226 गायब तीर्थों को ढूंढने की कवायद
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जिस धरती पर यक्ष ने पांडवों की परीक्षा ली। जिस धरती के ज्यादातर हिस्से में महाभारत काल और इससे पहले तीर्थ स्थान रहे, उसी 48 कोस कुरुक्षेत्र की धरती से सैकड़ों तीर्थ गायब हो गए हैं। ऐसा हम नहीं कह रहे। आर्केलॉजी विभाग और केडीबी के रिकॉर्ड यह दावा कर रहे हैं। कभी 360 तीर्थ इस 48 कोस में हुआ करते थे, लेकिन विभागों के दस्तावेजों में महज 134 तीर्थ ही हैं। यानी 226 तीर्थ गायब हैं। अब इन गायब तीर्थों को दस्तावेजों में जोड़ने की कवायद की जा रही है। लेकिन इनमें से 100 से ज्यादा तीर्थों का अस्तित्व प्रशासन की लापरवाही और अन्य कारणों से समाप्त हो गया है। दस्तावेजों से गायब तीर्थों को रिकॉर्ड में लाने के लिए श्रीकृष्ण म्यूजियम के क्यूरेटर राजेंद्र राणा नए सिरे से सर्वे कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
धर्मनगरी कुरुक्षेत्र की सीमा 48 कोस में मानी जाती है। इसी 48 कोस में 360 तीर्थ पुरातन काल से माने जाते रहे हैं। लेकिन सरकारी दस्तावेजों में यह तीर्थ है ही नहीं। इसे लापरवाही कहें या कुछ और लेकिन प्रदेश के कई जिलों में यह तीर्थ अभी भी मौजूद होने के बाद दस्तावेज में शामिल नहीं हो पाए हैं। इसका नुकसान धर्मनगरी के टूरिज्म को भी उठाना पड़ रहा है।
99-2000 में हुआ था सर्वे क्यूरेटर राजेंद्र राणा का कहना है कि तीर्थों की सूची तैयार करने के लिए 1999-2000 में सर्वे कराया गया था। इस सर्वे में 134 तीर्थ शामिल किए गए थे। कुरुक्षेत्र के आसपास के जिलों में भी यह तीर्थ मौजूद हैं, लेकिन उस वक्त इन तीर्थों को सूची में शामिल नहीं किया जा सका था। लेकिन धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से भी इन तीर्थों का सूचीबद्ध होना जरूरी है। कम से कम 70 तीर्थों की स्थिति तो सामने ही है, इन्हें तो शामिल किया ही जा सकता है। शेष तीर्थ लुप्त हो गए हैं। इनकी खोज किए जाने की आवश्यकता है। इसलिए नए सिरे से सर्वे होना जरूरी है।
सेक्रेटरी गवर्नर के समक्ष भी उठ चुका मुद्दा क्यूरेटर सुरेंद्र राणा ने बताया कि इसी वर्ष 20 जनवरी को चंडीगढ़ में मीटिंग हुई थी। कुरुक्षेत्र के पर्यटन स्थलों के विकास को लेकर हुई इस बैठक में सेक्रेटरी गवर्नर के समक्ष भी यह मुद्दा उठाया गया था। हमने उनसे मांग की है कि 48 कोस में दोबारा सर्वे कराया जाए ताकि सूची से गायब तीर्थों को दोबारा शामिल किया जा सके। यह सर्वे केडीबी (कुरुक्षेत्र डेवलपमेंट बोर्ड) और आर्केलॉजी डिपार्टमेंट मिलकर कर सकते हैं। इस संबंध में प्रपोजल भी बना लिया गया है। इसको मंजूरी मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
लुप्त हुए तीर्थों की भी निशानदेही बताया जाता है कि वर्तमान में 266 में से महज 70 के करीब तीर्थ ही सलामत हैं। शेष लुप्त हो गए हैं। कई पर अतिक्रमण भी हो चुका है और लोगों ने नासमझी में उन्हें नष्ट भी कर दिया है। ऐसे में जो बच गए हैं उन्हें सूची में शामिल करके संरक्षित किया जाएगा और लुप्त हो चुके तीर्थों की निशानदेही भी करने की कोशिश की जाएगी। ताकि संभव हो तो उन्हें भी संरक्षित कर उनका विकास किया जा सके और धार्मिक पर्यटन के लिहाज से उन्हें तैयार किया जा सके।
सीएम ने दिया था संरक्षण का आश्वासन प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गीता जयंती समारोह के दौरान प्रदेश के लोगों को आश्वासन दिया था कि 48 कोस के सभी तीर्थ स्थानों को संरक्षित किया जाएगा।