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केयू से 19 छात्रों के निष्कासन का मामला
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र । विश्वविद्यालय परिसर में आंदोलन के दौरान हंगामा करने के आरोप में निष्कासित 19 विद्यार्थियों को अनुशासन समिति ने एक अवसर दिया है। समिति के मुताबिक यदि आरोपी विद्यार्थी यदि लिखित तौर पर विश्वविद्यालय प्रशासन से माफी मांगते हैं तो उनका निष्कासन रद्द किया जा सकता है। वहीं, निष्कासित विद्यार्थियों में माफी मांगने को लेकर सहमति नहीं बन सकी। जिसके बाद बुधवार को फिर से इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ बैठने का फैसला लिया गया है।
विश्वविद्यालय में प्रदर्शन करने के अपनी मांगों व अन्य मुद्दों को लेकर आंदोलन करने वाले 19 छात्रों को निष्कासित किए जाने का मामला गहराता जा रहा है। इससे छात्रों में खलबली मची हुई है तो वहीं केयू प्रशासन ने संयुक्त छात्र संर्घष समिति को दो टूक स्पष्ट कर दिया है कि छात्र लिखित में केयू प्रशासन से माफी मांगे तो इस निर्णय पर पुर्नविचार किया जा सकता है। इस पर छात्र एकमत नहीं हुए और निष्कासन रद्द करने पर अड़े रहे। दो दौर की वार्ता में भी सभी छात्र माफी मांगने पर सहमत नहीं हुए तो देर सायं रजिस्ट्रार को एक पत्र दिया, जिसमें निष्कासन रद्व किए जाने की मांग की।
छात्र संघर्ष समिति के संयोजक विनोद गिल के नेेतृत्व में सुबह ही छात्र-छात्राएं एकत्रित हुए और वे रजिस्ट्रार नीता खन्ना से मिले। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों व समस्याओं को लेकर पहले भी छात्र संगठन रोष जताते रहे है, जो प्रशासन को जगाने का ही प्रयास होता है। इस दौरान छात्रों ने ऐसी कोई भी हरकत नहीं की, जिससे उन्हें निष्कासित किया जाए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह कदम उठाकर अपना तानाशाही रवैया दिखाया है, जिससे छात्रों में रोष बना हुआ है तो वहीं अनेकों छात्रों में अपनी पढ़ाई व करियर खराब होने का भय बना हुआ है। केयू प्रशासन के इस कदम से कई छात्र तनाव में आ चुके है, जिसके चलते भय बना हुआ है कि कोई विद्यार्थी गलत कदम न उठा ले। इस पर रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया कि छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान हाथापाई की तो वहीं वीसी के पुतले की शवयात्रा निकाली तो वीसी के खिलाफ गलत भाषा का भी प्रयोग किया गया। इसके बावजूद संबंधित छात्र लिखित में शिकायत दें तो पुर्नविचार किया जा सकता है।
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इसके बाद छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने अन्य छात्रों के बीच यह बात रखी तो अधिकतर छात्रों ने ऐसे माफी मांगे जाने से इंकार दिया। छात्रों की दो दौर की वार्ता हुई, जिसमें बाद में निर्णय लिया गया कि प्रशासन से निष्कासन रद्व करने की मांग लिखित में दी जाएगी, जिसके बाद 27 मार्च को फिर प्रशासन से मिलेंगे। बाद में छात्रों ने लिखित में रजिस्ट्रार को पत्र दिया, जिसमें निष्कासन रद्व करने की मांग की, जिस पर रजिस्ट्रार ने प्रशासन से विचार करने का आश्वासन दिया।
छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास
एकत्रित हुए छात्रों ने रोष जताते हुए कहा कि केयू प्रशासन का यह छात्र संगठनों की आवाज दबाने का प्रयास है, लेकिन इससे छात्रों में रोष ओर भी गहराता जा रहा है। अपनी मांगों को लेकर छात्र हमेशा ही रोष जताते रहे है, लेकिन आज तक किसी भी वीसी व अन्य अधिकारी ने ऐसा कदम नहीं उठाया। केयू प्रशासन के इस रवैये से अन्य छात्रों में भी रोष बना हुआ है। यह उनके अधिकारों पर सीधा हमला है। प्रशासन छात्रों को दबाने का प्रयास कर रहा है। वहीं छात्रों ने कहा कि 27 मार्च को फिर रजिस्ट्रार से मुलाकात की जाएगी और केयू प्रशासन ने कोई साकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो वे फिर आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।
कुरुक्षेत्र । विश्वविद्यालय परिसर में आंदोलन के दौरान हंगामा करने के आरोप में निष्कासित 19 विद्यार्थियों को अनुशासन समिति ने एक अवसर दिया है। समिति के मुताबिक यदि आरोपी विद्यार्थी यदि लिखित तौर पर विश्वविद्यालय प्रशासन से माफी मांगते हैं तो उनका निष्कासन रद्द किया जा सकता है। वहीं, निष्कासित विद्यार्थियों में माफी मांगने को लेकर सहमति नहीं बन सकी। जिसके बाद बुधवार को फिर से इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ बैठने का फैसला लिया गया है।
विश्वविद्यालय में प्रदर्शन करने के अपनी मांगों व अन्य मुद्दों को लेकर आंदोलन करने वाले 19 छात्रों को निष्कासित किए जाने का मामला गहराता जा रहा है। इससे छात्रों में खलबली मची हुई है तो वहीं केयू प्रशासन ने संयुक्त छात्र संर्घष समिति को दो टूक स्पष्ट कर दिया है कि छात्र लिखित में केयू प्रशासन से माफी मांगे तो इस निर्णय पर पुर्नविचार किया जा सकता है। इस पर छात्र एकमत नहीं हुए और निष्कासन रद्द करने पर अड़े रहे। दो दौर की वार्ता में भी सभी छात्र माफी मांगने पर सहमत नहीं हुए तो देर सायं रजिस्ट्रार को एक पत्र दिया, जिसमें निष्कासन रद्व किए जाने की मांग की।
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छात्र संघर्ष समिति के संयोजक विनोद गिल के नेेतृत्व में सुबह ही छात्र-छात्राएं एकत्रित हुए और वे रजिस्ट्रार नीता खन्ना से मिले। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों व समस्याओं को लेकर पहले भी छात्र संगठन रोष जताते रहे है, जो प्रशासन को जगाने का ही प्रयास होता है। इस दौरान छात्रों ने ऐसी कोई भी हरकत नहीं की, जिससे उन्हें निष्कासित किया जाए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह कदम उठाकर अपना तानाशाही रवैया दिखाया है, जिससे छात्रों में रोष बना हुआ है तो वहीं अनेकों छात्रों में अपनी पढ़ाई व करियर खराब होने का भय बना हुआ है। केयू प्रशासन के इस कदम से कई छात्र तनाव में आ चुके है, जिसके चलते भय बना हुआ है कि कोई विद्यार्थी गलत कदम न उठा ले। इस पर रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया कि छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान हाथापाई की तो वहीं वीसी के पुतले की शवयात्रा निकाली तो वीसी के खिलाफ गलत भाषा का भी प्रयोग किया गया। इसके बावजूद संबंधित छात्र लिखित में शिकायत दें तो पुर्नविचार किया जा सकता है।
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इसके बाद छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने अन्य छात्रों के बीच यह बात रखी तो अधिकतर छात्रों ने ऐसे माफी मांगे जाने से इंकार दिया। छात्रों की दो दौर की वार्ता हुई, जिसमें बाद में निर्णय लिया गया कि प्रशासन से निष्कासन रद्व करने की मांग लिखित में दी जाएगी, जिसके बाद 27 मार्च को फिर प्रशासन से मिलेंगे। बाद में छात्रों ने लिखित में रजिस्ट्रार को पत्र दिया, जिसमें निष्कासन रद्व करने की मांग की, जिस पर रजिस्ट्रार ने प्रशासन से विचार करने का आश्वासन दिया।
छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास
एकत्रित हुए छात्रों ने रोष जताते हुए कहा कि केयू प्रशासन का यह छात्र संगठनों की आवाज दबाने का प्रयास है, लेकिन इससे छात्रों में रोष ओर भी गहराता जा रहा है। अपनी मांगों को लेकर छात्र हमेशा ही रोष जताते रहे है, लेकिन आज तक किसी भी वीसी व अन्य अधिकारी ने ऐसा कदम नहीं उठाया। केयू प्रशासन के इस रवैये से अन्य छात्रों में भी रोष बना हुआ है। यह उनके अधिकारों पर सीधा हमला है। प्रशासन छात्रों को दबाने का प्रयास कर रहा है। वहीं छात्रों ने कहा कि 27 मार्च को फिर रजिस्ट्रार से मुलाकात की जाएगी और केयू प्रशासन ने कोई साकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो वे फिर आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।