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राजनीतिक लालसा से नहीं,किसानों के हक की लड़ाई लड़ने आया हूं-हुड्डा
Updated Sat, 17 Jun 2017 12:32 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
लघु सचिवालय के सामने शुक्रवार को हुई कांग्रेस की किसान पंचायत में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा राज्य सरकार पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि किसी भी फसल की खरीद अगर समर्थन मूल्य से कम भाव पर हो तो उसे अपराध घोषित किया जाए। जिस दिन फसल बाजार में आए उसी दिन विभिन्न एजेंसियां खरीद शुरू करें और बाजरा, मक्का, सूरजमुखी और सरसों की खरीद पर कोई शर्त न हो।
पूर्व मुख्यमंत्री ने उपरोक्त दो प्रस्तावों के अलावा उनसे पहले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक रघुबीर सिंह कादियान ने 12 प्रस्तावों पर किसान पंचायत में हाथ उठवाकर अनुमोदन कराया। किसान पंचायत में कुल 14 प्रस्ताव पारित करते हुए कांग्रेस के 13 विधायकों सहित अन्य नेताओं ने किसानों के संघर्ष को समर्थन देने का ऐलान किया। लघु सचिवालय के समक्ष आयोजित किसान पंचायत में हुड्डा ने कहा कि उन्होंने किसान परिवार में जन्म लिया है और किसी सूरत में किसानों को बर्बाद नहीं होने देंगे। किसानों की लड़ाई को आखिरी मुकाम तक पहुंचाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
उन्होंने भाजपा सरकार को चेताते हुए कहा कि अगर किसान की पेट की आग सीने तक पहुंच गई तो देश में लोकतंत्र नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि वे किसान पंचायत में किसी लालसा से नहीं, बल्कि किसानों को एकजुट कर उनके हक की लड़ाई लड़ने आए हैं। किसान पंचायत को किसान नेताओं ने भी संबोधित किया और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से आग्रह किया कि संकट की इस घड़ी में वो किसानों का नेतृत्व करें, क्योंकि उनके शासनकाल में जिस तरह किसान हित की नीतियां बनी और फैसले लिए गए थे, उससे किसानों में ये विश्वास बना की केवल वही किसानों की अगुवाई कर सकते हैं। हुड्डा ने कहा कि किसानों का संघर्ष कितना ही लंबा क्यों नहीं चले वे हमेशा उनके साथ खड़ा मिलेंगे। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार को चेतावनी दी की किसान चुप है उसे मरा हुआ ना समझें। सरकार ये अच्छी तरह समझ ले की वो एकजुट हुए किसानों का प्रहार नहीं झेल पाएगी।
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केंद्रीय वित्तमंत्री के बयान की निंदा
हुड्डा ने केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली के उस बयान की निंदा की, जिसमें कहा गया कि किसानों की कर्ज माफी का बोझ स्वयं राज्य उठाए। उन्होंने यूपीए सरकार में किसानों के 72 हजार करोड़ रुपये का कर्ज एकमुश्त माफ़ करने की याद किसानों की दिलाई। उन्होंने कहा कि इस कर्ज माफी योजना का लाभ देश के सभी राज्यों के किसानों को मिला था। एनडीए सरकार का किसान विरोधी चेहरा तभी बेनकाब हो गया था जब सरकार ने उच्चतम न्यायालय में दिए हलफनामे में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने के बारे में हाथ खड़े कर दिए थे। किसान पंचायत में 12 प्रस्ताव विधायक एवं पूर्व स्पीकर रघुबीर सिंह कादियान ने पेश किये। इस मौके पर सभी 14 प्रस्ताव का हजारों किसानों ने अपने दोनों हाथ खड़े करके अपना समर्थन दिया।
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बराला और धनखड़ विदेश यात्राएं कर रहे हैं : कुलदीप शर्मा
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक कुलदीप शर्मा ने प्रदेश के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू कराने की मांग को लेकर इन दोनों नेताओं ने कांग्रेस राज में अर्धनग्न प्रदर्शन किया था, लेकिन अब जब किसानों के पेट पर लात और छाती पर गोलियां चलाई जा रही हैं, बराला और धनखड़ विदेश यात्राएं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब बराला और धनखड़ के वापस आते ही किसान इनके कुर्ते उतरवाएंगे और जब तक नहीं पहनने देंगे जब तक ये स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू नहीं कराते। इस मौके पर पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष फूल चंद मुलाना, पूर्व स्पीकर रघुबीर सिंह कादियान, सांसद दीपेंद्र हुड्डा, जयतीर्थ दहिया इत्यादी ने संबोधित किया।
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किसान पंचायत में यह 12 प्रस्ताव हुए पारित
1. अविलंब स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू हों और किसान को कम से कम 50 फीसदी मुनाफे की गारंटी हो।
2. कांग्रेस सरकार की तर्ज पर गन्ने के समर्थन मूल्य 2013-14 के चीनी-गन्ने के अनुपात में मिले। आज चीनी की कीमत 40 रुपये है, इस हिसाब से इस वर्ष गन्ने का समर्थन मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए।
3. पॉपुलर और सब्जियों पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू हो और पॉपुलर पर हुड्डा सरकार के कार्यकाल में मिल रहे दाम के आधार पर 1200 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की जाए।
4. पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के फैसलों की तर्ज पर हरियाणा के किसानों का कर्जा माफ हो।
5. पूसा 1121 और 1509 एक्सपोर्ट वैरायटी धान के एक्सपोर्ट को तुरंत खुलवाने का काम किया जाए।
6. डीजल और यूरिया के दामों को घटाकर, विश्व बाजार में कच्चे तेल के कम दामों का फायदा सीधे किसान को दिया जाए। साथ ही सरकार यह भी सुनिश्चित करे कि जीएसटी लागू होने के कारण खाद के दाम में बढ़ोतरी न की जाए।
7. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसान अपनी मर्जी से हिस्सा बने और जो किसान इससे बाहर रहना चाहते हैं, उन्हें सरकार की तरफ से मिलने वाली सहायता राशि को बढ़ाकर कम से कम 25 हजार रुपये प्रति एकड़ की जाए।
8. हरियाणा कांग्रेस सरकार के मॉडल पर बनी यूपीए सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति तुरंत प्रभाव से हरियाणा में लागू की जाए।
9. किसान तथा खेतिहर मजदूर के इलाज के लिए धरतीपुत्र स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की जाए।
10. सरपल्स बिजली वापस ली जाए और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा स्थापित प्रदेश के सारे थर्मल प्लांट पूरी क्षमता से चलाए जाएं। 11. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार एसवाईएल का निर्माण कराए ताकि हरियाणा को उसके हिस्से का पूरा पानी मिले।
12. सरकार अपने किए गए वायदे अनुसार किसान और मजदूर की अगली पीढ़ी के लिए या तो बेरोजगारी भत्ता नौ हजार दे, या देश में 2 करोड़ रोजगार दे।
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ये नेता रहे मौजूद
विधायक उदयभान, ललित नागर, शकुंतला खटक, जयतीर्थ दहिया, सांसद शादीलाल बतरा, पूर्व मंत्री कर्ण सिंह दलाल, पूर्व मंत्री हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा, पूर्व मंत्री गीता भुक्कल, पूर्व सीपीएस रणसिंह मान, कैलाशो सैनी, पूर्व विधायक अर्जुन सिंह, निर्मल सिंह, जलेब खान, संपत सिंह, कांग्रेस प्रदेश महासचिव पवन गर्ग, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन जलेश शर्मा, कुलविंद्र खैरा सहित पंचकूला, यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र तथा करनाल जिले के कांग्रेसी नेता, कार्यकर्ता और किसान शामिल हुए।
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कुरुक्षेत्र।
लघु सचिवालय के सामने शुक्रवार को हुई कांग्रेस की किसान पंचायत में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा राज्य सरकार पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि किसी भी फसल की खरीद अगर समर्थन मूल्य से कम भाव पर हो तो उसे अपराध घोषित किया जाए। जिस दिन फसल बाजार में आए उसी दिन विभिन्न एजेंसियां खरीद शुरू करें और बाजरा, मक्का, सूरजमुखी और सरसों की खरीद पर कोई शर्त न हो।
पूर्व मुख्यमंत्री ने उपरोक्त दो प्रस्तावों के अलावा उनसे पहले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक रघुबीर सिंह कादियान ने 12 प्रस्तावों पर किसान पंचायत में हाथ उठवाकर अनुमोदन कराया। किसान पंचायत में कुल 14 प्रस्ताव पारित करते हुए कांग्रेस के 13 विधायकों सहित अन्य नेताओं ने किसानों के संघर्ष को समर्थन देने का ऐलान किया। लघु सचिवालय के समक्ष आयोजित किसान पंचायत में हुड्डा ने कहा कि उन्होंने किसान परिवार में जन्म लिया है और किसी सूरत में किसानों को बर्बाद नहीं होने देंगे। किसानों की लड़ाई को आखिरी मुकाम तक पहुंचाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
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उन्होंने भाजपा सरकार को चेताते हुए कहा कि अगर किसान की पेट की आग सीने तक पहुंच गई तो देश में लोकतंत्र नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि वे किसान पंचायत में किसी लालसा से नहीं, बल्कि किसानों को एकजुट कर उनके हक की लड़ाई लड़ने आए हैं। किसान पंचायत को किसान नेताओं ने भी संबोधित किया और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से आग्रह किया कि संकट की इस घड़ी में वो किसानों का नेतृत्व करें, क्योंकि उनके शासनकाल में जिस तरह किसान हित की नीतियां बनी और फैसले लिए गए थे, उससे किसानों में ये विश्वास बना की केवल वही किसानों की अगुवाई कर सकते हैं। हुड्डा ने कहा कि किसानों का संघर्ष कितना ही लंबा क्यों नहीं चले वे हमेशा उनके साथ खड़ा मिलेंगे। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार को चेतावनी दी की किसान चुप है उसे मरा हुआ ना समझें। सरकार ये अच्छी तरह समझ ले की वो एकजुट हुए किसानों का प्रहार नहीं झेल पाएगी।
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हुड्डा ने केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली के उस बयान की निंदा की, जिसमें कहा गया कि किसानों की कर्ज माफी का बोझ स्वयं राज्य उठाए। उन्होंने यूपीए सरकार में किसानों के 72 हजार करोड़ रुपये का कर्ज एकमुश्त माफ़ करने की याद किसानों की दिलाई। उन्होंने कहा कि इस कर्ज माफी योजना का लाभ देश के सभी राज्यों के किसानों को मिला था। एनडीए सरकार का किसान विरोधी चेहरा तभी बेनकाब हो गया था जब सरकार ने उच्चतम न्यायालय में दिए हलफनामे में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने के बारे में हाथ खड़े कर दिए थे। किसान पंचायत में 12 प्रस्ताव विधायक एवं पूर्व स्पीकर रघुबीर सिंह कादियान ने पेश किये। इस मौके पर सभी 14 प्रस्ताव का हजारों किसानों ने अपने दोनों हाथ खड़े करके अपना समर्थन दिया।
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बराला और धनखड़ विदेश यात्राएं कर रहे हैं : कुलदीप शर्मा
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक कुलदीप शर्मा ने प्रदेश के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू कराने की मांग को लेकर इन दोनों नेताओं ने कांग्रेस राज में अर्धनग्न प्रदर्शन किया था, लेकिन अब जब किसानों के पेट पर लात और छाती पर गोलियां चलाई जा रही हैं, बराला और धनखड़ विदेश यात्राएं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब बराला और धनखड़ के वापस आते ही किसान इनके कुर्ते उतरवाएंगे और जब तक नहीं पहनने देंगे जब तक ये स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू नहीं कराते। इस मौके पर पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष फूल चंद मुलाना, पूर्व स्पीकर रघुबीर सिंह कादियान, सांसद दीपेंद्र हुड्डा, जयतीर्थ दहिया इत्यादी ने संबोधित किया।
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किसान पंचायत में यह 12 प्रस्ताव हुए पारित
1. अविलंब स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू हों और किसान को कम से कम 50 फीसदी मुनाफे की गारंटी हो।
2. कांग्रेस सरकार की तर्ज पर गन्ने के समर्थन मूल्य 2013-14 के चीनी-गन्ने के अनुपात में मिले। आज चीनी की कीमत 40 रुपये है, इस हिसाब से इस वर्ष गन्ने का समर्थन मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए।
3. पॉपुलर और सब्जियों पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू हो और पॉपुलर पर हुड्डा सरकार के कार्यकाल में मिल रहे दाम के आधार पर 1200 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की जाए।
4. पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के फैसलों की तर्ज पर हरियाणा के किसानों का कर्जा माफ हो।
5. पूसा 1121 और 1509 एक्सपोर्ट वैरायटी धान के एक्सपोर्ट को तुरंत खुलवाने का काम किया जाए।
6. डीजल और यूरिया के दामों को घटाकर, विश्व बाजार में कच्चे तेल के कम दामों का फायदा सीधे किसान को दिया जाए। साथ ही सरकार यह भी सुनिश्चित करे कि जीएसटी लागू होने के कारण खाद के दाम में बढ़ोतरी न की जाए।
7. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसान अपनी मर्जी से हिस्सा बने और जो किसान इससे बाहर रहना चाहते हैं, उन्हें सरकार की तरफ से मिलने वाली सहायता राशि को बढ़ाकर कम से कम 25 हजार रुपये प्रति एकड़ की जाए।
8. हरियाणा कांग्रेस सरकार के मॉडल पर बनी यूपीए सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति तुरंत प्रभाव से हरियाणा में लागू की जाए।
9. किसान तथा खेतिहर मजदूर के इलाज के लिए धरतीपुत्र स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की जाए।
10. सरपल्स बिजली वापस ली जाए और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा स्थापित प्रदेश के सारे थर्मल प्लांट पूरी क्षमता से चलाए जाएं। 11. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार एसवाईएल का निर्माण कराए ताकि हरियाणा को उसके हिस्से का पूरा पानी मिले।
12. सरकार अपने किए गए वायदे अनुसार किसान और मजदूर की अगली पीढ़ी के लिए या तो बेरोजगारी भत्ता नौ हजार दे, या देश में 2 करोड़ रोजगार दे।
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ये नेता रहे मौजूद
विधायक उदयभान, ललित नागर, शकुंतला खटक, जयतीर्थ दहिया, सांसद शादीलाल बतरा, पूर्व मंत्री कर्ण सिंह दलाल, पूर्व मंत्री हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा, पूर्व मंत्री गीता भुक्कल, पूर्व सीपीएस रणसिंह मान, कैलाशो सैनी, पूर्व विधायक अर्जुन सिंह, निर्मल सिंह, जलेब खान, संपत सिंह, कांग्रेस प्रदेश महासचिव पवन गर्ग, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन जलेश शर्मा, कुलविंद्र खैरा सहित पंचकूला, यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र तथा करनाल जिले के कांग्रेसी नेता, कार्यकर्ता और किसान शामिल हुए।