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मारकंडा नदी में आए उफान से नैसी गांव के समीप तटबंध टूटा, आसपास के क्षेत्र की फसल जल मग्न, एसवाईएल भी उफान पर

Sat, 02 Sep 2017 11:19 PM IST
Updated Sat, 02 Sep 2017 11:19 PM IST
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मारकंडा नदी में आए उफान से नैसी गांव के समीप तटबंध टूटा, आसपास के क्षेत्र की फसल जल मग्न, एसवाईएल भी उफान पर
फोटो-17 से 21
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मारकंडा नदी में आए उफान से नैसी गांव के समीप तटबंध टूटे
-आसपास क्षेत्र की फसल जलमग्न,एसवाईएल भी उफान पर
अमर उजाला ब्यूरो
इस्माईलाबाद
मारकंडा नदी उफान पर है। इसमें करीब 7 हजार क्यूसेक पानी बह रहा है। शनिवार को गांव नैसी के समीप करीब 4 बजे तटबंध टूट गया। हालांकि ग्रामीणों की मुस्तैदी व सूझबूझ के चलते बड़ा नुकसान होने से बच गया।
ग्रामीण सतीश शर्मा, कमलजीत, श्याल लाल, बंता राम, भगवत सिंह, गजराज सिंह आदि ने उनके होश उस समय उड़ गए जब उन्हें पता चला की मारकंडा नदी का पानी तट से ओवरफ्लो होकर खेतों में गिरने लगा है। ग्रामीणों ने इसकी सूचना नहरी विभाग को दी और ग्रामीण अपने ट्रैक्टर आदि लेकर मारकंडा नदी के तट पर पहुंचे तब तक तट टूट चुका था। इसके चलते गांव नैसी व आसपास केे गांवों की धान की फसल जलमग्न हो गई। इससे पहले की बाढ़ के हालात पैदा होते, ग्रामीणों ने विभाग की मदद से जल्द ही टूटे हुए तट पर काबू पाया और उसे बांधने का कार्य कर पानी को खेतों में घुसने से रोका।
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ग्रामीणों ने बताया कि अगर समय रहते मारकंडा नदी के टूटे हुए बांध पर काबू नहीं पाया जाता तो काफी नुकसान होता और करीब दर्जन भर गांवों की सैकड़ों एकड़ धान की फसल भेंट चढ़ जाती। किसानों ने बताया कि मारकंडा नदी का पानी गांव नैसी, जंधेडी, बालापुर, जैतपुरा, दानीपुर, जोधपुर, कलावड़, जखवाला आदि गांवों की सैकड़ों एकड़ धान की फसल को अपनी चपेट में ले लेता।
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ग्रामीण बंता राम, गजराज सिंह, कमलजीत, सतीश शर्मा आदि ने बताया कि एक तो प्रशासन ने समय रहते कमजोर तटबंधों को मजबूत बनाने का कार्य नहीं किया। उन्होंने कहा कि सारा प्रशासन गुरमीत राम रहीम के केस की तरफ लगा रहा और मारकंडा नदी की तरफ किसी भी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया। इसका खामियाजा उन्हें अपनी फसल की भेंट चढ़ा कर भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने नहरी विभाग को तट टूटने की सूचना दी तो विभाग ने वह बांध किसानों का अपना निजी बांध बताया और बांध को बांधने के लिए एक मैट तथा पांच मजदूर ही भेजे जो पर्याप्त नहीं थे। ग्रामीणों के सहयोग से ही तट को बांधने का कार्य किया जा रहा है।
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नहरी विभाग के एसडीओ पिहोवा गौरव लांबा ने बताया कि गांव नैसी के समीप किसानों ने अपने खेतों में पानी न घुसने देने के लिए निजी बांध बांधा हुआ है। फिर भी ग्रामीणों की सूचना पर बांध को बांधने के लिए जेसीबी मशीन भेजी थी लेकिन रास्ता तंग होने व नदी के तट की चौड़ाई कम होने से जेसीबी मशीन नहीं चल सकी। उन्होंने किराये पर दो ट्रैक्टर लगवा दिए हैं और कट्टों के साथ बांध बांधने के लिए पांच मजदूर लगा दिए हैं। और अधिक मजदूरों के लिए सरपंच से बात हुई है कि मनरेगा के तहत मजदूर तट को बांधने के लिए भेजे उन्हें मजदूरी विभाग की तरफ से दे दी जाएगी।


एसवाईएल भी उफान पर
नहरी विभाग झांसा के एसडीओ विनोद कुमार ने बताया कि मारकंडा नदी में इस समय करीब 7 हजार क्यूसिक पानी बह रहा है। जो कि खतरे के निशान के करीब है। उन्होंने बताया कि मारकंडा नदी का पानी अधिक होने पर एसवाईएल में छोड़ दिया जाता था लेकिन अंबाला क्षेत्र में भी भारी बरसात के चलते एसवाईएल पहले ही उफान पर है। उन्होंने कहा कि लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। विभाग लगातार तटबंधों पर नजर बनाए हुए है। रात्रि के समय भी कमजोर तटबंधों पर गश्त बढ़ा दी है।
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