फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   दो माह से सरस्वती तीर्थ जल विहिन, पर्वो के अवसर पर भी तीर्थ पर नहीं हुआ दीपदान

दो माह से सरस्वती तीर्थ जल विहिन, पर्वो के अवसर पर भी तीर्थ पर नहीं हुआ दीपदान

Tue, 21 Nov 2017 12:14 AM IST
Updated Tue, 21 Nov 2017 12:14 AM IST
विज्ञापन
दो माह से सरस्वती तीर्थ जल विहिन, पर्वो के अवसर पर भी तीर्थ पर नहीं हुआ दीपदान
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

पिहोवा।
पिछले दो महीने से सरस्वती तीर्थ में जल न होने के कारण श्रद्धालुओं को जबरदस्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दीपावाली सहित अन्य पर्वों पर भी श्रद्धालु सरस्वती तीर्थ पर दीप दान नहीं कर पाए। हाल ही में अमावस पर भी श्रद्धालु स्नान से वंचित रह गए। अपने पूर्वजों की शांति के लिए प्रेत पीपल में जल भी अर्पित नहीं कर सके। गीता महोत्सव पर भी श्रद्धालु सरस्वती तीर्थ में जल से वंचित ही रहेंगे। इन सबके बावजूद सरकार तीर्थ पर बहते जल को लेकर अच्छे दिनों के दावे कर रही है। अब इस योजना पर भी प्रश्न चिह्न लग रहे हैं।
योजना के अनुसार सरस्वती तीर्थ के पापांतक घाट पर एक छोटे घाट का निर्माण किया जाएगा। इसमें अकसर पानी रहेगा, ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। इस घाट के निर्माण के लिए दीवार बनाई जा रही है। अब इस घाट के निर्माण पर सवाल उठ रहे है। श्रद्धालुओं का कहना है कि सरस्वती तीर्थ में बहते जल की योजना के दावे किए जा रहे है। फिर, तीर्थ पर छोटे घाट का निर्माण क्यों किया जा रहा है। जब तीर्थ में बहता जल रहेगा तो छोटे घाट के निर्माण की कोई आवश्यकता ही नहीं है।
विज्ञापन

दो किलोमीटर लंबी नदी में चल रही लेवनलिंग
प्रांची तीर्थ से सरस्वती तीर्थ तक करीब दो किलोमीटर लंबी नदी में बहते जल की योजना के लिए लेवललिंग हो रही है। इसके लिए नदी में मिट्टी डाली जा रही है। समतल करने के बाद इसमें रेत और बजरी डाली जाएगी। अब इस योजना पर भी सवाल उठ रहे है। तकनीकी विशेषज्ञ का मानना है कि नदी में बहने वाले जल से मिट्टी स्थाई नहीं रहेगी और बहकर आगे निकल जाएगी। मिट्टी के साथ रेत और बंजरी भी सरस्वती तीर्थ में इकट्ठा हो जाएगा। इससे सरस्वती तीर्थ दूषित होगा। सिंचाई विभाग के अधिकारी भी दबी आवाज में इसका विरोध कर रहे है। इस नदी के किनारों पर कई लोगों ने शौचालय बनाए हुए हैं। इनकी गंदगी भी नदी में गिर रही है। इस मामले को लेकर भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पीसीसी सदस्य और कांग्रेस नेता हरमनदीप विर्क ने बताया कि सरकार औपचारिक तौर पर योजना के लिए काम कर रही है। तीन साल से ज्यादा बीत जाने के बाद इस योजना पर काम शुरू हुआ है। अब इस पर सवाल उठ रहे हैं। नदी में मिट्टी डालकर लेवललिंग की जा रही है। बहता पानी होने पर मिट्टी, रेत और बजरी बहकर आगे निकल जाएगी। इससे सरस्वती तीर्थ का पानी भी दूषित होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


गीता जयंती महोत्सव पर सरस्वती तीर्थ रहेगा जल विहीन
पिहोवा के सरस्वती तट पर तीन दिवसीय गीता जयंती महोत्सव 28 नवंबर से शुरू होने जा रहा है। कुरुक्षेत्र में गीता जयंती महोत्सव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है। पिहोवा में जिलास्तर पर इसका आयोजन होगा। गीता जयंती पर श्रद्धालुओं को सरस्वती तीर्थ में जल से वंचित रहना पड़ेगा।

एक फीट तक डाला जाएगा पत्थर : भारती
एचएसएससी चेयरमैन भारत भूषण भारती ने बताया कि प्रांची तीर्थ से सरस्वती तीर्थ तक नदी में लेवललिंग कार्य चल रहा है। यह पूरा होने पर इसमें एक फीट तक मोटे पत्थर का गटका डाला जाएगा, ताकि मिट्टी पानी के साथ न बहे। एचएसएससी चेयरमैन भारती ने तीर्थ पर चल रहे कार्य का निरीक्षण भी किया। इस मौके पर सरस्वती हेरीटेज बोर्ड सदस्य इकबाल चंद, युद्धिष्ठर बहल, शशि भूषण आदि मौजूद रहे।

घाट में भी होगा बहता पानी: बहल
निगरानी कमेटी पिहोवा संयोजक युद्धिष्ठर बहल ने बताया कि तीर्थ पर हर काम तकनीकी रूप से किया जा रहा है। छोटे घाट में जल बहता ही रहेगा। इसके लिए सरोवर से तीन पाइप छोटे घाट में डाले गए है। इसके जरिए घाट में पानी जाएगा। इसी तरह से घाट के ऊपर तीन पाइप लगाए जाएंगे। घाट में जब भी पानी ओवर फ्लो होगा, पानी पाइप के जरिए बाहर निकल जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed