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कलियुग में भागवत पुराण साक्षात भगवान के दर्शन : ठाकुर
Updated Sat, 25 Nov 2017 12:42 AM IST
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कलियुग में भागवत पुराण साक्षात भगवान के दर्शन : ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गीता जयंती महोत्सव के अवसर पर पवित्र ब्रह्म सरोवर के तट पर जयराम विद्यापीठ परिसर में भारत साधु समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं जयराम संस्थाओं के परमा अध्यक्ष ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी के सानिध्य में कलश यात्रा के साथ सात दिवसीय भागवत पुराण की कथा का शुभारंभ हुआ। शोभा यात्रा का नेतृत्व सैकड़ों महिलाओं ने जहां सिर पर पवित्र कलशों को धारण किया वहीं शोभा यात्रा में कथा के मुख्य यजमान जय भगवान गर्ग, जय प्रकाश गर्ग, नरेन्द्र गर्ग और रमेश चंद गर्ग भागवत पुराण को अपने सिर पर श्रद्धा के साथ धारण कर कथा स्थल पर पहुंचे। कथा के शुभारंभ से पूर्व देश के विभिन्न कोनों से संत महापुरुष भी पहुंचे। इन में प्रमुख तौर पर महा मंडलेश्वर स्वामी उमाकांतानंद जी महाराज, महा मंडलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी जी महाराज, महा मंडलेश्वर हरि गिरि जी महाराज, स्वामी सहज प्रकाश, सतपाल ब्रह्मचारी, स्वामी ऋषिश्वरानन्द, गुरु डॉ. आनंदमय, स्वामी महेश मुनि इत्यादि संतों ने अपने प्रवचनों से अमृत वर्षा की। व्यासपीठ की यजमान परिवार के साथ भागवत पुराण की देश की पूर्व मंत्री एवं राज्य सभा सदस्या कुमारी शैलजा और थानेसर के विधायक सुभाष सुधा ने पूजा अर्चना की। कथा के पहले दिन व्यासपीठ से विश्वविख्यात कथावाचक भागवत भास्कर कृष्ण चंद शास्त्री ठाकुर ने संगीतमयी शैली में भागवत कथा के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि कल युग में भागवत पुराण साक्षात भगवान का रूप है, इसके सुनने मात्र से पापों का नाश होता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा के स्मरण मात्र से ही मनुष्य का कल्याण हो जाता है। प्रत्येक मनुष्य को भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए तथा धर्म की राह पर चलना चाहिए। श्रीमद्भागवत पुराण हिंदू समाज का सर्वाधिक आदरणीय पुराण है। यह वैष्णव संप्रदाय का प्रमुख ग्रंथ है। कृष्ण चंद शास्त्री ठाकुर ने बताया इस ग्रंथ में वेदों, उपनिषदों तथा दर्शन शास्त्र के गूढ़ एवं रहस्यमय विषयों को अत्यंत सरलता के साथ निरूपित किया गया है। इसे भारतीय धर्म और संस्कृति का विश्व कोष कहना अधिक समीचीन होगा। सैकड़ों वर्षों से यह पुराण हिन्दू समाज की धार्मिक, सामाजिक और लौकिक मर्यादाओं की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता आ रहा हैं। पहले दिन की कथा के समापन पर यजमान परिवार ने व्यासपीठ की आरती की। इस अवसर पर के के कौशिक, खरैती लाल सिंगला, परीक्षित मदान, बलजीत सिंह, सुनील गौरी, जयपाल, टेक सिंह लौहार माजरा, राजेंद्र सिंघल, श्रवण गुप्ता, टीके शर्मा, सुमेंदर शास्त्री, हीरा लाल, डॉ. श्री कृष्ण शर्मा, राजेश लेखवार शास्त्री, कमलदीप, कुलवंत सिंह इत्यादि भी मौजूद थे।
भौतिक युग में धर्म और पुराण ही रक्षा करते हैं : शैलजा
जयराम विद्यापीठ में कथा श्रवण करने पहुंची पूर्व मंत्री एवं राज्य सभा सदस्य कुमारी शैलजा ने कहा कि आज हम लोग भौतिकवाद के युग में सुखों के कारण मार्ग भटक रहे हैं। धर्म और पुराण ही हमारी रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संत महापुरुषों के सानिध्य में भागवत पुराण का श्रवण करना आलौकिक क्षण हैं। आज भी हमारी संस्कृति विश्व की सबसे मजबूत संस्कृति है।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गीता जयंती महोत्सव के अवसर पर पवित्र ब्रह्म सरोवर के तट पर जयराम विद्यापीठ परिसर में भारत साधु समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं जयराम संस्थाओं के परमा अध्यक्ष ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी के सानिध्य में कलश यात्रा के साथ सात दिवसीय भागवत पुराण की कथा का शुभारंभ हुआ। शोभा यात्रा का नेतृत्व सैकड़ों महिलाओं ने जहां सिर पर पवित्र कलशों को धारण किया वहीं शोभा यात्रा में कथा के मुख्य यजमान जय भगवान गर्ग, जय प्रकाश गर्ग, नरेन्द्र गर्ग और रमेश चंद गर्ग भागवत पुराण को अपने सिर पर श्रद्धा के साथ धारण कर कथा स्थल पर पहुंचे। कथा के शुभारंभ से पूर्व देश के विभिन्न कोनों से संत महापुरुष भी पहुंचे। इन में प्रमुख तौर पर महा मंडलेश्वर स्वामी उमाकांतानंद जी महाराज, महा मंडलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी जी महाराज, महा मंडलेश्वर हरि गिरि जी महाराज, स्वामी सहज प्रकाश, सतपाल ब्रह्मचारी, स्वामी ऋषिश्वरानन्द, गुरु डॉ. आनंदमय, स्वामी महेश मुनि इत्यादि संतों ने अपने प्रवचनों से अमृत वर्षा की। व्यासपीठ की यजमान परिवार के साथ भागवत पुराण की देश की पूर्व मंत्री एवं राज्य सभा सदस्या कुमारी शैलजा और थानेसर के विधायक सुभाष सुधा ने पूजा अर्चना की। कथा के पहले दिन व्यासपीठ से विश्वविख्यात कथावाचक भागवत भास्कर कृष्ण चंद शास्त्री ठाकुर ने संगीतमयी शैली में भागवत कथा के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि कल युग में भागवत पुराण साक्षात भगवान का रूप है, इसके सुनने मात्र से पापों का नाश होता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा के स्मरण मात्र से ही मनुष्य का कल्याण हो जाता है। प्रत्येक मनुष्य को भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए तथा धर्म की राह पर चलना चाहिए। श्रीमद्भागवत पुराण हिंदू समाज का सर्वाधिक आदरणीय पुराण है। यह वैष्णव संप्रदाय का प्रमुख ग्रंथ है। कृष्ण चंद शास्त्री ठाकुर ने बताया इस ग्रंथ में वेदों, उपनिषदों तथा दर्शन शास्त्र के गूढ़ एवं रहस्यमय विषयों को अत्यंत सरलता के साथ निरूपित किया गया है। इसे भारतीय धर्म और संस्कृति का विश्व कोष कहना अधिक समीचीन होगा। सैकड़ों वर्षों से यह पुराण हिन्दू समाज की धार्मिक, सामाजिक और लौकिक मर्यादाओं की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता आ रहा हैं। पहले दिन की कथा के समापन पर यजमान परिवार ने व्यासपीठ की आरती की। इस अवसर पर के के कौशिक, खरैती लाल सिंगला, परीक्षित मदान, बलजीत सिंह, सुनील गौरी, जयपाल, टेक सिंह लौहार माजरा, राजेंद्र सिंघल, श्रवण गुप्ता, टीके शर्मा, सुमेंदर शास्त्री, हीरा लाल, डॉ. श्री कृष्ण शर्मा, राजेश लेखवार शास्त्री, कमलदीप, कुलवंत सिंह इत्यादि भी मौजूद थे।
भौतिक युग में धर्म और पुराण ही रक्षा करते हैं : शैलजा
जयराम विद्यापीठ में कथा श्रवण करने पहुंची पूर्व मंत्री एवं राज्य सभा सदस्य कुमारी शैलजा ने कहा कि आज हम लोग भौतिकवाद के युग में सुखों के कारण मार्ग भटक रहे हैं। धर्म और पुराण ही हमारी रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संत महापुरुषों के सानिध्य में भागवत पुराण का श्रवण करना आलौकिक क्षण हैं। आज भी हमारी संस्कृति विश्व की सबसे मजबूत संस्कृति है।
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