालय स्तर पर भी प्रक्रिया शुरू की : कुलपति
श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलदेव धीमान का कहना है कि प्रदेश सरकार ने उक्त कॉलेज विश्वविद्यालय के अधीन किए जाने व नए सत्र के दाखिलों के लिए काउंसिलिंग करवाने को लेकर अधिसूचना जारी करी दी है, जिसके बाद अब विश्वविद्यालय ने भी अपनी प्रक्रिया शुरू की है। हालांकि अधिसूचना पत्र सभी कॉलेज व विश्वविद्यालयों को भी जारी किया गया है लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से अपने स्तर पर भी सभी जगह संपर्क करने से लेकर दूसरी आवश्यक तैयारी भी शुरू कर दी है।
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आउटसोर्सिंग से 40 कर्मचारी नियुक्त करने को भी मिली हरी झंडी
आयुष विश्वविद्यालय में जल्द ही 40 आउटसोर्सिंग नीति के तहत 40 कर्मियों की भर्ती की जाएगी, इसके लिए प्रदेश सरकार ने हरी झंडी दे दी है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ बलदेव धीमान ने बताया कि कर्मचारियों की नियुक्ति में सरकार द्वारा तय किए गए सभी नियमों की पारदर्शिता से पालना की जाएगी।