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न परीक्षा समय पर और न ही समय पर मिल रहे परिणाम
Updated Sat, 30 Dec 2017 12:02 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
निर्धारित समय पर न तो शैक्षिक सत्र पूरा हो रहा है और न ही विद्यार्थी समय पर परीक्षा दे पा रहे हैं। न ही उनके परीक्षा परिणाम ही समय पर मिल रहे हैं। ऐसे हालात का सामना विशेष रूप से बीएमएस (आयुर्वेद) में फाइनल की पढ़ाई कर रहे प्रदेश भर के हजारों विद्यार्थियों को करना पड़ रहा है। इसके चलते न केवल उनका एक वर्ष खराब होने का खतरा हर समय बना रहता है, बल्कि पोस्ट ग्रेजुएट में दाखिले से भी वंचित रहने का डर उन्हें हर समय सताता है। पिछले करीब तीन वर्षों से वे सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिकल और पीटी बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस, रोहतक में तालमेल न होने का खामियाजा भुगत रहे हैं।
इसमें प्रदेश के एकमात्र श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के भी करीब 250 विद्यार्थी शामिल है। वे अनेक बार इस सिस्टम पर सवाल उठा चुके हैं। साथ ही निर्धारित समय पर दाखिले से लेकर परीक्षा कराने और परिणाम जारी करने की मांग कर चुके है। इसके बावजूद सिस्टम सुधारता नहीं दिख रहा। इस वजह से विद्यार्थियों मेें रोष दिखाई देने लगा है। विद्यार्थी इस संबंध में कॉलेज प्रशासन से शिकायत भी कर चुके हैं। इस पर कॉलेज प्र्रबंधन यूनिवर्सिटी का मामला बताकर पल्ला झाड़ लेता है। यूनिवर्सिटी के अधिकारी इसका ठीकरा सीसीआईएम पर फोड़ रहे हैं। विद्यार्थियों की मानें तो लेट लतीफी बीएमएस प्रथम वर्ष के दाखिलों से ही शुरू हो जाती है। अंत में खामियाजा फाइनल ईयर के विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है। उनका मानना है कि फाइनल ईयर की परीक्षा शेड्यूल के अनुसार दिसंबर माह में होनी चाहिए थीं, लेकिन ये परीक्षाएं मार्च में ही हो पाती हैं। यहीं नहीं प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष की वार्षिक परीक्षा मई-जून मेें होती है। ये भी अगस्त-सितंबर माह में ली जा रही हैं। ऐसे में परीक्षा परिणाम समय पर नहीं मिल पाते। एक वर्ष इंटर्नशिप करने के बाद वे मई-जून माह में पीजी कक्षा के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा से वंचित रह जाते हैं।
दिसंबर में होनी थी परीक्षा, अभी तक डेट शीट भी नहीं आई
श्री कृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के बीएमएस फाइनल ईयर के छात्र नीतिश, प्रवीण वर्मा, नेहा सिंह, प्रिया सांगवान आदि का कहना है कि तय शेड्यूल अनुसार उनकी फाइनल परीक्षा दिसंबर में होनी थी, लेकिन इसकी अभी तक डेट शीट तक जारी नहीं हुई है। समय पर परीक्षा न होने के कारण उनकी इंटर्नशीप लेट होती है। इस वजह से पीजी कोर्स में दाखिले की प्रवेश परीक्षा के लिए वे समय पर आवेदन नहीं कर पाते। इस व्यवस्था में सुधार के लिए विद्यार्थियों ने कई बार कॉलेज प्रशासन को पत्र दिए हैं, लेकिन सुधार नहीं हो रहा।
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यह मामला यूनिवर्सिटी का है, वो ही जानें : प्रिंसिपल
कॉलेज प्राचार्य डॉ. उषा दत्त का कहना है कि परीक्षाएं समय पर न होने और परिणाम में देरी को लेकर विद्यार्थियों ने उन्हें कई बार पत्र दिए हैं, लेकिन यह मामला यूनिवर्सिटी का है। वहीं के अधिकारी इसके बारे में जानते हैं।
सत्र पूरा होने पर ही करवाई जाती है परीक्षा : डॉ संजय
पीटी बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस, रोहतक के परीक्षा नियंत्रक डॉ. संजय का कहना है कि दाखिलों का शेड्यूल सीसीआईएम जारी करती है। उसकी ओर से दाखिले के समय अंतिम तिथि बढ़ाई जाती रहती है। इसके चलते सत्र करीब दो माह तक लेट चला जाता है। सत्र और सिलेबस पूरा होगा तो परीक्षाएं ली जाएंगी। यूनिवर्सिटी इसी अनुसार परीक्षाएं लेती है। कुछ दिनों बाद ही परिणाम भी जारी कर दिए जाते हैं। परीक्षा और परिणाम में यूनिवर्सिटी देर नहीं करती।
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कुरुक्षेत्र।
निर्धारित समय पर न तो शैक्षिक सत्र पूरा हो रहा है और न ही विद्यार्थी समय पर परीक्षा दे पा रहे हैं। न ही उनके परीक्षा परिणाम ही समय पर मिल रहे हैं। ऐसे हालात का सामना विशेष रूप से बीएमएस (आयुर्वेद) में फाइनल की पढ़ाई कर रहे प्रदेश भर के हजारों विद्यार्थियों को करना पड़ रहा है। इसके चलते न केवल उनका एक वर्ष खराब होने का खतरा हर समय बना रहता है, बल्कि पोस्ट ग्रेजुएट में दाखिले से भी वंचित रहने का डर उन्हें हर समय सताता है। पिछले करीब तीन वर्षों से वे सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिकल और पीटी बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस, रोहतक में तालमेल न होने का खामियाजा भुगत रहे हैं।
इसमें प्रदेश के एकमात्र श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के भी करीब 250 विद्यार्थी शामिल है। वे अनेक बार इस सिस्टम पर सवाल उठा चुके हैं। साथ ही निर्धारित समय पर दाखिले से लेकर परीक्षा कराने और परिणाम जारी करने की मांग कर चुके है। इसके बावजूद सिस्टम सुधारता नहीं दिख रहा। इस वजह से विद्यार्थियों मेें रोष दिखाई देने लगा है। विद्यार्थी इस संबंध में कॉलेज प्रशासन से शिकायत भी कर चुके हैं। इस पर कॉलेज प्र्रबंधन यूनिवर्सिटी का मामला बताकर पल्ला झाड़ लेता है। यूनिवर्सिटी के अधिकारी इसका ठीकरा सीसीआईएम पर फोड़ रहे हैं। विद्यार्थियों की मानें तो लेट लतीफी बीएमएस प्रथम वर्ष के दाखिलों से ही शुरू हो जाती है। अंत में खामियाजा फाइनल ईयर के विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है। उनका मानना है कि फाइनल ईयर की परीक्षा शेड्यूल के अनुसार दिसंबर माह में होनी चाहिए थीं, लेकिन ये परीक्षाएं मार्च में ही हो पाती हैं। यहीं नहीं प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष की वार्षिक परीक्षा मई-जून मेें होती है। ये भी अगस्त-सितंबर माह में ली जा रही हैं। ऐसे में परीक्षा परिणाम समय पर नहीं मिल पाते। एक वर्ष इंटर्नशिप करने के बाद वे मई-जून माह में पीजी कक्षा के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा से वंचित रह जाते हैं।
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दिसंबर में होनी थी परीक्षा, अभी तक डेट शीट भी नहीं आई
श्री कृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के बीएमएस फाइनल ईयर के छात्र नीतिश, प्रवीण वर्मा, नेहा सिंह, प्रिया सांगवान आदि का कहना है कि तय शेड्यूल अनुसार उनकी फाइनल परीक्षा दिसंबर में होनी थी, लेकिन इसकी अभी तक डेट शीट तक जारी नहीं हुई है। समय पर परीक्षा न होने के कारण उनकी इंटर्नशीप लेट होती है। इस वजह से पीजी कोर्स में दाखिले की प्रवेश परीक्षा के लिए वे समय पर आवेदन नहीं कर पाते। इस व्यवस्था में सुधार के लिए विद्यार्थियों ने कई बार कॉलेज प्रशासन को पत्र दिए हैं, लेकिन सुधार नहीं हो रहा।
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यह मामला यूनिवर्सिटी का है, वो ही जानें : प्रिंसिपल
कॉलेज प्राचार्य डॉ. उषा दत्त का कहना है कि परीक्षाएं समय पर न होने और परिणाम में देरी को लेकर विद्यार्थियों ने उन्हें कई बार पत्र दिए हैं, लेकिन यह मामला यूनिवर्सिटी का है। वहीं के अधिकारी इसके बारे में जानते हैं।
सत्र पूरा होने पर ही करवाई जाती है परीक्षा : डॉ संजय
पीटी बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस, रोहतक के परीक्षा नियंत्रक डॉ. संजय का कहना है कि दाखिलों का शेड्यूल सीसीआईएम जारी करती है। उसकी ओर से दाखिले के समय अंतिम तिथि बढ़ाई जाती रहती है। इसके चलते सत्र करीब दो माह तक लेट चला जाता है। सत्र और सिलेबस पूरा होगा तो परीक्षाएं ली जाएंगी। यूनिवर्सिटी इसी अनुसार परीक्षाएं लेती है। कुछ दिनों बाद ही परिणाम भी जारी कर दिए जाते हैं। परीक्षा और परिणाम में यूनिवर्सिटी देर नहीं करती।