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‘सरकार कर रही कोर्ट के आदेशों की अवहेलना’
Updated Wed, 08 Nov 2017 12:27 AM IST
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‘सरकार कर रही कोर्ट के आदेशों की अवहेलना’
अमर उजाला ब्यूरो
शाहाबाद।
अतिथि अध्यापकों का धरना मंगलवार को सातवें दिन भी जारी रहा। आज धरने और अनशन पर भीम सिंह, राजेश शर्मा, मुकेश कुमार, विनय धीमान और संजीव कुमार बैठे। हरियाणा अतिथि अध्यापक संघ के प्रदेश प्रवक्ता राजेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार अतिथि अध्यापकों को नियमित करने के अपने वादे से मुकर रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के प्रति भी दोहरा मापदंड अपना रही है।
उन्होंने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कच्चे कर्मचारी को भी नियमित कर्मचारी को समान वेतन देने का आदेश दिया है। लेकिन, प्रदेश सरकार इन आदेशों पर दोहरा मापदंड अपना रही है। सरकार कच्चे कर्मचारियों को इस लाभ से वंचित रखने के लिए कच्चे कर्मचारियों की भी श्रेणियां बना रही है। बताया कि सरकार के नुमाइंदों का यह कहना कि यदि कोई विभाग अपने कार्यक्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन देना चाहता है तो वह सरकार से इसकी सिफारिश कर सकता है, दर्शाता है कि सरकार कोर्ट का आदेश लागू ही नहीं करना चाहती। यदि सरकार की नीति और नियत साफ होती तो वह उच्चतम न्यायालय के निर्देश का लाभ सबको दे सकती है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रदेश सरकार अतिथि अध्यापकों की मांगें नहीं मान लेती, तब तक प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
शाहाबाद।
अतिथि अध्यापकों का धरना मंगलवार को सातवें दिन भी जारी रहा। आज धरने और अनशन पर भीम सिंह, राजेश शर्मा, मुकेश कुमार, विनय धीमान और संजीव कुमार बैठे। हरियाणा अतिथि अध्यापक संघ के प्रदेश प्रवक्ता राजेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार अतिथि अध्यापकों को नियमित करने के अपने वादे से मुकर रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के प्रति भी दोहरा मापदंड अपना रही है।
उन्होंने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कच्चे कर्मचारी को भी नियमित कर्मचारी को समान वेतन देने का आदेश दिया है। लेकिन, प्रदेश सरकार इन आदेशों पर दोहरा मापदंड अपना रही है। सरकार कच्चे कर्मचारियों को इस लाभ से वंचित रखने के लिए कच्चे कर्मचारियों की भी श्रेणियां बना रही है। बताया कि सरकार के नुमाइंदों का यह कहना कि यदि कोई विभाग अपने कार्यक्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन देना चाहता है तो वह सरकार से इसकी सिफारिश कर सकता है, दर्शाता है कि सरकार कोर्ट का आदेश लागू ही नहीं करना चाहती। यदि सरकार की नीति और नियत साफ होती तो वह उच्चतम न्यायालय के निर्देश का लाभ सबको दे सकती है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रदेश सरकार अतिथि अध्यापकों की मांगें नहीं मान लेती, तब तक प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे।
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