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Kurukshetra News: एक साल में 1770 महिलाएं गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से पीड़ित
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कुरुक्षेत्र। नागरिक अस्पताल। संवाद
कुरुक्षेत्र। महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जो स्वास्थ्य विभाग और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. रमेश सभ्रवाल ने बताया कि जिले में एक साल में ही गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के 1770 मामले सामने आए हैं।
इनमें अधिकतर मरीज 40 से 50 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाएं हैं। उन्होंने बताया कि सर्वाइकल कैंसर को आमतौर पर एचपीवी वायरस से जोड़कर देखा जाता है। इस बीमारी से बचाव के लिए 10 से 35 वर्ष की आयु में एचपीवी वैक्सीन लगाई जाती है। गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर महिलाओं में होने वाले गंभीर कैंसरों में शामिल है।
यह कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से यानी गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में विकसित होता है और मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) संक्रमण के कारण होता है, जो यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है। चिकित्सकों के अनुसार सर्वाइकल कैंसर धीरे-धीरे विकसित होता है और शुरुआती चरणों में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते। इसी कारण अधिकतर महिलाएं समय पर जांच नहीं करवा पातीं।
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यदि नियमित स्क्रीनिंग कराई जाए तो शुरुआती अवस्था में ही इसकी पहचान संभव है और इसे समय रहते इलाज से पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है लेकिन लापरवाही बरतने पर यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है।
इन कारणों से बढ़ता है सर्वाइकल कैंसर का खतरा : विशेषज्ञों के अनुसार एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है लेकिन इसके अलावा कम उम्र में यौन गतिविधि की शुरुआत, एक से अधिक यौन साथी, धूम्रपान, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन, पारिवारिक इतिहास और नियमित जांच का अभाव भी इस कैंसर के खतरे को बढ़ा देते हैं।
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इनमें अधिकतर मरीज 40 से 50 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाएं हैं। उन्होंने बताया कि सर्वाइकल कैंसर को आमतौर पर एचपीवी वायरस से जोड़कर देखा जाता है। इस बीमारी से बचाव के लिए 10 से 35 वर्ष की आयु में एचपीवी वैक्सीन लगाई जाती है। गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर महिलाओं में होने वाले गंभीर कैंसरों में शामिल है।
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यह कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से यानी गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में विकसित होता है और मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) संक्रमण के कारण होता है, जो यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है। चिकित्सकों के अनुसार सर्वाइकल कैंसर धीरे-धीरे विकसित होता है और शुरुआती चरणों में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते। इसी कारण अधिकतर महिलाएं समय पर जांच नहीं करवा पातीं।
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यदि नियमित स्क्रीनिंग कराई जाए तो शुरुआती अवस्था में ही इसकी पहचान संभव है और इसे समय रहते इलाज से पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है लेकिन लापरवाही बरतने पर यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है।
इन कारणों से बढ़ता है सर्वाइकल कैंसर का खतरा : विशेषज्ञों के अनुसार एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है लेकिन इसके अलावा कम उम्र में यौन गतिविधि की शुरुआत, एक से अधिक यौन साथी, धूम्रपान, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन, पारिवारिक इतिहास और नियमित जांच का अभाव भी इस कैंसर के खतरे को बढ़ा देते हैं।