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सभी डीन, डायरेक्टर व अध्यक्षों ने कहा कि हड़ताल अनुचित, हड़ताल छोड़ काम पर लौटें
Updated Tue, 20 Mar 2018 12:40 AM IST
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डीन, डायरेक्टर व अध्यक्ष बोले, हड़ताल छोड़ काम पर लौटें कर्मचारी
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
केयू में चल रही कुंटिया की हड़ताल के संबंध में कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने सोमवार शाम को सभी डीन, निदेशकों व विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई। जिसमें सभी डीन, डायरेक्टर व ब्रांच अधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि हड़ताल विश्वविद्यालय के हित में नहीं, इसलिए कर्मचारी हड़ताल छोड़कर काम पर लौट आएं।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय गैर शिक्षक कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों से कई दौर की बातचीत कर चुका है। सभी मुद्दों पर सहमति भी बन गई, लेकिन कर्मचारी हड़ताल खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी ही केयू की पहली प्राथमिकता हैं और रहेंगे। विद्यार्थियों व केयू के अहित में जो काम करेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि केयू प्रशासन ने कर्मचारियों की हर मांग को माना है। एलटीसी, अलाउंस जारी किया गया है। स्टाफ रेशो के एरियर को 25 फीसदी 31 मार्च तक देने को कहा था व दिया जाएगा। सभी मांगों पर चर्चा व सहमति के बाद भी कुछ लोग विश्वविद्यालय के माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
कुलपति ने कहा कि सरकार एवं कुलाधिपति के स्पष्ट निर्देशों के बाद दबाव बनाकर बिना योग्यता के प्रमोशन पाने की परंपरा अब विश्वविद्यालय में नहीं चलेगी। इस मौके पर डीन डायरेक्टर व विभागाध्यक्षों ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। सभी ब्रांच अधिकारियों ने कहा कि वे इस संबंध में अपने विभागों में जाकर कर्मचारियों से बातचीत करेंगे। हड़ताल किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। कुछ लोगों ने कहा कि विश्वविद्यालय में अच्छा कार्य करने वालों को ही प्रमोट करना चाहिए, ताकि कर्मठ लोगों को आगे आने का मौका मिल सके। बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी अधिकारी एक बार कर्मचारियों से चर्चा करेंगे। उसके बाद भी अगर कर्मचारी हड़ताल नहीं खत्म करते हैं तो कुलपति विश्वविद्यालय के हित में जो भी फैसला लेंगे सभी डीन, डायरेक्टर व ब्रांच अधिकारी उसे समर्थन करेंगे। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने कुंटिया के डिमांड चार्टर पर प्रशासन द्वारा लिए गए निर्णयों के बारे में अवगत कराया।
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कुंटिया के आंदोलन को कुचलना चाहता है केयू प्रशासन : गुर्जर
केयू गैर-शिक्षक कर्मचारी संघ (कुंटिया) के प्रधान रामकुमार गुर्जर ने कहा कि केयू प्रशासन कर्मचारियों के जायज हकों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रहा है, जिसे कुंटिया किसी भी हालत में कामयाब नहीं होने देगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन कर्मचारियों को डराने-धमकाने व उन पर सख्ती करने का प्रयास करेगा तो संघर्ष और बढ़ेगा। कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय परिसर मे जुलूस निकाला, जोकि कुलपति निवास और विश्वविद्यालय मार्केट से होता हुआ कुलपति कार्यालय पहुंचा। सोमवार को कुंटिया के आह्वान पर केयू में सभी कार्य आधा दिन ठप रहे। कुंटिया महासचिव नीलकंठ शर्मा एवं प्रेस प्रवक्ता मनीष बालदा ने कहा कि प्रशासन जानबूझ कर संघर्ष को लंबा कर रहा है। इस धरना प्रदर्शन को कुंटिया के पूर्व-प्रधान सुनील कक्कड़, पूर्व महासचिव, रामलाल, रामकरण शर्मा, भारत भूषण एवं रामफल, भूषण चौहान, प्रवीण चौहान, प्रवीण मथाना, विष्णु नाथ, कृष्ण पांडेय, सुनील शर्मा, अजमेर सिंह, शमशेर सिंह, जगदीश खनौदा, प्रियंका श्योकंद ने भी संबोधित किया ।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
केयू में चल रही कुंटिया की हड़ताल के संबंध में कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने सोमवार शाम को सभी डीन, निदेशकों व विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई। जिसमें सभी डीन, डायरेक्टर व ब्रांच अधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि हड़ताल विश्वविद्यालय के हित में नहीं, इसलिए कर्मचारी हड़ताल छोड़कर काम पर लौट आएं।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय गैर शिक्षक कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों से कई दौर की बातचीत कर चुका है। सभी मुद्दों पर सहमति भी बन गई, लेकिन कर्मचारी हड़ताल खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी ही केयू की पहली प्राथमिकता हैं और रहेंगे। विद्यार्थियों व केयू के अहित में जो काम करेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि केयू प्रशासन ने कर्मचारियों की हर मांग को माना है। एलटीसी, अलाउंस जारी किया गया है। स्टाफ रेशो के एरियर को 25 फीसदी 31 मार्च तक देने को कहा था व दिया जाएगा। सभी मांगों पर चर्चा व सहमति के बाद भी कुछ लोग विश्वविद्यालय के माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
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कुलपति ने कहा कि सरकार एवं कुलाधिपति के स्पष्ट निर्देशों के बाद दबाव बनाकर बिना योग्यता के प्रमोशन पाने की परंपरा अब विश्वविद्यालय में नहीं चलेगी। इस मौके पर डीन डायरेक्टर व विभागाध्यक्षों ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। सभी ब्रांच अधिकारियों ने कहा कि वे इस संबंध में अपने विभागों में जाकर कर्मचारियों से बातचीत करेंगे। हड़ताल किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। कुछ लोगों ने कहा कि विश्वविद्यालय में अच्छा कार्य करने वालों को ही प्रमोट करना चाहिए, ताकि कर्मठ लोगों को आगे आने का मौका मिल सके। बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी अधिकारी एक बार कर्मचारियों से चर्चा करेंगे। उसके बाद भी अगर कर्मचारी हड़ताल नहीं खत्म करते हैं तो कुलपति विश्वविद्यालय के हित में जो भी फैसला लेंगे सभी डीन, डायरेक्टर व ब्रांच अधिकारी उसे समर्थन करेंगे। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने कुंटिया के डिमांड चार्टर पर प्रशासन द्वारा लिए गए निर्णयों के बारे में अवगत कराया।
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कुंटिया के आंदोलन को कुचलना चाहता है केयू प्रशासन : गुर्जर
केयू गैर-शिक्षक कर्मचारी संघ (कुंटिया) के प्रधान रामकुमार गुर्जर ने कहा कि केयू प्रशासन कर्मचारियों के जायज हकों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रहा है, जिसे कुंटिया किसी भी हालत में कामयाब नहीं होने देगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन कर्मचारियों को डराने-धमकाने व उन पर सख्ती करने का प्रयास करेगा तो संघर्ष और बढ़ेगा। कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय परिसर मे जुलूस निकाला, जोकि कुलपति निवास और विश्वविद्यालय मार्केट से होता हुआ कुलपति कार्यालय पहुंचा। सोमवार को कुंटिया के आह्वान पर केयू में सभी कार्य आधा दिन ठप रहे। कुंटिया महासचिव नीलकंठ शर्मा एवं प्रेस प्रवक्ता मनीष बालदा ने कहा कि प्रशासन जानबूझ कर संघर्ष को लंबा कर रहा है। इस धरना प्रदर्शन को कुंटिया के पूर्व-प्रधान सुनील कक्कड़, पूर्व महासचिव, रामलाल, रामकरण शर्मा, भारत भूषण एवं रामफल, भूषण चौहान, प्रवीण चौहान, प्रवीण मथाना, विष्णु नाथ, कृष्ण पांडेय, सुनील शर्मा, अजमेर सिंह, शमशेर सिंह, जगदीश खनौदा, प्रियंका श्योकंद ने भी संबोधित किया ।