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विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान की मोबाइल एप का लोकार्पण
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कुरुक्षेत्र। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान की संस्कृति बोध कराने वाली संपूर्ण गतिविधियों को दर्शाती मोबाइल एप्लीकेशन ‘विद्या भारती कुरुक्षेत्र’ का लोकार्पण सोमवार को विद्या भारती के अध्यक्ष डॉ गोविंद प्रसाद शर्मा ने साधारण सभा के अंतिम दिन किया।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. रामेंद्र सिंह ने मोबाइल एप की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस एप्लीकेशन में संस्थान का परिचय, क्रिया-कलाप एवं गतिविधियां, संपूर्ण देश में आयोजित की जाने वाली कार्यशाला आयोजन, अखिल भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की जानकारी, छात्रों एवं अध्यापकों के लिए अखिल भारतीय पत्र-वाचन, कथाकथन, तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता, संस्थान द्वारा शैक्षिक विषयों पर की जाने वाली संगोष्ठियां और कार्यक्रम, चित्र दीर्घा, 450 से अधिक वीडियो और ऑडियो दीर्घा, कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण शामिल किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि संस्कृति बोध परियोजना के अंतर्गत चल रहे विभिन्न क्रिया-कलापों का विवरण देते हुए बताया कि इस परियोजना के लिए तैयार किए गए साहित्य में ऐसे तथ्यों की जानकारी दी गई है, जिसका सुकृत्यों से संबंध रहा है। इस एप के जरिये भारतीय संस्कृति के विषय में जानकारी प्राप्त करके हमारे बाल-किशोर विद्यार्थी भैया-बहनें सदगुणों को अंग बनाएं और भारत की सांस्कृतिक विरासत का संदेश पूर्ण देश में फैलाएं।
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इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. रामेंद्र सिंह ने मोबाइल एप की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस एप्लीकेशन में संस्थान का परिचय, क्रिया-कलाप एवं गतिविधियां, संपूर्ण देश में आयोजित की जाने वाली कार्यशाला आयोजन, अखिल भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की जानकारी, छात्रों एवं अध्यापकों के लिए अखिल भारतीय पत्र-वाचन, कथाकथन, तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता, संस्थान द्वारा शैक्षिक विषयों पर की जाने वाली संगोष्ठियां और कार्यक्रम, चित्र दीर्घा, 450 से अधिक वीडियो और ऑडियो दीर्घा, कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण शामिल किए गए हैं।
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उन्होंने बताया कि संस्कृति बोध परियोजना के अंतर्गत चल रहे विभिन्न क्रिया-कलापों का विवरण देते हुए बताया कि इस परियोजना के लिए तैयार किए गए साहित्य में ऐसे तथ्यों की जानकारी दी गई है, जिसका सुकृत्यों से संबंध रहा है। इस एप के जरिये भारतीय संस्कृति के विषय में जानकारी प्राप्त करके हमारे बाल-किशोर विद्यार्थी भैया-बहनें सदगुणों को अंग बनाएं और भारत की सांस्कृतिक विरासत का संदेश पूर्ण देश में फैलाएं।
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