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गीता पर उच्चारण की अपेक्षा उस पर आचरण करना चाहिए : स्वामी पंचानन्द

Mon, 20 Nov 2017 12:26 AM IST
Updated Mon, 20 Nov 2017 12:26 AM IST
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गीता पर उच्चारण की अपेक्षा उस पर आचरण करना चाहिए : स्वामी पंचानन्द
गीता के उच्चारण की अपेक्षा उसका आचरण करना चाहिए : स्वामी पंचानन्द
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
श्रीकामया पीठाध्यक्ष स्वामी पंचानन्द गिरि ने कहा कि गीता ही आदर्श जीवन का आधार है। गीता को जीवन में धारण करने से केवल समाज, बल्कि साधु का जीवन भी आदर्श जीवन मूल्यों की पराकाष्ठा छू सकता है। हमें गीता पर उच्चारण की अपेक्षा उस पर आचरण करना चाहिए। वह रविवार को मातृभूमि सेवा मिशन आश्रम में अंतरराष्ट्रीय श्रीमद्भगवद् गीता जयंती समारोह के अवसर पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में बोल रहे थे।
मानवीय जीवन मूल्यों के संदर्भ में श्रीमद्भगवद् गीता का दृष्टिकोण विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में कई विद्वानों ने अपना वक्तव्य रखा। मातृभूमि सेवा मिशन एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के संयुक्त संयोजन में विभिन्न राज्यों से आए 85 शोधार्थियों ने गीता पर शोध पत्र प्रस्तुत किए। स्वामी पंचानंद गिरि महाराज ने कहा कि गीता और रामायण भारत के ऐसे ग्रंथ हैं, जो विश्व को जीवन मूल्यों का संस्कार देने का कार्य करते हैं। मनुष्य तक गीता के मूल्य पहुंचाने का कार्य संत समाज का है। अमेरिका से आए रुद्र संचार पीठ के अध्यक्ष महामंडलेश्वर मार्तंड पुरी महाराज ने कहा कि धर्म उसी की रक्षा करता है जो व्यक्ति धर्म की रक्षा करता है। जब भी आप सत्य एवं न्याय के लिए नि:स्वार्थ भाव से ऊपर उठते हैं। गीता धर्म का पालन करने का संदेश देती है। विदेशों में गीता के प्रचार के निमित्त महामंडलेश्वर मार्तंड पुरी को ‘मातृभूमि गौरव सम्मान’ से नवाजा गया। अखंड शाश्वत गीता पीठ के अध्यक्ष महामंडलेश्वर शाश्वता नंद ने कहा कि मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है, जो एक दूसरे का सुख और दुख समझ सकता है। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय विनायक जोशी ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार प्रस्तुत करते हए कहा कि मानव जीवन की हर समस्या का समाधान गीता में निहित है।
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एडीजीपी डॉ. आरसी मिश्रा ने कहा कि जब तक हम गीता को अपनी जीवनशैली में नहीं धारेंगे, तब तक गीता के ज्ञान को प्राप्त नहीं कर सकते। गीता को एक शब्द में परिभाषित किया जाए तो वह है संचय। उन्होंने व्यक्तिगत जीवन मूल्यों से लेकर पारिवारिक, सामाजिक, धार्मिक एवं मानवीय जीवन मूल्यों पर प्रकाश डाला। इससे पूर्व केयू के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पा रानी ने कहा कि गीता जीवन का सार है। गीता में निहित मूल्य जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। मातृभूमि सेवा मिशन के संयोजक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि मातृभूमि सेवा मिशन गीता की अवधारणा को आत्मसात करता है। आज का मनुष्य गीता को अपने जीवन में धारण करे, यही प्रयास मिशन का है। इसके लिए मिशन 15 वर्षों से मंथन कर रहा है। इस अवसर पर संगोष्ठी की संयोजक डॉ. पुष्पा रानी, मिशन के संरक्षक गोपी चंद, डॉ. एसएम गुप्ता, डॉ. संगीता गुप्ता, स्वामी हरिनारायण गिरि, स्वामी सत्य प्रेम, स्वामी सत्यानंद मानवतावादी, स्वामी निर्मलानंद, एडवोकेट विवेक गोयल, पंडित जयपाल शास्त्री, श्रीब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के संरक्षक जयनारायण शर्मा, सोमनाथ कक्कड़, डॉ. ताराचंद शर्मा, जसबीर बाहरी, रामेश्वर चहल, लखविंद्र पाल सिंह ग्रेवाल, गुरनाम सिंह सैनी, बलजीत सैनी, सुभाष चौहान, शुभकरण कंबोज, डॉ. कप्तान, धर्मपाल सैनी, विजय सैनी, रामरत्न कटारिया, करनेल सिंह सरपंच, डॉ. ऐके मिश्रा, रामकुमार रबा आदि मौजूद थे।
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