{"_id":"59e107d24f1c1bdb538b74ef","slug":"121507919826-kurukshetra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रद्धालुओं ने सुनी झूलेलाल अमरकथा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रद्धालुओं ने सुनी झूलेलाल अमरकथा
Updated Sat, 14 Oct 2017 12:11 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रद्धालुओं ने सुनी झूलेलाल अमरकथा
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गोशाला बाजार स्थित श्री झूलेलाल मंदिर में शुक्रवार को झूलेलाल अमरकथा सुनाई गई। पिछली कथा से आगे का वर्णन करते हुए व्यवस्थापक रामलाल ठाकुर ने कहा कि बादशाह मिरखशाह और दरबारियों के आदेश के बारे में सोचकर यूसुफ आहियो ने इसे अमल में लाना जरूरी समझा। उधर, रतनराय आहियो को बालक के पास छोड़कर उसके लिए जलपान का इंतजाम करने चले गए। मौका पाकर आहियो ने अपने रुमाल से एक गुलाब का फूल निकाला। उसमें ऐसा जहर भरा था, जिसे सूंघते ही बालक की मृत्यु हो सकती थी। वह जैसे ही फूल बालक के समीप लाया, वैसे ही बालक ने इस तरह लात मारी कि फूल वजीर के हाथ से छुटकर उसी के मुंह से जा टकराया और वह वहां मूर्छित होकर गिर पड़ा। मूर्छित अवस्था में उसने देखा कि जो बालक पालने में झूल रहा था वह एक जवान योद्धा बन गया और हाथ में तलवार लेकर उसकी ओर बढ़ रहा है। इसी तरह दूसरे दृश्य में उसने देखा कि दरिया की लहरों के ऊपर एक बुजुर्ग सफेद लंबी दाढ़ी वाला हीरों से जड़ा मुकुट सिर पर पहने सोने के सिंहासन पर बैठा है। वह उस जवान योद्धा को आशीर्वाद दे रहा है। झूलेलाल आरती में पंकज वर्मा, वेद भाटिया, संजय मुटरेजा, सुरेश कुमार, रवि, सन्नी, शंकर लाल ठाकुर, राजू, राजेंद्र अग्रवाल, पंकज भाटिया, वीरभान, ताराचंद पंडित, मंजू, भारती, सरला सहगल, शशि वर्मा, सोनिया मुटरेजा, पूजा, लवली और लाजवंती ग्रोवर ने भाग लिया।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गोशाला बाजार स्थित श्री झूलेलाल मंदिर में शुक्रवार को झूलेलाल अमरकथा सुनाई गई। पिछली कथा से आगे का वर्णन करते हुए व्यवस्थापक रामलाल ठाकुर ने कहा कि बादशाह मिरखशाह और दरबारियों के आदेश के बारे में सोचकर यूसुफ आहियो ने इसे अमल में लाना जरूरी समझा। उधर, रतनराय आहियो को बालक के पास छोड़कर उसके लिए जलपान का इंतजाम करने चले गए। मौका पाकर आहियो ने अपने रुमाल से एक गुलाब का फूल निकाला। उसमें ऐसा जहर भरा था, जिसे सूंघते ही बालक की मृत्यु हो सकती थी। वह जैसे ही फूल बालक के समीप लाया, वैसे ही बालक ने इस तरह लात मारी कि फूल वजीर के हाथ से छुटकर उसी के मुंह से जा टकराया और वह वहां मूर्छित होकर गिर पड़ा। मूर्छित अवस्था में उसने देखा कि जो बालक पालने में झूल रहा था वह एक जवान योद्धा बन गया और हाथ में तलवार लेकर उसकी ओर बढ़ रहा है। इसी तरह दूसरे दृश्य में उसने देखा कि दरिया की लहरों के ऊपर एक बुजुर्ग सफेद लंबी दाढ़ी वाला हीरों से जड़ा मुकुट सिर पर पहने सोने के सिंहासन पर बैठा है। वह उस जवान योद्धा को आशीर्वाद दे रहा है। झूलेलाल आरती में पंकज वर्मा, वेद भाटिया, संजय मुटरेजा, सुरेश कुमार, रवि, सन्नी, शंकर लाल ठाकुर, राजू, राजेंद्र अग्रवाल, पंकज भाटिया, वीरभान, ताराचंद पंडित, मंजू, भारती, सरला सहगल, शशि वर्मा, सोनिया मुटरेजा, पूजा, लवली और लाजवंती ग्रोवर ने भाग लिया।