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जिले की 40 फीसदी से अधिक कृषि भूमि में पोषक तत्वों की कमी

Sat, 07 Oct 2017 11:19 PM IST
Updated Sat, 07 Oct 2017 11:19 PM IST
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जिले की 40 फीसदी से अधिक कृषि भूमि में पोषक तत्वों की कमी
अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र।
जिले की कृषि भूमि का उपजाऊ क्षमता लगातार कम हो रही है। यही हालात रहे तो किसानों को फसल की लागत पूरा भी दुश्वार हो जाएगा। जिले की 40 फीसदी कृषि भूमि में फसल के लिए अहम माने जाने वाले पोषक तत्व जैविक कार्बन, फास्फोरस और जिंक की जबरदस्त कमी बनी हुई है। जबकि, बाकी करीब 60 फीसदी भूमि में इन तत्वों की कमी औसतन मानी जा रही है।
यह खुलासा कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा शुरू की गई मिट्टी जांच लैब से मिल रही रिपोर्ट में हुआ है। करीब एक माह से प्रदेश में स्थित कृषि विज्ञान केंद्रों में शुरू हुई लैब में अब तक जिले के अलग-अलग गांवों के करीब 50 लोगों ने अपने-अपने खेतों से मिट्टी और ट्यूबवेल के पानी की जांच करवाई है। इन किसानों की मिट्टी के नमूनों की जांच रिपोर्ट से वैज्ञानिक भी चिंतित हो गए हैं। साथ ही किसानों की अनदेखी भी स्पष्ट हो रही है। किसान हर फसल में अधिक से अधिक उत्पादन लेने के लिए अंधाधुंध उर्वरक और कीटनाशकों का प्रयोग कर रहे हैं। इससे अनाज भी जहरीला हो रहा है। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो भूमि में पोषक तत्वों में से एक भी तत्व का निर्धारित मात्रा से कम हो जाने पर फसल का उत्पादन कम हो जाता है। इसलिए फसल से अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए किसानों को भूमि में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना चाहिए।
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कृषि भूमि में 17 पोषक तत्व जरूरी : हरिओम
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हरिओम का कहना है कि कृषि भूमि में जैविक कार्बन, फास्फोरस और जिंक की पर्याप्त मात्रा बेहद जरूरी है। इनके साथ ही 17 पोषक तत्व कृषि भूमि में होने चाहिए। सभी तत्व होंगे तो जमीन की ताकत बढ़ेगी और उत्पादन स्वत: ही बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को जागरूक होने की जरूरत है। केंद्र भी जिले भर के किसानों को जागरूक कर रहा है।
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जैविक खाद बेहतर
कृषि वैज्ञानिक डॉ. जेएन भाटिया का कहना है कि किसानों को रासायनिक उर्वरकों की जगह जैविक खाद और गोबर की खाद को प्राथमिकता देनी चाहिए। कीटनाशक भी वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही प्रयोग करने चाहिए।

अधिकतर किसान वैज्ञानिकों से कोसों दूर
गांव खानपुर निवासी किसान महेंद्र सिंह का कहना है कि अधिकतर किसान कृषि वैज्ञानिकों से आज भी कोसों दूर हैं। उन्हें कृषि तकनीकी जानकारी तक नहीं होती। ये किसान परंपरागत तरीके से या फिर आसपास के किसानों की होड़ में ही उर्वरक और कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं।
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