{"_id":"5bddee88bdec226983027751","slug":"21541271176-kurukshetra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रोडवेज हड़ताल खत्म होते ही सड़क पर आए 74 चालक, अब आंदोलन की तैयारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रोडवेज हड़ताल खत्म होते ही सड़क पर आए 74 चालक, अब आंदोलन की तैयारी
Updated Sun, 04 Nov 2018 12:22 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। न खुदा मिला न विसाल ए सनम....। यह कहावत हड़ताल के चलते रोडवेज विभाग में पिछले 12 दिनों से बसें चला कर यात्रियों व सरकार को राहत प्रदान करने वाले जिले भर के 74 चालकों पर स्टीक बैठ रही है। इतने दिन इन चालकों पर सरकार के साथ-साथ रोडवेज प्रशासन भी उम्मीद भरी निगाहों से देखता रहा, लेकिन रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल खत्म होने पर उन्हें एकाएक ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। हर रोज की तरह ये चालक सुबह ड्यूटी पर पहुंचे ही थे कि उन्हें बसें देने से इनकार कर दिया, जिससे वे मायूस होकर रह गए। इसके बाद वे एक-दूसरे अधिकारी के पास चक्कर काटते रहे, लेकिन कोई भी उनके साथ सीधे तौर पर पहले की तरह बातचीत करने को भी तैयार नहीं हुआ, जिस पर रोष जताते हुए उन्होंने न केवल ताज पार्क में धरना दिया बल्कि सोमवार से आंदोलन की रणनीति बनाने का भी एलान किया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें आरटीए के माध्यम से रोडवेज विभाग में लगाया गया था और विभाग द्वारा रखी गई शर्ते भी पूरी कर रहे थे। हालांकि उन्हें आभास था कि उन्हें स्थायी नौकरी पर नहीं रखा जा रहा, लेकिन सरकारी विभाग में नौकरी की आस में वे अपनी कई-कई वर्षों से निजी संस्थानों में कर रहे नौकरी भी गवां बैठे है। उनकी भर्ती 22 अक्तूबर से शुरू कर दी गई थी और कई दिन तक जारी रही। उन्होंने आरोप लगाते हुए बताया कि अधिकारियों ने उनके पारिश्रमिक को लेकर भी कोई बातचीत नहीं की। चालक स्वर्ण सिंह, मुलतान सिंह, गुरदेव, विजय कुमार, नरेंद्र, लखविंद्र सिंह, विकास सैनी, देवेंद्र सिंह , मोहित, मलकीत, राजकुमार व सुखदेव सहित अन्य ने बताया कि अब सोमवार को बैठक कर रणनीति बनाई जाएगी। वे जल्द ही सीएम मनोहर लाल से भी मिलेंगे और यूनियन का गठन भी किया जाएगा।
18 साल पुरानी नौकरी छोड़ दी, अब क्या करें : रामपाल
चालक रामपाल मुकिमपुरा का कहना है कि वे पहले करीब चार साल श्री महाबीर जैन स्कूल में बस चालक रहे तो इसके बाद 14 साल से वे लोहार माजरा स्थित जयराम संस्थान में बस चला रहे थे। रोडवेज विभाग में नौकरी की उम्मीद में वे इस नौकरी से भी हाथ धो बैठे है। अब क्या करें वे समझ नहीं पा रहे।
14 साल से चला रहा था स्कूल बस : सतीश
चालक सतीश कुमार ने बता कि वह 14 साल से गुरुनानक स्कूल की बस चला कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था। रोडवेज विभाग में नौकरी की चाह में वह नौकरी छोड़ दी और अब यह भी नहीं रही।
विज्ञापन
रोडवेज कर्मियों ने पहले की बैठक, फिर संभाली ड्यूटी
18 दिनों तक हड़ताल करने के बाद शनिवार को सुबह फिर रोडवेज कर्मचारी ताज पार्क में एकत्रित हुए, जहां एक बैठक की और इसमें हाईकोर्ट की मध्यस्था के चलते हुई पूरी बातचीत रखी गई और प्रदेश तालमेल कमेटी द्वारा लिए निर्णय से प्रधान हरिनारायण शर्मा व सुलतान सिंह ने कर्मचारियों को अवगत कराया। इसके बाद कर्मचारी बस अड्डे पर पहुंचे और पहले बायोमीट्रिक हाजिरी लगाई और इसके उपरांत अपनी ड्यूटी संभाली। दिन भर विभाग में कामकाज सामान्य दिनों की तरह चलता रहा। वहीं बैठक में मूल चंद तिगरी, बलवंत सिंह, माया राम उनियाल, नरेश कुमार, रणजीत करोड़ा सहित अन्य कर्मचारी भी उपस्थित थे। उन्होंने हड़ताल में सहयोग करने वाले अन्य विभागों के कर्मचारियों का भी आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। न खुदा मिला न विसाल ए सनम....। यह कहावत हड़ताल के चलते रोडवेज विभाग में पिछले 12 दिनों से बसें चला कर यात्रियों व सरकार को राहत प्रदान करने वाले जिले भर के 74 चालकों पर स्टीक बैठ रही है। इतने दिन इन चालकों पर सरकार के साथ-साथ रोडवेज प्रशासन भी उम्मीद भरी निगाहों से देखता रहा, लेकिन रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल खत्म होने पर उन्हें एकाएक ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। हर रोज की तरह ये चालक सुबह ड्यूटी पर पहुंचे ही थे कि उन्हें बसें देने से इनकार कर दिया, जिससे वे मायूस होकर रह गए। इसके बाद वे एक-दूसरे अधिकारी के पास चक्कर काटते रहे, लेकिन कोई भी उनके साथ सीधे तौर पर पहले की तरह बातचीत करने को भी तैयार नहीं हुआ, जिस पर रोष जताते हुए उन्होंने न केवल ताज पार्क में धरना दिया बल्कि सोमवार से आंदोलन की रणनीति बनाने का भी एलान किया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें आरटीए के माध्यम से रोडवेज विभाग में लगाया गया था और विभाग द्वारा रखी गई शर्ते भी पूरी कर रहे थे। हालांकि उन्हें आभास था कि उन्हें स्थायी नौकरी पर नहीं रखा जा रहा, लेकिन सरकारी विभाग में नौकरी की आस में वे अपनी कई-कई वर्षों से निजी संस्थानों में कर रहे नौकरी भी गवां बैठे है। उनकी भर्ती 22 अक्तूबर से शुरू कर दी गई थी और कई दिन तक जारी रही। उन्होंने आरोप लगाते हुए बताया कि अधिकारियों ने उनके पारिश्रमिक को लेकर भी कोई बातचीत नहीं की। चालक स्वर्ण सिंह, मुलतान सिंह, गुरदेव, विजय कुमार, नरेंद्र, लखविंद्र सिंह, विकास सैनी, देवेंद्र सिंह , मोहित, मलकीत, राजकुमार व सुखदेव सहित अन्य ने बताया कि अब सोमवार को बैठक कर रणनीति बनाई जाएगी। वे जल्द ही सीएम मनोहर लाल से भी मिलेंगे और यूनियन का गठन भी किया जाएगा।
18 साल पुरानी नौकरी छोड़ दी, अब क्या करें : रामपाल
चालक रामपाल मुकिमपुरा का कहना है कि वे पहले करीब चार साल श्री महाबीर जैन स्कूल में बस चालक रहे तो इसके बाद 14 साल से वे लोहार माजरा स्थित जयराम संस्थान में बस चला रहे थे। रोडवेज विभाग में नौकरी की उम्मीद में वे इस नौकरी से भी हाथ धो बैठे है। अब क्या करें वे समझ नहीं पा रहे।
विज्ञापन
14 साल से चला रहा था स्कूल बस : सतीश
चालक सतीश कुमार ने बता कि वह 14 साल से गुरुनानक स्कूल की बस चला कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था। रोडवेज विभाग में नौकरी की चाह में वह नौकरी छोड़ दी और अब यह भी नहीं रही।
विज्ञापन
रोडवेज कर्मियों ने पहले की बैठक, फिर संभाली ड्यूटी
18 दिनों तक हड़ताल करने के बाद शनिवार को सुबह फिर रोडवेज कर्मचारी ताज पार्क में एकत्रित हुए, जहां एक बैठक की और इसमें हाईकोर्ट की मध्यस्था के चलते हुई पूरी बातचीत रखी गई और प्रदेश तालमेल कमेटी द्वारा लिए निर्णय से प्रधान हरिनारायण शर्मा व सुलतान सिंह ने कर्मचारियों को अवगत कराया। इसके बाद कर्मचारी बस अड्डे पर पहुंचे और पहले बायोमीट्रिक हाजिरी लगाई और इसके उपरांत अपनी ड्यूटी संभाली। दिन भर विभाग में कामकाज सामान्य दिनों की तरह चलता रहा। वहीं बैठक में मूल चंद तिगरी, बलवंत सिंह, माया राम उनियाल, नरेश कुमार, रणजीत करोड़ा सहित अन्य कर्मचारी भी उपस्थित थे। उन्होंने हड़ताल में सहयोग करने वाले अन्य विभागों के कर्मचारियों का भी आभार व्यक्त किया।