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उत्कृष्ट कार्यो से चमके जिला के दो किसान व कृषि निदेशक
Updated Thu, 06 Jul 2017 11:31 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
अपने उत्कृष्ट कार्यों के चलते जिला के दो किसान और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के जोन एक के निदेशक को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा जाएगा। इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से दिल्ली में 16 जुलाई को स्थापना दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें निदेशक डॉ. राजबीर सिंह के अलावा दोनों किसानों हरबीर सिंह व कर्ण कुमार सिकरी को आमंत्रित किया गया है। किसान हरबीर सिंह तूर को एनजी रंगा नेशनल अवार्ड और कर्ण कुमार सिकरी को जगजीवन राम अभिनव पुरस्कार से नवाजा जाएगा। वहीं निदेशक डॉ राजबीर सिंह को स्वामी सहजानंद सरस्वती पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। बता दें कि हरबीर सिंह तूर गांव डाडलू व कर्ण कुमार सिकरी गांव ढंगाली से हैं। उक्त अवार्ड के लिए हरबीर तूर का चयन फार्म में विविधिकरण खेती के तहत हुआ है तथा कर्ण सिकरी का चयन केंचुआ वर्णी कंपोस्ट खाद तैयार करने के लिए किया गया है।
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हरबीर तूर इटली में करते हैं हर वर्ष 20 हजार पौध की सप्लाई
हरबीर तूर पिछले कई वर्षों से गांव डाडलू में विविधिकरण के आधार पर हर तरह की खेती कर रहे हैं। वह अपने फार्म पर मिर्च की पैदावार भी करते हैं। हर वर्ष वे 20 हजार पौध की सप्लाई इटली भी करते हैं। हरबीर तूर ने बताया कि शुरू से ही उनका रुझान खेती में कुछ नया करने का था इसलिए उन्होंने विविधिकरण खेती पर जोर दिया। हरबीर सिंह ने मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद नौकरी की बजाए 2005 में खेती शुरू की थी और वैज्ञानिक पद्धति से कृषि को तरजीह दी। हरबीर ने अपनी 16 एकड़ की खेती को हाइटेक बनाया है और जिसमें एक भी पौधा बीमारी वाला नहीं है।
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बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने जुटे हैं कर्ण सिकरी
गांव ढंगाली के किसान कर्ण सिकरी अपने फार्म पर केंचुए की खाद तैयार करने में माहिर हैं। वर्णी कंपोस्ट केंचुए की खाद तैयार करने में कर्ण ने लोकप्रियता हासिल की है। वे करीब 13 वर्षों से इस तरह की खाद तैयार कर रहे हैं, जो विभिन्न प्रांतों में जाती है। मधुमक्खी पालन, टपका सिंचाई, ड्रिप सिंचाई, सेफ आयल, सेफ वाटर, मिट्टी बचाओ के तहत खेती कर रहे हैं। कर्ण सिकरी ने बताया कि उन्होंने अपने फार्म पर मिट्टी की जांच की लैब लगा दी है। उनका लक्ष्य बंजर जमीन की उपजाऊ शक्ति वापस लाना है।
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डॉ. राजबीर ने 45 हजार किसानों से किया सीधा संपर्क
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद जोन एक के निदेशक डॉ. राजबीर सिंह को स्वामी सहजानंद सरस्वती अवार्ड फसल अवशेष संरक्षण के लिए किए गए कार्यों पर दिया जाएगा। इसके लिए उन्होंने 45 हजार किसानों से सीधे संपर्क किया तो करीब 5 लाख किसानों के पास एसएमएस के जरिये संदेश भेजे। उन्होंने कृषि व किसान मेलों का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया तो वहीं किसानों के ग्रुप भी बनाए। उनके प्रयासों के चलते जोन में इस बार कृषि अवशेष जलाने के मामलों में गिरावट दर्ज की गई। कुरुक्षेत्र कृषि विज्ञान केंद्र पर उनका विशेष फोकस रहा है।
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कृषि विज्ञान केंद्र पर है विशेष फोकस : डॉ हरि ओम
कृषि विज्ञान केंद्र के समन्वयक डॉ. हरिओम का कहना है कि कृषि विज्ञान केंद्र पर जोन निदेशक डॉ. राजबीर सिंह का विशेष फोकस है। जहां वे जिले के सैकड़ों किसानों को सीधे तौर पर जानते हैं। वे पिछले एक वर्ष के दौरान ही कृषि मेलों व अन्य कार्यक्रमों में यहां के किसानों का उत्साह बढ़ा चुके हैं।
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कुरुक्षेत्र।
अपने उत्कृष्ट कार्यों के चलते जिला के दो किसान और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के जोन एक के निदेशक को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा जाएगा। इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से दिल्ली में 16 जुलाई को स्थापना दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें निदेशक डॉ. राजबीर सिंह के अलावा दोनों किसानों हरबीर सिंह व कर्ण कुमार सिकरी को आमंत्रित किया गया है। किसान हरबीर सिंह तूर को एनजी रंगा नेशनल अवार्ड और कर्ण कुमार सिकरी को जगजीवन राम अभिनव पुरस्कार से नवाजा जाएगा। वहीं निदेशक डॉ राजबीर सिंह को स्वामी सहजानंद सरस्वती पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। बता दें कि हरबीर सिंह तूर गांव डाडलू व कर्ण कुमार सिकरी गांव ढंगाली से हैं। उक्त अवार्ड के लिए हरबीर तूर का चयन फार्म में विविधिकरण खेती के तहत हुआ है तथा कर्ण सिकरी का चयन केंचुआ वर्णी कंपोस्ट खाद तैयार करने के लिए किया गया है।
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हरबीर तूर इटली में करते हैं हर वर्ष 20 हजार पौध की सप्लाई
हरबीर तूर पिछले कई वर्षों से गांव डाडलू में विविधिकरण के आधार पर हर तरह की खेती कर रहे हैं। वह अपने फार्म पर मिर्च की पैदावार भी करते हैं। हर वर्ष वे 20 हजार पौध की सप्लाई इटली भी करते हैं। हरबीर तूर ने बताया कि शुरू से ही उनका रुझान खेती में कुछ नया करने का था इसलिए उन्होंने विविधिकरण खेती पर जोर दिया। हरबीर सिंह ने मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद नौकरी की बजाए 2005 में खेती शुरू की थी और वैज्ञानिक पद्धति से कृषि को तरजीह दी। हरबीर ने अपनी 16 एकड़ की खेती को हाइटेक बनाया है और जिसमें एक भी पौधा बीमारी वाला नहीं है।
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बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने जुटे हैं कर्ण सिकरी
गांव ढंगाली के किसान कर्ण सिकरी अपने फार्म पर केंचुए की खाद तैयार करने में माहिर हैं। वर्णी कंपोस्ट केंचुए की खाद तैयार करने में कर्ण ने लोकप्रियता हासिल की है। वे करीब 13 वर्षों से इस तरह की खाद तैयार कर रहे हैं, जो विभिन्न प्रांतों में जाती है। मधुमक्खी पालन, टपका सिंचाई, ड्रिप सिंचाई, सेफ आयल, सेफ वाटर, मिट्टी बचाओ के तहत खेती कर रहे हैं। कर्ण सिकरी ने बताया कि उन्होंने अपने फार्म पर मिट्टी की जांच की लैब लगा दी है। उनका लक्ष्य बंजर जमीन की उपजाऊ शक्ति वापस लाना है।
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डॉ. राजबीर ने 45 हजार किसानों से किया सीधा संपर्क
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद जोन एक के निदेशक डॉ. राजबीर सिंह को स्वामी सहजानंद सरस्वती अवार्ड फसल अवशेष संरक्षण के लिए किए गए कार्यों पर दिया जाएगा। इसके लिए उन्होंने 45 हजार किसानों से सीधे संपर्क किया तो करीब 5 लाख किसानों के पास एसएमएस के जरिये संदेश भेजे। उन्होंने कृषि व किसान मेलों का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया तो वहीं किसानों के ग्रुप भी बनाए। उनके प्रयासों के चलते जोन में इस बार कृषि अवशेष जलाने के मामलों में गिरावट दर्ज की गई। कुरुक्षेत्र कृषि विज्ञान केंद्र पर उनका विशेष फोकस रहा है।
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कृषि विज्ञान केंद्र पर है विशेष फोकस : डॉ हरि ओम
कृषि विज्ञान केंद्र के समन्वयक डॉ. हरिओम का कहना है कि कृषि विज्ञान केंद्र पर जोन निदेशक डॉ. राजबीर सिंह का विशेष फोकस है। जहां वे जिले के सैकड़ों किसानों को सीधे तौर पर जानते हैं। वे पिछले एक वर्ष के दौरान ही कृषि मेलों व अन्य कार्यक्रमों में यहां के किसानों का उत्साह बढ़ा चुके हैं।