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डेरा प्रमुख से कार का झूठा सौदा
Updated Tue, 29 Aug 2017 11:04 PM IST
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नहीं पहुंचा डेरे को मर्सडीज बेचने वाला
-डेरे के भंगीदास जोगिंद्र सिंह के पास थी कार की चाबी, पुलिस ने ली कब्जे में
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
पुलिस को उम्मीद थी कि डेरा को मर्सडीज कार बेचने वाला व्यक्ति कुरुक्षेत्र पुलिस के सवालों का उत्तर देगा, लेकिन उनकी जगह कोई और व्यक्ति गाड़ी के कागजात लेकर झांसा थाना पुलिस को मिला।
बता दें कि गांव धुराला के डेरा सच्चा सौदा के नामचर्चा घर से सर्च अभियान के दौरान पुलिस को बेशकीमती लग्जरी कार खड़ी मिली थी। टू सीटर इस मर्सडीज कार पर चंडीगढ़ का अस्थायी नंबर लगा हुआ था। पुलिस ने जब इस नंबर का रिकार्ड चंडीगढ़ के मर्सडीज शोरूम से पता कराया तो जानकारी मिली कि उक्त गाड़ी चंडीगढ़ सेक्टर-22 वासी सीतारानी पत्नी राममूर्ति के नाम पर है। वह इस समय पंजाब के मोहाली में रह रहे हैं। बताया गया है कि राममूर्ति की मोहाली में काफी एग्रीकल्चर लैंड है। पुलिस ने सोमवार को राममूर्ति को कुरुक्षेत्र में तलब किया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे। लेकिन उन्होंने जिस व्यक्ति को सोमवार कुरुक्षेत्र पुलिस के पास भेजा है, उस व्यक्ति ने बताया है कि गाड़ी को खरीदने के एक माह बाद ही उन्होंने आधे रेट पर यह कार डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बेची थी। उसका रजिस्ट्रेशन चंडीगढ़ में दिसंबर 2012 में हुई थी, जबकि उक्त कार की आरसी डेरा सच्चा सौदा सिरसा के नाम पर 2013 में जारी की गई। पुलिस के एक अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक जो जानकारी पुलिस को दी गई है,उसमें साफ हो रहा है कि इस डील में जो बातें बताई जा रही है वे झूठ हैं। इस बड़ा फर्जीवाड़ा यह भी है कि 2013 में डेरे के नाम उक्त मर्सडीज कार की आरसी और चंडीगढ़ का नंबर सीएच 01 एएच-3783 को जारी किये जाने के बावजूद उक्त बेशकीमती गाड़ी पिछले छह साल से डेरा सच्चा सौदा फर्जी नंबर से दौड़ा रहा था। इस कार की चाबी डेरे के 45 सदस्यीय कमेटी के सदस्य भंगीदास जोगिंद्र सिंह के पास थी। उसे पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। बहरहाल उक्त कार डेरा सील होने के बाद से नामचर्चा घर में ही खड़ी की गई है। झांसा थाना के प्रभारी रामपाल के मुताबिक डेरा प्रमुख पर सजा के फैसले के चलते पुलिस व्यस्त थी। अब हालात सामान्य होने के बाद जल्द ही इस कार मामले की जांच के बाद सस्पेंस खत्म होगा कि यह कार छह साल में अब तक सिर्फ 600 किलोमीटर और टेंपरी नंबर से कैसे और कहां कहां चलाई गई?
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नहीं पहुंचा डेरे को मर्सडीज बेचने वाला
-डेरे के भंगीदास जोगिंद्र सिंह के पास थी कार की चाबी, पुलिस ने ली कब्जे में
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
पुलिस को उम्मीद थी कि डेरा को मर्सडीज कार बेचने वाला व्यक्ति कुरुक्षेत्र पुलिस के सवालों का उत्तर देगा, लेकिन उनकी जगह कोई और व्यक्ति गाड़ी के कागजात लेकर झांसा थाना पुलिस को मिला।
बता दें कि गांव धुराला के डेरा सच्चा सौदा के नामचर्चा घर से सर्च अभियान के दौरान पुलिस को बेशकीमती लग्जरी कार खड़ी मिली थी। टू सीटर इस मर्सडीज कार पर चंडीगढ़ का अस्थायी नंबर लगा हुआ था। पुलिस ने जब इस नंबर का रिकार्ड चंडीगढ़ के मर्सडीज शोरूम से पता कराया तो जानकारी मिली कि उक्त गाड़ी चंडीगढ़ सेक्टर-22 वासी सीतारानी पत्नी राममूर्ति के नाम पर है। वह इस समय पंजाब के मोहाली में रह रहे हैं। बताया गया है कि राममूर्ति की मोहाली में काफी एग्रीकल्चर लैंड है। पुलिस ने सोमवार को राममूर्ति को कुरुक्षेत्र में तलब किया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे। लेकिन उन्होंने जिस व्यक्ति को सोमवार कुरुक्षेत्र पुलिस के पास भेजा है, उस व्यक्ति ने बताया है कि गाड़ी को खरीदने के एक माह बाद ही उन्होंने आधे रेट पर यह कार डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बेची थी। उसका रजिस्ट्रेशन चंडीगढ़ में दिसंबर 2012 में हुई थी, जबकि उक्त कार की आरसी डेरा सच्चा सौदा सिरसा के नाम पर 2013 में जारी की गई। पुलिस के एक अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक जो जानकारी पुलिस को दी गई है,उसमें साफ हो रहा है कि इस डील में जो बातें बताई जा रही है वे झूठ हैं। इस बड़ा फर्जीवाड़ा यह भी है कि 2013 में डेरे के नाम उक्त मर्सडीज कार की आरसी और चंडीगढ़ का नंबर सीएच 01 एएच-3783 को जारी किये जाने के बावजूद उक्त बेशकीमती गाड़ी पिछले छह साल से डेरा सच्चा सौदा फर्जी नंबर से दौड़ा रहा था। इस कार की चाबी डेरे के 45 सदस्यीय कमेटी के सदस्य भंगीदास जोगिंद्र सिंह के पास थी। उसे पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। बहरहाल उक्त कार डेरा सील होने के बाद से नामचर्चा घर में ही खड़ी की गई है। झांसा थाना के प्रभारी रामपाल के मुताबिक डेरा प्रमुख पर सजा के फैसले के चलते पुलिस व्यस्त थी। अब हालात सामान्य होने के बाद जल्द ही इस कार मामले की जांच के बाद सस्पेंस खत्म होगा कि यह कार छह साल में अब तक सिर्फ 600 किलोमीटर और टेंपरी नंबर से कैसे और कहां कहां चलाई गई?
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