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Kurukshetra News: 22 नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट हो रहे तैयार, 10 पहले से संचालित
Sat, 06 Sep 2025 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 06 Sep 2025 01:05 AM IST
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कुरुक्षेत्र। कुवि के पर्यावरण संस्थान के पास निर्माणाधीन रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने पर्यावरण संरक्षण और जल संकट की चुनौती से निपटने के लिए परिसर में 22 नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट तैयार करवाए हैं। इनमें से कुछ पर काम तेजी से चल रहा है और इन्हें जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा। इससे पहले से संचालित 10 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगातार अच्छे परिणाम दे रहे हैं। ये जानकारी एक्सईन पंकज कुमार ने दी।
उन्होंने बताया कि कि तैयार हो रहे ये नए प्लांट वर्षा के पानी को भूमिगत जल स्तर में पुनः प्रवाहित करेंगे, जिससे आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई दोनों में राहत मिलेगी। तेजी से बदलते जलवायु परिस्थितियों में वर्षा जल संरक्षण ही भविष्य को सुरक्षित करने का सबसे प्रभावी उपाय है। इस दिशा में रेन वाटर हार्वेस्टिंग तकनीक एक सशक्त कदम साबित होगी। इससे न केवल छात्रों और कर्मचारियों को लाभ मिलेगा बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी जल स्तर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
परिसर में चलाए जा रहे 10 रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट्स ने पिछले वर्षों में अच्छे नतीजे दिए हैं। इनसे भूमिगत जल स्तर में सुधार हुआ है और हरियाली को बनाए रखने में भी मदद मिली है। अब 22 नए प्लांट्स जुड़ने से विश्वविद्यालय शैक्षणिक संस्थानों में एक मिसाल कायम करेगा।
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विश्वविद्यालय द्वारा किया गया यह प्रयास न सिर्फ संस्थान को जल संकट से उबारने में मदद करेगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों को जल संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश भी देगा।
बॉक्स
22 रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट्स जल्द ही बनकर होंगे तैयार
एक्सईन पंकज कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में बनाए जा रहे 22 रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट्स जल्द ही बनकर तैयार होंगे। परिसर में जलभराव की समस्या सामने आती थी। ऐसे में यह पहल न सिर्फ जलभराव से निजात दिलाएगी बल्कि जल संरक्षण की मुहिम को भी नया बल देगी। 10 प्लांट्स पहले से संचालित है, जिनके अच्छे परिणाम है।
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने पर्यावरण संरक्षण और जल संकट की चुनौती से निपटने के लिए परिसर में 22 नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट तैयार करवाए हैं। इनमें से कुछ पर काम तेजी से चल रहा है और इन्हें जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा। इससे पहले से संचालित 10 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगातार अच्छे परिणाम दे रहे हैं। ये जानकारी एक्सईन पंकज कुमार ने दी।
उन्होंने बताया कि कि तैयार हो रहे ये नए प्लांट वर्षा के पानी को भूमिगत जल स्तर में पुनः प्रवाहित करेंगे, जिससे आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई दोनों में राहत मिलेगी। तेजी से बदलते जलवायु परिस्थितियों में वर्षा जल संरक्षण ही भविष्य को सुरक्षित करने का सबसे प्रभावी उपाय है। इस दिशा में रेन वाटर हार्वेस्टिंग तकनीक एक सशक्त कदम साबित होगी। इससे न केवल छात्रों और कर्मचारियों को लाभ मिलेगा बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी जल स्तर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
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परिसर में चलाए जा रहे 10 रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट्स ने पिछले वर्षों में अच्छे नतीजे दिए हैं। इनसे भूमिगत जल स्तर में सुधार हुआ है और हरियाली को बनाए रखने में भी मदद मिली है। अब 22 नए प्लांट्स जुड़ने से विश्वविद्यालय शैक्षणिक संस्थानों में एक मिसाल कायम करेगा।
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विश्वविद्यालय द्वारा किया गया यह प्रयास न सिर्फ संस्थान को जल संकट से उबारने में मदद करेगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों को जल संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश भी देगा।
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22 रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट्स जल्द ही बनकर होंगे तैयार
एक्सईन पंकज कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में बनाए जा रहे 22 रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट्स जल्द ही बनकर तैयार होंगे। परिसर में जलभराव की समस्या सामने आती थी। ऐसे में यह पहल न सिर्फ जलभराव से निजात दिलाएगी बल्कि जल संरक्षण की मुहिम को भी नया बल देगी। 10 प्लांट्स पहले से संचालित है, जिनके अच्छे परिणाम है।