{"_id":"5a34194b4f1c1b59678c251e","slug":"21513363787-kurukshetra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शीत लहर के प्रकोप से थमा जन जीवन, दोपहर बाद धूप निकलने से मिली राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शीत लहर के प्रकोप से थमा जन जीवन, दोपहर बाद धूप निकलने से मिली राहत
Updated Sat, 16 Dec 2017 12:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शीत लहर के प्रकोप से थमा जन जीवन, दोपहर बाद धूप निकलने से मिली राहत
कुरुक्षेत्र।
पिछले तीन दिनों से कड़ाके की ठंड का सामना कर रहे लोगों को शुक्रवार को उस समय कुछ राहत मिली जब दोपहर बाद सूर्य देव ने दर्शन दिए। तीन दिन बाद निकली धूप हालांकि तेज नहीं रही, लेकिन हल्की धूप से भी लोग दिन भर चली शीत लहर से निजात पाते हुए दिखाई दिए। जहां कुछ घंटे हल्की राहत धूप के चलते मिली वहीं सांय होते ही ठंड फिर तेज हो गई और रात के समय लोग फिर कांपने लगे। तीन दिनों से शीत लहर के प्रकोप से आम जनजीवन थम सा गया । शीत लहर से तापमान में खासी गिरावट आने से ठंड अपनी चरम सीमा पर पहुंच गई है। शीत लहर से ठंड बढने से गेहूं का उत्पादन करने वाले किसानों में खुशी है किसानों का कहना कि इससे गेहूं के पौधा अधिक फुटाव करेगा और ठंड से गेहूं की अच्छी पैदावार होने के अनुमान है। वहीं दूसरी ओर आलू, सरसों व तोरिए का उत्पादन करने वाले किसानों में मायूसी छाई हुई है। किसानों का कहना है कि अधिक पाले से आलू की फसल बूरी तरह से प्रभावित होती है। जिसका असर आलू की निकासी पर पड़ता है।
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र।
पिछले तीन दिनों से कड़ाके की ठंड का सामना कर रहे लोगों को शुक्रवार को उस समय कुछ राहत मिली जब दोपहर बाद सूर्य देव ने दर्शन दिए। तीन दिन बाद निकली धूप हालांकि तेज नहीं रही, लेकिन हल्की धूप से भी लोग दिन भर चली शीत लहर से निजात पाते हुए दिखाई दिए। जहां कुछ घंटे हल्की राहत धूप के चलते मिली वहीं सांय होते ही ठंड फिर तेज हो गई और रात के समय लोग फिर कांपने लगे। तीन दिनों से शीत लहर के प्रकोप से आम जनजीवन थम सा गया । शीत लहर से तापमान में खासी गिरावट आने से ठंड अपनी चरम सीमा पर पहुंच गई है। शीत लहर से ठंड बढने से गेहूं का उत्पादन करने वाले किसानों में खुशी है किसानों का कहना कि इससे गेहूं के पौधा अधिक फुटाव करेगा और ठंड से गेहूं की अच्छी पैदावार होने के अनुमान है। वहीं दूसरी ओर आलू, सरसों व तोरिए का उत्पादन करने वाले किसानों में मायूसी छाई हुई है। किसानों का कहना है कि अधिक पाले से आलू की फसल बूरी तरह से प्रभावित होती है। जिसका असर आलू की निकासी पर पड़ता है।