{"_id":"5a6787fa4f1c1b88268b63a4","slug":"181516734458-kurukshetra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"न दाल न रोटी हर रोज एक कटोरी चावल पर जागीर सिंह ने सिंगापुर में गुजारे सात साल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न दाल न रोटी हर रोज एक कटोरी चावल पर जागीर सिंह ने सिंगापुर में गुजारे सात साल
Updated Wed, 24 Jan 2018 12:37 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न दाल न रोटी हर रोज एक कटोरी चावल पर जागीर सिंह ने सिंगापुर में गुजारे सात साल
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र/पिहोवा।
न दाल मिली और न ही रोटी, हर रोज मिलने वाले महज एक कटोरी चावल पर सात साल सिंगापुर में गुजारे। इतना ही नहीं खंबों के साथ बांधकर सैनिकों के साथ होने वाले अत्याचारों को भी अपनी आंखों देखा। इन अत्याचारों को देखकर भी आजादी के दीवानों के पैर डगमगाए नहीं। आखिरकार आजाद भारत की खुली हवा में सांस लेने का मौका मिला। ये उद्गार आईएनए के सिपाही स्वतंत्रता सेनानी जगीर सिंह ने व्यक्त किए।
स्वतंत्रता सेनानी जगीर सिंह ने अपने जीवन के हर पहलु को उपायुक्त सुमेधा कटारिया के समक्ष रखा। उपायुक्त नेता जी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर गांव कराह साहब में स्वतंत्रता सेनानी जगीर सिंह को सम्मानित करने के लिए पहुंची थीं। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर स्वतंत्रता सैनानी जगीर सिंह को सम्मानित किया। इस दौरान स्वतंत्रता सेनानी जगीर सिंह ने बताया कि वह 1939 में अंबाला छावनी में आईएनए में भर्ती हुए थे। रोड स्टार, जौहर बारु के बाद सिंगापुर में उनको देश की सेवाएं देने का अवसर मिला। सिंगापुर में नेता जी सुभाष चंद्र बोस के कई बार विचार सुनने का अवसर भी मिला। उन्होंने सिंगापुर के दिनों को याद करते हुए बताया कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस जब सिंगापुर से एक जहाज से रवाना होने वाले थे, तब उन्होंने सभी सैनिकों को एकत्रित किया था। नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने अपने भाषण में कहा था कि सभी अपने देश को लौट जाओ, मैं अब सिंगापुर छोड़कर जा रहा हूं। हमारा सिंगापुर में जितना कार्य और मकसद था, वह पूरा कर लिया गया है। अब सभी आजाद देश भारत में मिलेंगे। इसके बाद कभी नेता जी नहीं मिले और न ही उनकी आवाज सुनने को मिली। उन्होंने कहा कि नेता जी के जाने के बाद हड़ताल होने के कारण स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती रही। इसके पश्चात रास बिहारी बोस को स्वीकार नहीं किया गया। इसके अलावा स्वतंत्रता सेनानी जगीर सिंह ने नेता जी सुभाष चंद्र बोस के अन्य पहलुओं को उपायुक्त के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनका जन्म वर्तमान जिला मोहाली के शहर खरड़ में हुआ थ। अब उनकी आयु लगभग 95 वर्ष की हो चुकी हैं। इसके बाद उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने पड़पोती किरणजीत को भी सम्मानित किया। इस मौके पर बीडीपीओ प्रेम सिंह, स्वतंत्रता सेनानी जगीर सिंहा का बेटा त्रिलौचन सिंह, महेंद्र कौर, सरपंच साधु सिंह, पंच बलजीत सिंह, पंचायत सचिव महावीर, वेद प्रकाश, डॉ. महेंद्र सिंह, सुखदेव सिंह, गुरचरण सिंह आदि ग्रामीण उपस्थित थे।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र/पिहोवा।
न दाल मिली और न ही रोटी, हर रोज मिलने वाले महज एक कटोरी चावल पर सात साल सिंगापुर में गुजारे। इतना ही नहीं खंबों के साथ बांधकर सैनिकों के साथ होने वाले अत्याचारों को भी अपनी आंखों देखा। इन अत्याचारों को देखकर भी आजादी के दीवानों के पैर डगमगाए नहीं। आखिरकार आजाद भारत की खुली हवा में सांस लेने का मौका मिला। ये उद्गार आईएनए के सिपाही स्वतंत्रता सेनानी जगीर सिंह ने व्यक्त किए।
स्वतंत्रता सेनानी जगीर सिंह ने अपने जीवन के हर पहलु को उपायुक्त सुमेधा कटारिया के समक्ष रखा। उपायुक्त नेता जी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर गांव कराह साहब में स्वतंत्रता सेनानी जगीर सिंह को सम्मानित करने के लिए पहुंची थीं। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर स्वतंत्रता सैनानी जगीर सिंह को सम्मानित किया। इस दौरान स्वतंत्रता सेनानी जगीर सिंह ने बताया कि वह 1939 में अंबाला छावनी में आईएनए में भर्ती हुए थे। रोड स्टार, जौहर बारु के बाद सिंगापुर में उनको देश की सेवाएं देने का अवसर मिला। सिंगापुर में नेता जी सुभाष चंद्र बोस के कई बार विचार सुनने का अवसर भी मिला। उन्होंने सिंगापुर के दिनों को याद करते हुए बताया कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस जब सिंगापुर से एक जहाज से रवाना होने वाले थे, तब उन्होंने सभी सैनिकों को एकत्रित किया था। नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने अपने भाषण में कहा था कि सभी अपने देश को लौट जाओ, मैं अब सिंगापुर छोड़कर जा रहा हूं। हमारा सिंगापुर में जितना कार्य और मकसद था, वह पूरा कर लिया गया है। अब सभी आजाद देश भारत में मिलेंगे। इसके बाद कभी नेता जी नहीं मिले और न ही उनकी आवाज सुनने को मिली। उन्होंने कहा कि नेता जी के जाने के बाद हड़ताल होने के कारण स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती रही। इसके पश्चात रास बिहारी बोस को स्वीकार नहीं किया गया। इसके अलावा स्वतंत्रता सेनानी जगीर सिंह ने नेता जी सुभाष चंद्र बोस के अन्य पहलुओं को उपायुक्त के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनका जन्म वर्तमान जिला मोहाली के शहर खरड़ में हुआ थ। अब उनकी आयु लगभग 95 वर्ष की हो चुकी हैं। इसके बाद उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने पड़पोती किरणजीत को भी सम्मानित किया। इस मौके पर बीडीपीओ प्रेम सिंह, स्वतंत्रता सेनानी जगीर सिंहा का बेटा त्रिलौचन सिंह, महेंद्र कौर, सरपंच साधु सिंह, पंच बलजीत सिंह, पंचायत सचिव महावीर, वेद प्रकाश, डॉ. महेंद्र सिंह, सुखदेव सिंह, गुरचरण सिंह आदि ग्रामीण उपस्थित थे।
विज्ञापन