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एमएस को शोकॉज नोटिस, डॉ.क्टर सहित पांच कर्मियों पर कार्रवाई की सिफारिश
Updated Thu, 06 Dec 2018 12:35 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। एलएनजेपी सिविल अस्पताल में चार दिन की नवजात के झुलसने के मामले में चिकित्सा अधिकारी से लेकर आउटसोर्सिंग कर्मियों तक ने लापरवाही बरती थी। हादसे के 13 दिन बाद जांच कमेटी ने बुधवार को जो रिपोर्ट सौंपी है, उसमें यह खुलासा किया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह ने एमएस को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं, एक डॉक्टर सहित छह कर्मियों पर कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी है। आउटसोर्सिंग पर लगे बिजली कर्मी व फायरमैन को सस्पेंड कर दिया है।
22 नवंबर को एसएनसीयू में इनक्यूबेटर में रखी चार दिन की नवजात बच्ची संदिग्ध परिस्थितियों में झुलस गई थी। सीएमओ डॉ. सुखबीर सिंह ने इस मामले की जांच करने के लिए एक कमेटी का गठन किया था, जिसमें उप सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र, डॉ. अनुपमा सिंह व आरएमओ डॉ. एसएस अरोड़ा शामिल थे। जांच कमेटी ने घटना स्थल का दो बार निरीक्षण किया। 14वें दिन कमेटी ने रिपोर्ट सीएमओ के अलावा पुलिस के जिला मुख्यालय में भी भेज दी है। रिपोर्ट में नवजात बच्ची के झुलसने के पीछे शॉर्ट-सर्किट से निकली चिंगारी की संभावना जताई गई है। इसके अलावा ट्यूब के टुकड़े के गर्म होने के उपरांत इसके ऑक्सीजन के संपर्क में आने से इसमें आग लगने की भी आशंका जताई जा रही है। कमेटी का तर्क है कि इस हिस्से में आक्सीजन की मात्रा अधिक रही होगी और एक ज्वलशीन गैस होने के चलते बच्ची झुलसी है। इसके साथ ही संपर्क में आने वाली शोल्डर रोल व बेडशीट भी जली हुई मिली है। गनीमत रही कि वहां मौजूद बिजली कर्मी का ध्यान तुरंत ही उस बच्ची की ओर गया और उसने बच्ची को उठा लिया।
बिजली कर्मी ने नहीं बरती सावधानी
जांच कमेटी ने निष्कर्ष निकाला कि घटना के दौरान इलेक्ट्रीशियन राजेंद्र प्रसाद ने बिजली ठीक करते वक्त सावधानी नहीं बरती। स्टाफ के कहने के बावजूद बात को गंभीरता से नहीं लिया। सिविल सर्जन ने इलेक्ट्रीशियन राजेंद्र प्रसाद को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
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एसएनसीयू में लगाया फायर अलार्म सिस्टम भी निष्प्रभावी
एसएनसीयू में लगा फायर अलार्म सिस्टम भी निष्प्रभावी पाया गया। इसे ऑटोमेटिक मोड पर सेंसर से नहीं जोड़ा गया। यह ऑन करने पर बिना आग या धुएं के अपने आप निरंतर बजता रहता है, जबकि उसके बटन को बंद करने बाद आग लगने व धुआं होने पर किसी तरह का अलार्म नहीं बजता। जब कमेटी ने फायरमैन महिपाल से इस बारे में पूछा गया तो वो कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। सिविल सर्जन ने तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
बच्ची को सुरक्षित दूरी पर शिफ्ट कराने में बरती गई लापरवाही
रिपोर्ट के अनुसार, एसएनसीयू में तैनात चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रभदीप ने बिजली ठीक करने के दौरान उक्त बच्ची को सुरक्षित दूरी पर शिफ्ट नहीं कराया। वहीं बिजली कर्मी के कहने के बाद भी स्टाफ नर्स गुरजिंदर ने बच्चों को शिफ्ट नहीं किया। स्टाफ नर्स परमजीत ने ओटी में जाने से पहले स्टाफ गुरजिंदर को सभी बच्चों का चार्ज नहीं दिया। उनका दो घंटे तक नीचे न आना भी लापरवाही है।
आरोपियों को बचाया गया, आज स्वास्थ्य मंत्री से मिलेंगे : संजय
नवजात बच्ची के पिता संजय ने कहा है कि एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सकों की लापरवाही की वजह से उनकी बच्ची झुलसी है। जो रिपोर्ट कमेटी ने सौंपी है, उसमें चिकित्सकों का बचाव किया गया है। इन चिकित्सकों की वजह से उनकी बेटी जिंदगी व मौत की जंग लड़ रही है। वीरवार को वह स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मिलेंगे।
हादसा होने से पहले टूूटी ट्यूब : राजेंद्र प्रसाद
इलेक्ट्रीशियन राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि हादसे से पहले उन्होंने ट्यूब जरूर बदली थी, लेकिन उस दौरान अच्छी तरह से सावधानी बरती गई। उस दौरान किसी प्रकार का शॉर्ट-सर्किट नहीं हुआ था और ट्यूब भी नीचे टूटी थी। वह निर्दोष है।
कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को सौंपी रिपोर्ट: सीएमओ
बच्ची के परिजनों के लगाए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। जांच कमेटी ने चिकित्सक, स्टाफ, इंजीनियर, बायो-मेडिकल इंजीनियर व स्वीपर के ब्यान दर्ज कर निष्कर्ष निकाला है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनजीत सिंह से स्पष्टीकरण मांगा गया है। अन्य कर्मियों पर कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को सिफारिश की गई है। आउटसोर्सिंग के तहत लगे दो कर्मियों को सस्पेंड किया गया है।
- डॉ. सुखबीर सिंह, सिविल सर्जन।
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कुरुक्षेत्र। एलएनजेपी सिविल अस्पताल में चार दिन की नवजात के झुलसने के मामले में चिकित्सा अधिकारी से लेकर आउटसोर्सिंग कर्मियों तक ने लापरवाही बरती थी। हादसे के 13 दिन बाद जांच कमेटी ने बुधवार को जो रिपोर्ट सौंपी है, उसमें यह खुलासा किया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह ने एमएस को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं, एक डॉक्टर सहित छह कर्मियों पर कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी है। आउटसोर्सिंग पर लगे बिजली कर्मी व फायरमैन को सस्पेंड कर दिया है।
22 नवंबर को एसएनसीयू में इनक्यूबेटर में रखी चार दिन की नवजात बच्ची संदिग्ध परिस्थितियों में झुलस गई थी। सीएमओ डॉ. सुखबीर सिंह ने इस मामले की जांच करने के लिए एक कमेटी का गठन किया था, जिसमें उप सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र, डॉ. अनुपमा सिंह व आरएमओ डॉ. एसएस अरोड़ा शामिल थे। जांच कमेटी ने घटना स्थल का दो बार निरीक्षण किया। 14वें दिन कमेटी ने रिपोर्ट सीएमओ के अलावा पुलिस के जिला मुख्यालय में भी भेज दी है। रिपोर्ट में नवजात बच्ची के झुलसने के पीछे शॉर्ट-सर्किट से निकली चिंगारी की संभावना जताई गई है। इसके अलावा ट्यूब के टुकड़े के गर्म होने के उपरांत इसके ऑक्सीजन के संपर्क में आने से इसमें आग लगने की भी आशंका जताई जा रही है। कमेटी का तर्क है कि इस हिस्से में आक्सीजन की मात्रा अधिक रही होगी और एक ज्वलशीन गैस होने के चलते बच्ची झुलसी है। इसके साथ ही संपर्क में आने वाली शोल्डर रोल व बेडशीट भी जली हुई मिली है। गनीमत रही कि वहां मौजूद बिजली कर्मी का ध्यान तुरंत ही उस बच्ची की ओर गया और उसने बच्ची को उठा लिया।
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बिजली कर्मी ने नहीं बरती सावधानी
जांच कमेटी ने निष्कर्ष निकाला कि घटना के दौरान इलेक्ट्रीशियन राजेंद्र प्रसाद ने बिजली ठीक करते वक्त सावधानी नहीं बरती। स्टाफ के कहने के बावजूद बात को गंभीरता से नहीं लिया। सिविल सर्जन ने इलेक्ट्रीशियन राजेंद्र प्रसाद को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
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एसएनसीयू में लगाया फायर अलार्म सिस्टम भी निष्प्रभावी
एसएनसीयू में लगा फायर अलार्म सिस्टम भी निष्प्रभावी पाया गया। इसे ऑटोमेटिक मोड पर सेंसर से नहीं जोड़ा गया। यह ऑन करने पर बिना आग या धुएं के अपने आप निरंतर बजता रहता है, जबकि उसके बटन को बंद करने बाद आग लगने व धुआं होने पर किसी तरह का अलार्म नहीं बजता। जब कमेटी ने फायरमैन महिपाल से इस बारे में पूछा गया तो वो कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। सिविल सर्जन ने तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
बच्ची को सुरक्षित दूरी पर शिफ्ट कराने में बरती गई लापरवाही
रिपोर्ट के अनुसार, एसएनसीयू में तैनात चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रभदीप ने बिजली ठीक करने के दौरान उक्त बच्ची को सुरक्षित दूरी पर शिफ्ट नहीं कराया। वहीं बिजली कर्मी के कहने के बाद भी स्टाफ नर्स गुरजिंदर ने बच्चों को शिफ्ट नहीं किया। स्टाफ नर्स परमजीत ने ओटी में जाने से पहले स्टाफ गुरजिंदर को सभी बच्चों का चार्ज नहीं दिया। उनका दो घंटे तक नीचे न आना भी लापरवाही है।
आरोपियों को बचाया गया, आज स्वास्थ्य मंत्री से मिलेंगे : संजय
नवजात बच्ची के पिता संजय ने कहा है कि एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सकों की लापरवाही की वजह से उनकी बच्ची झुलसी है। जो रिपोर्ट कमेटी ने सौंपी है, उसमें चिकित्सकों का बचाव किया गया है। इन चिकित्सकों की वजह से उनकी बेटी जिंदगी व मौत की जंग लड़ रही है। वीरवार को वह स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मिलेंगे।
हादसा होने से पहले टूूटी ट्यूब : राजेंद्र प्रसाद
इलेक्ट्रीशियन राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि हादसे से पहले उन्होंने ट्यूब जरूर बदली थी, लेकिन उस दौरान अच्छी तरह से सावधानी बरती गई। उस दौरान किसी प्रकार का शॉर्ट-सर्किट नहीं हुआ था और ट्यूब भी नीचे टूटी थी। वह निर्दोष है।
कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को सौंपी रिपोर्ट: सीएमओ
बच्ची के परिजनों के लगाए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। जांच कमेटी ने चिकित्सक, स्टाफ, इंजीनियर, बायो-मेडिकल इंजीनियर व स्वीपर के ब्यान दर्ज कर निष्कर्ष निकाला है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनजीत सिंह से स्पष्टीकरण मांगा गया है। अन्य कर्मियों पर कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को सिफारिश की गई है। आउटसोर्सिंग के तहत लगे दो कर्मियों को सस्पेंड किया गया है।
- डॉ. सुखबीर सिंह, सिविल सर्जन।