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बादल जमकर गरजे भी और बरसे भी,मगर एसवाईएल खाली की खाली रह गई...

Mon, 20 Aug 2018 12:40 AM IST
Updated Mon, 20 Aug 2018 12:40 AM IST
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बादल जमकर गरजे भी और बरसे भी,मगर एसवाईएल खाली की खाली रह गई...
बादल जमकर गरजे और बरसे, मगर एसवाईएल खाली की खाली रह गई...
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- भीड़ और भाषण जबरदस्त ,मगर हरियाणा का ज्वलंत मुद्दा रहा नदारद
- बादल बोले, आपां इलेक्शन लड़ांगे, लड़ांगे, लड़ांगे, नाले जित्तांगे, जित्तांगे, जित्तांगे
- मैं हरियाणा दी तकदीर बदल सकदां, ये शायराना अंदाज में बोल गए बादल
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र। पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल रविवार को पिपली अनाजमंडी में आयोजित जन चेतना रैली में धुर विरोधी कांग्रेस सहित सत्तासीन और सहयोगी भाजपा पर भी जमकर बरसे। मगर हरियाणा की सबसे बड़ी जरूरत एसवाईएल का मुद्दा उनके भाषणों से नदारद रहा। रैली में उम्मीद से ज्यादा भीड़ देखकर उत्साहित बादल बोले- एह इलेक्शन अप्पा लड़ांगे, लड़ांगे, लड़ांगे। नाले जित्तांगे, जित्तांगे, जित्तांगे। उनका इशारा 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव की ओर था।
सुखबीर ने हरियाणा के मुकाबले, अपने पिता के 25 साल के शासनकाल में किए कार्यों का कई बार उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंजाब में उनके शासनकाल में 6 एयरपोर्ट बने, जबकि हरियाणा में आज तक एक भी एयरपोर्ट नहीं बन सका। भाषण देते समय वे भूल गए कि चार दिन पहले ही हिसार में नए एयरपोर्ट का उद्घाटन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर किया था। उन्होंने हरियाणा में विकास और किसानों के मुद्दों को तो छुआ, मगर पूरे भाषण में एसवाईएल से साफ कन्नी काट गए। हालांकि एसवाईएल में पानी लाने का मुद्दा हरियाणा के हर राजनैतिक दल द्वारा भुनाने की परंपरा दशकों पुरानी है। शायराना अंदाज में बादल ने रैली के अंत में कहा- मैं रुख हवा दा बदल सकदां हां, थोड्डे करके नंगी तलवारा चल सकदां हां, जे कर मेरे सिर ते हथ होवे त्वाडा, ते मैं हरियाणा दी तकदीर बदल सकदां हां।
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ऐलान, हकीकत, हिस्सेदारी
साफ है कि पंजाब की सत्ता से बाहर हुई शिअद अब हरियाणा में अपनी राजनैतिक जमीन तलाश रही है। हरियाणा में सिख कार्ड खेलकर शिरोमणि आकाली दल (बादल) प्रदेश के सिखों को एक झंडे के नीचे लाने का यत्न करेगी, ताकि हरियाणा की सत्ता में भी हिस्सेदारी कायम हो सके। बहरहाल शिअद के अध्यक्ष बादल ने हरियाणा की सभी 90 विधानसभा सीटों तथा 10 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। चर्चा यह भी है कि समय आने पर वह इनेलो या भाजपा के साथ लोकसभा की कुरुक्षेत्र और सिरसा सीट मांग सकती है, जबकि विधानसभा चुनाव में 25 सीटों की डिमांड भी कर सकती है। कुरुक्षेत्र में रैली में दमखम दिखाना इसी राणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
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हरियाणा के इन मुद्दों पर बादल की खामोशी
पंजाब से हरियाणा का हक दिलाने के लिऐ एसवाईएल में पानी के मुद्दे पर ही नहीं, बल्कि हरियाणा की अलग राजधानी, हिंदी भाषी इलाकों का स्थानांतरण जैसे हरियाणा के हितों से जुड़े मुद्दों पर सुखबीर सिंह बादल की खामोशी रही, जो इस बात का प्रमाण है कि अकेले सिखों को लामबंद करके प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के इरादा अभी दूर की कौड़ी है।


जमीन यहां, पिता यहां, तो हम भी हरियाणवी
सुखबीर सिंह बादल के पूरे भाषण में मुख्य फोकस सिख कौम और पिता प्रकाश सिंह बादल पर ही रहा। इस बीच वह यह बड़ी सफाई से यह भी बता गए कि वो भी एक तरह से हरियाणवी हैं। क्योंकि उनके परिवार की जमीन सिरसा के गांव बालसर में है और उनके पिता प्रकाश सिंह बादल का अधिकांश समय अब सिरसा जिले में स्थित बादल फार्म पर बीतता है।
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