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गीता में है संसार का गूढ़ ज्ञान तथा आत्मा का महत्व : मिश्र
Updated Sat, 18 Nov 2017 12:19 AM IST
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गीता में है संसार का गूढ़ ज्ञान तथा आत्मा का महत्व : मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गीता कर्म की अवधारणा को अभिव्यक्त करती है। गीता आज भी उतनी प्रासंगिक है, जितना पुरातन काल में थी। गीता में विचारों को तर्क दृष्टि के द्वारा बहुत ही सरल और प्रभावशाली रूप से पेश किया गया है। संसार के गूढ़ ज्ञान और आत्मा के महत्व पर विस्तृत, विशद वर्णन प्राप्त होता है। यह विचार मातृ भूमि सेवा मिशन के संयोजक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती समारोह पर मिशन द्वारा आयोजित अठारह दिवसीय विश्व कल्याण महायज्ञ के पांचवें दिन व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि गीता आत्मा एवं परमात्मा के स्वरूप को व्यक्त करती है। कृष्ण के उपदेशों को प्राप्त कर अर्जुन उस परम ज्ञान की प्राप्ति करते हैं, जो उनकी समस्त शंकाओं को दूर कर उन्हें कर्म की ओर प्रवृत्त करने में सहायक होती है। गीता के विचारों से मनुष्य को उचित बोध की प्राप्ति होती है। यह आत्मा तत्व का निर्धारण करता है, उसकी प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। आज के समय में इस ज्ञान की प्राप्ति से अनेक विकारों से मुक्त हुआ जा सकता है। इस मौके पर संस्कृत वेद विद्यालय के वैदिक ब्रह्मचारियों द्वारा गीता के पंचम अध्याय के श्लोकों की आहुति डाली गई।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गीता कर्म की अवधारणा को अभिव्यक्त करती है। गीता आज भी उतनी प्रासंगिक है, जितना पुरातन काल में थी। गीता में विचारों को तर्क दृष्टि के द्वारा बहुत ही सरल और प्रभावशाली रूप से पेश किया गया है। संसार के गूढ़ ज्ञान और आत्मा के महत्व पर विस्तृत, विशद वर्णन प्राप्त होता है। यह विचार मातृ भूमि सेवा मिशन के संयोजक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती समारोह पर मिशन द्वारा आयोजित अठारह दिवसीय विश्व कल्याण महायज्ञ के पांचवें दिन व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि गीता आत्मा एवं परमात्मा के स्वरूप को व्यक्त करती है। कृष्ण के उपदेशों को प्राप्त कर अर्जुन उस परम ज्ञान की प्राप्ति करते हैं, जो उनकी समस्त शंकाओं को दूर कर उन्हें कर्म की ओर प्रवृत्त करने में सहायक होती है। गीता के विचारों से मनुष्य को उचित बोध की प्राप्ति होती है। यह आत्मा तत्व का निर्धारण करता है, उसकी प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। आज के समय में इस ज्ञान की प्राप्ति से अनेक विकारों से मुक्त हुआ जा सकता है। इस मौके पर संस्कृत वेद विद्यालय के वैदिक ब्रह्मचारियों द्वारा गीता के पंचम अध्याय के श्लोकों की आहुति डाली गई।
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