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पराली को जलाने की गोशाला के चारे में किया जाए प्रयोग:सुमेधा ं
Updated Thu, 12 Oct 2017 12:32 AM IST
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फोटो 13
उपायुक्त ने गोशाला संचालकों और अधिकारियों के साथ की बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने कहा कि किसानों को खेतों में खड़े फानों और पराली को आग नहीं लगानी चाहिए। इसे पराली और फानों से भूसा बनाकर गोशाला को उपलब्ध करवाने का प्रयास करना चाहिए। इससे प्रदूषण मुक्त कुरुक्षेत्र बनेगा और गोशाला में पशुओं को चारा भी मिल सकेगा। वह बुधवार को लघु सचिवालय में गोशाला संचालकों और अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक को संबोधित कर रही थी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के आदेशानुसार खेतों में खड़े फानों और पराली को आग लगाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश भी दिए गए हैं। खेतों में खड़े फानों और पराली को आग लगाने से भूमि के मित्र कीट मर जाते हैं और पर्यावरण भी दूषित होता है। इसके अलावा किसी दुर्घटना की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता हैं। उन्होंने कहा कि इन तमाम पहलुओं पर मंथन करने के उपरांत किसानों से अपील की जा रही हैं कि फानों और पराली को आग न लगाए। इससे भूसा तैयार करे और इस भूसे को गोशाला के लिए उपलब्ध करवाया जाए। इससे किसानों को भी फायदा होगा और गायों को चारा भी मिल पाएगा। इसके लिए सभी बीडीपीओ और तहसीलदारों को भी किसानों को जागरूक करने के आदेश दिए गए हैं। इस बैठक में वैज्ञानिकों ने चारा बनाने के प्रति जानकारी दी। फानों को आग लगाने से होने वाले नुकसान के बारे में भी बताया। इस मौके पर पशुपालन विभाग के उपनिदेश डॉ. धर्मेंद्र आदि अधिकारी मौजूद थे।
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उपायुक्त ने गोशाला संचालकों और अधिकारियों के साथ की बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने कहा कि किसानों को खेतों में खड़े फानों और पराली को आग नहीं लगानी चाहिए। इसे पराली और फानों से भूसा बनाकर गोशाला को उपलब्ध करवाने का प्रयास करना चाहिए। इससे प्रदूषण मुक्त कुरुक्षेत्र बनेगा और गोशाला में पशुओं को चारा भी मिल सकेगा। वह बुधवार को लघु सचिवालय में गोशाला संचालकों और अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक को संबोधित कर रही थी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के आदेशानुसार खेतों में खड़े फानों और पराली को आग लगाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश भी दिए गए हैं। खेतों में खड़े फानों और पराली को आग लगाने से भूमि के मित्र कीट मर जाते हैं और पर्यावरण भी दूषित होता है। इसके अलावा किसी दुर्घटना की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता हैं। उन्होंने कहा कि इन तमाम पहलुओं पर मंथन करने के उपरांत किसानों से अपील की जा रही हैं कि फानों और पराली को आग न लगाए। इससे भूसा तैयार करे और इस भूसे को गोशाला के लिए उपलब्ध करवाया जाए। इससे किसानों को भी फायदा होगा और गायों को चारा भी मिल पाएगा। इसके लिए सभी बीडीपीओ और तहसीलदारों को भी किसानों को जागरूक करने के आदेश दिए गए हैं। इस बैठक में वैज्ञानिकों ने चारा बनाने के प्रति जानकारी दी। फानों को आग लगाने से होने वाले नुकसान के बारे में भी बताया। इस मौके पर पशुपालन विभाग के उपनिदेश डॉ. धर्मेंद्र आदि अधिकारी मौजूद थे।
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