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नन्हीं परी तो बोल नहीं सकती,मगर पीड़ा कितनी सही, ये बयां कर रहे हैं इनक्यूबेटर पर लपटों के निशां

Fri, 23 Nov 2018 01:05 AM IST
Updated Fri, 23 Nov 2018 01:05 AM IST
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नन्हीं परी तो बोल नहीं सकती,मगर पीड़ा कितनी सही, ये बयां कर रहे हैं इनक्यूबेटर पर लपटों के निशां
अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र। नन्हीं परी तो बोल नहीं सकती, मगर चेहरा झुलसने के बाद उसने की कितनी पीड़ा सही होगी, इसे सरकारी अस्पताल की स्पेशल यूनिट में लगे इनक्यूबेटर के निशां भली प्रकार से बयां कर रहे हैं। लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल की जिस न्यू बॉर्न केयर यूनिट में इनक्यूबेटर लगा है, उसके पारदर्शी पैनल पर चिंगारी और आग के काले निशान पड़ चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि जितने काले निशान इस पैनल दिखाई दे रहे हैं,उससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि घटनाक्रम के दौरान सरकारी अस्पताल की संवेदनशील यूनिट में घोर लापरवाही हुई। ऐसी लापरवाही की संभावना और ज्यादा तब बढ़ जाती है, जब सरकारी अस्पताल में स्टाफ का भारी टोटा है। बता दें कि जिला के इस सरकारी अस्पताल के कई डाक्टर इस्तीफा देकर प्राइवेट अस्पताल बना चुके हैं। वहीं कुछ डाक्टर प्रतिनियुक्ति पर दूसरे जिलों में शिफ्ट हो चुके हैं या लंबी छुट्टी पर हैं। अस्पताल स्टाफ के मुताबिक इन डाक्टरों के जाने के बाद अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। लिहाजा ठीक से देखरेख ना होने के चलते अस्पताल में ऐसे घटनाक्रमों की गुंजाइश बनी हुई है।
बता दें कि जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.मनजीत सिंह का तबादला भी करनाल हो चुका है। ऐसे हालात में वीरवार को सरकारी अस्पताल में बच्ची के साथ हुए हादसे के बाद बवाल हुआ और मां डिंपल, किरमिच वासी बुआ बालारानी और खेड़ी मारकंडा वासी मौसी रजनी ने कहा कि सरकार कहती बेटी बचाओ और सरकार की अस्पताल में लापरवाही के चलते बेटियों का यह हश्र हो रहा है। इन्होंने सवाल उठाया क्या इस तरह से बचेंगी बेटियां।
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परिजनों का आरोप सिलेंडर लीक होने से हुई घटना
कुरुक्षेत्र के मेन बस अड्डा के सामने स्थित खेड़ी मारकंडा कालोनी वासी डिंपल पत्नी संजय कुमार की डिलीवरी लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल के प्रसुति विभाग में हुई थी। महिला की चार दिन की बच्ची को नवजात शिशु इकाई में आक्सीजन लगी हुई थी, लेकिन वीरवार शाम को इंक्यूबेटर में कैसे चिंगारियों के साथ आग लगी, इस पर अस्पताल प्रशासन कोई जवाब नहीं दे पा रहा है।
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कैसे हुई शार्ट सर्किट, इस पर उठे सवाल
स्माल न्यू बोर्न यूनिट का दौरा करने के बाद अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक के आफिस में सीएमओ डॉ. सुखबीर सिंह, एमएस डॉ. मनजीत सिंह, आएमओ डॉ.एसएस अरोड़ा व चिकित्साधिकारी डॉ.शैलेंद्र शैली के साथ बैठक कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने इस बारे में भी जानकारी जुटाई कि आखिरकार इतनी संवेदनशील जगह पर दाखिल नवजात बच्ची कैसे झुलसी। इसके जवाब में एमएस डॉ.मनजीत ने बताया कि यूनिट की सीलिंग में लगी ट्यूब लाइट को इलेक्ट्रिशियन ठीक कर रहा था, इस दौरान इनक्यूबेटर तक शार्ट सर्किट कैसे हो गया ? इसकी जांच की जा रही है। बता दें कि ट्यूब लाइट से इंक्यूबेटर में काफी दूरी थी।

मेडिकल आफिसर जाएगा बच्ची को पीजीआई दाखिल कराने-सीएमओ
सीएमओ सुखबीर सिंह ने इस हादसे पर खेद जताते हुए कहा कि बच्ची की हालत खतरे से बाहर है। उन्होंने परिजनों को भी आश्वस्त किया कि जल्द बच्ची की हालत में सुधार होगा। उन्होंने बताया कि इस हादसे में बच्ची के चेहरे और सिर के पास से जलने के कारण उसे संक्रमण का खतरा है, क्योंकि यूनिट में काफी बच्चे दाखिल हैं, बच्ची को किसी प्रकार का संक्रमण ना हो इसके लिये उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया जा रहा है और उसके साथ एक मेडिकल आफिसर को भी भेजा जाएगा, ताकि उसे रास्ते में या दाखिल कराने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो।
इसलिए उपयोग होते हैं इनक्यूबेटर उपकरण
नवजात शिशुओं को एक सुरक्षित और स्थिर वातावरण देने के लिए इनक्यूबेटर का उपयोग होता है। अमूमन इसका उपयोग उन बच्चों के लिये कारगर होता है, जोकि समय से पहले जन्म लेते हैं या किसी बीमारी या विकलांगता के साथ जन्म लेते हैं।इस उपकरण के माध्यम से ऑक्सीजन को सीधे नाक में पाइप से पहुंचाया जाता हैं और यह उपकरण नाक और मुंह के आसपास एक छोटे ऑक्सीजन वातावरण बनाने में कारगर होता है।


लंबी फेहरिस्त है प्रसूति विभाग में लापरवाही की
इस सरकारी अस्पताल के खाते में लापरवाही की लंबी फेहरिस्त है। अमर उजाला ने पांच साल पहले इसी अस्पताल के प्रसूति विभाग में बाइक की लाइट में डिलीवरी हुई थी, तब इस मामले पर स्वास्थ्य विभाग ने संज्ञान लिया था और नये जनरेटर की मंजूरी दी थी। चार साल पहले इस अस्पताल के प्रसूति विभाग में डिलीवरी के लिये आई महिला को दूसरे यूनिट का खून चढ़ा दिया गया था, तब माई सिटी में यह मामला प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। इसके अलावा अस्पताल के बाथरूम में डिलीवरी, प्रसूति विभाग से नवजात बच्चा लापता होने जैसी घटनाएं भी हो चुकी हैं।
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