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धर्मनगरी को जलभराव से नहीं मिल रही निजात
Updated Mon, 03 Jul 2017 12:12 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
बारिश के सीजन से पहले समय रहते प्रशासन द्वारा पानी निकासी के पुख्ता प्रबंध न किए जाने से शहर में अभी तक जलभराव बना हुआ है। इसका खामियाजा अब बीमारियों के रूप में भुगतना पड़ सकता है। बुधवार से लेकर लगातार तीन दिनों तक हुई भारी बारिश से हुए जलभराव की समस्या दो दिन बाद भी ज्यों की त्यों बनी हुई है।
शहर के विष्णु कालोनी, मोहन नगर, गांधी नगर, मॉडल टाउन, दीदार नगर, शांति नगर, कल्याण नगर, सरस्वती कॉलोनी सहित दर्जनों अन्य क्षेत्रों में भी रविवार को जलभराव कम नहीं हो पाया, जहां अब बीमारी फैलने की आशंका बनने लगी है। पूरी तरह से दूषित हो चुके इस पानी से बदबू आने लगी है तो प्रशासन भी इससे निजात दिलाने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं कर पा रहा है, जिसके चलते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और लोगों में प्रशासन के प्रति रोष भी गहराता जा रहा है। लोगों का कहना है कि दो दिन बीच में बारिश से राहत रही, इसके बावजूद भी प्रशासन चेत नहीं पाया है जबकि तीन दिन बारिश के चलते दर्जनों कालोनियों में जलभराव से बाढ़ जैसे हालात हो गए थे तो अनेक घरों में भी पानी घुस गया था। शहर के गहराई वाले क्षेत्र ही नहीं बल्कि सबसे पुराने सेक्टर 13 में भी जलभराव के चलते लोगों के घरों में पानी घुसने लगा था और जब लोग भड़कने लगे तो रात को ही नालों की सफाई करवा पानी निकासी दुरुस्त करवाई गई।
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पहले ही करना चाहिए था पानी निकासी का प्रबंध : पार्षद
नगर पार्षद सतीश कुमार और संदीप टेेका का कहना है कि प्रशासन को बारिश का सीजन शुरू होने से पहले ही समय रहते पानी निकासी का प्रबंधन करना चाहिए था। प्रशासन नेे नालों की समुचित सफाई करवाने तक की भी जहमत नहीं उठाई, जिसके चलते ही आज शहर के अनेेकों क्षेत्रों केे जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो वहीं अब बीमारी फैलने का भी खतरा होने लगा है।
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अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे ग्रामीण
शहर ही नहीं बल्कि खेत भी अभी तक जलभराव की चपेट में है। इससे निजात पाने के लिए अब लोग अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे है। गांव इशाकपुर निवासी दर्जनों लोगों ने डीसी को खेतों में भरे पानी से निजात दिलाने की गुहार लगाई तो वहीं खानपुर सहित कई अन्य गांवों के लोग भी जिला राजस्व अधिकारी के पास पहुंचे और सड़क तोड़ खेतों से पानी निकाले जाने की मांग की।
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हजारों एकड़ धान की फसल को नुकसान
किसानों की मानें तो हजारों एकड़ धान की फसल पानी में डूबकर नष्ट हो चुकी है तो वहीं पशु चारे का संकट भी सैकड़ों किसानों के समक्ष खड़ा हो गया है। कृषि विभाग की मानें तो करीब 4 हजार एकड़ व करीब एक दर्जन गांवों के खेतों में पानी जमा हुआ है, जिससे फसल नष्ट हो सकती है।
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मेहरा की ग्राम पंचायत की 40 एकड़ धान डूबी
लाडवा के गांव मेहरा में ग्राम पंचायत की 40 एकड़ धान की फसल डूबी हुई है। सरपंच छत्रपाल ने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि पानी निकासी की जाए। वहीं इसी गांववासी सलिंद्र व सुरेश कुमार का भी कहना है कि जलभराव से उनकी कई एकड़ धान की फसल नष्ट हो गई है।
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ये हो सकती है जमा पानी से बीमारी
लोक नायक जय प्रकाश सिविल अस्पताल के एमएस डॉ. मुकेश का कहना है कि जमा हुए बारिश के पानी से जहां दुर्गंध होने लगती है वही इससे डेंगू, मलेरिया, टायफाइड व चिकनगुनिया जैसी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। इस पानी पर इन बीमारियों को फैलाने वाले मच्छर व अन्य कीट भारी मात्रा में जमा हो जाते है और जहां यह पानी जमा है, वहां के लोगों को बचाव के विशेष प्रबंधन करने चाहिए। उन्होंने बताया कि बीमारी की हल्की शिकायत होते ही चिकित्सक की सलाह व जांच करवानी चाहिए।
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निकासी के लिए किए जा रहे है प्रबंध : ईओ
नगर परिषद के ईओ बीएन भारती का कहना है कि शहर में जमा पानी निकासी के लिए प्रबंध किए जा रहे है। अनेक क्षेत्रों से पानी निकासी की जा चुकी है तो वहीं आगे भी जलभराव की समस्या न हो, इसके लिए फिर से सभी नालों की सफाई करवाई जा रही है।
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हल्की बारिश व काले बादलों ने बढ़ाई चिंता
रविवार को करीब 11 बजे शहर में हल्की बारिश हुई तो दिन भर काले बादल भी छाए रहे, जिससे जलभराव का सामना कर रहे लोगों को चिंता में डाल दिया। वहीं अधिकारियों के माथे पर भी फिर बारिश होने की संभावना के चलते शिकन दिखाई दी कि इस बार फिर जलभराव हुआ तो लोगों के गुस्से का शिकार होना पड़ सकता है।
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कुरुक्षेत्र।
बारिश के सीजन से पहले समय रहते प्रशासन द्वारा पानी निकासी के पुख्ता प्रबंध न किए जाने से शहर में अभी तक जलभराव बना हुआ है। इसका खामियाजा अब बीमारियों के रूप में भुगतना पड़ सकता है। बुधवार से लेकर लगातार तीन दिनों तक हुई भारी बारिश से हुए जलभराव की समस्या दो दिन बाद भी ज्यों की त्यों बनी हुई है।
शहर के विष्णु कालोनी, मोहन नगर, गांधी नगर, मॉडल टाउन, दीदार नगर, शांति नगर, कल्याण नगर, सरस्वती कॉलोनी सहित दर्जनों अन्य क्षेत्रों में भी रविवार को जलभराव कम नहीं हो पाया, जहां अब बीमारी फैलने की आशंका बनने लगी है। पूरी तरह से दूषित हो चुके इस पानी से बदबू आने लगी है तो प्रशासन भी इससे निजात दिलाने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं कर पा रहा है, जिसके चलते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और लोगों में प्रशासन के प्रति रोष भी गहराता जा रहा है। लोगों का कहना है कि दो दिन बीच में बारिश से राहत रही, इसके बावजूद भी प्रशासन चेत नहीं पाया है जबकि तीन दिन बारिश के चलते दर्जनों कालोनियों में जलभराव से बाढ़ जैसे हालात हो गए थे तो अनेक घरों में भी पानी घुस गया था। शहर के गहराई वाले क्षेत्र ही नहीं बल्कि सबसे पुराने सेक्टर 13 में भी जलभराव के चलते लोगों के घरों में पानी घुसने लगा था और जब लोग भड़कने लगे तो रात को ही नालों की सफाई करवा पानी निकासी दुरुस्त करवाई गई।
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पहले ही करना चाहिए था पानी निकासी का प्रबंध : पार्षद
नगर पार्षद सतीश कुमार और संदीप टेेका का कहना है कि प्रशासन को बारिश का सीजन शुरू होने से पहले ही समय रहते पानी निकासी का प्रबंधन करना चाहिए था। प्रशासन नेे नालों की समुचित सफाई करवाने तक की भी जहमत नहीं उठाई, जिसके चलते ही आज शहर के अनेेकों क्षेत्रों केे जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो वहीं अब बीमारी फैलने का भी खतरा होने लगा है।
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अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे ग्रामीण
शहर ही नहीं बल्कि खेत भी अभी तक जलभराव की चपेट में है। इससे निजात पाने के लिए अब लोग अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे है। गांव इशाकपुर निवासी दर्जनों लोगों ने डीसी को खेतों में भरे पानी से निजात दिलाने की गुहार लगाई तो वहीं खानपुर सहित कई अन्य गांवों के लोग भी जिला राजस्व अधिकारी के पास पहुंचे और सड़क तोड़ खेतों से पानी निकाले जाने की मांग की।
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हजारों एकड़ धान की फसल को नुकसान
किसानों की मानें तो हजारों एकड़ धान की फसल पानी में डूबकर नष्ट हो चुकी है तो वहीं पशु चारे का संकट भी सैकड़ों किसानों के समक्ष खड़ा हो गया है। कृषि विभाग की मानें तो करीब 4 हजार एकड़ व करीब एक दर्जन गांवों के खेतों में पानी जमा हुआ है, जिससे फसल नष्ट हो सकती है।
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मेहरा की ग्राम पंचायत की 40 एकड़ धान डूबी
लाडवा के गांव मेहरा में ग्राम पंचायत की 40 एकड़ धान की फसल डूबी हुई है। सरपंच छत्रपाल ने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि पानी निकासी की जाए। वहीं इसी गांववासी सलिंद्र व सुरेश कुमार का भी कहना है कि जलभराव से उनकी कई एकड़ धान की फसल नष्ट हो गई है।
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ये हो सकती है जमा पानी से बीमारी
लोक नायक जय प्रकाश सिविल अस्पताल के एमएस डॉ. मुकेश का कहना है कि जमा हुए बारिश के पानी से जहां दुर्गंध होने लगती है वही इससे डेंगू, मलेरिया, टायफाइड व चिकनगुनिया जैसी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। इस पानी पर इन बीमारियों को फैलाने वाले मच्छर व अन्य कीट भारी मात्रा में जमा हो जाते है और जहां यह पानी जमा है, वहां के लोगों को बचाव के विशेष प्रबंधन करने चाहिए। उन्होंने बताया कि बीमारी की हल्की शिकायत होते ही चिकित्सक की सलाह व जांच करवानी चाहिए।
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निकासी के लिए किए जा रहे है प्रबंध : ईओ
नगर परिषद के ईओ बीएन भारती का कहना है कि शहर में जमा पानी निकासी के लिए प्रबंध किए जा रहे है। अनेक क्षेत्रों से पानी निकासी की जा चुकी है तो वहीं आगे भी जलभराव की समस्या न हो, इसके लिए फिर से सभी नालों की सफाई करवाई जा रही है।
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हल्की बारिश व काले बादलों ने बढ़ाई चिंता
रविवार को करीब 11 बजे शहर में हल्की बारिश हुई तो दिन भर काले बादल भी छाए रहे, जिससे जलभराव का सामना कर रहे लोगों को चिंता में डाल दिया। वहीं अधिकारियों के माथे पर भी फिर बारिश होने की संभावना के चलते शिकन दिखाई दी कि इस बार फिर जलभराव हुआ तो लोगों के गुस्से का शिकार होना पड़ सकता है।