फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   स्वच्छता अभियान का सच

स्वच्छता अभियान का सच

Sat, 12 May 2018 12:48 AM IST
Updated Sat, 12 May 2018 12:48 AM IST
विज्ञापन
स्वच्छता अभियान का सच

विज्ञापन
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र।
सरकारी आंकड़ों पर अगर यकीन करें तो शहर में 200 टन से ज्यादा कचरा बिखरा पड़ा है। चौतरफा दुर्गंध का आलम है। चुने हुये नुमाइंदे और दिव्य कुरुक्षेत्र मिशन जैसे अभियान चलाकर स्वच्छता की हुंकार भरने वाले सेवकों के पास बोलते कुछ नहीं बन रहा। बता दें कि दिव्य कुरुक्षेत्र मिशन के तहत जिन सेवकों ने धर्मनगरी को स्वच्छ और चकाचक बनाने का संकल्प लिया था, उनमें कई सत्ता का मीठा पान चबाकर अहम पदों पर विराजमान होकर लक्ष्य को भूल चुके हैं।
धर्मनगरी को स्वच्छ और सुंदर बनाने के जिस उद्देश्य से कुरुक्षेत्र दिव्य मिशन को हाई प्रोफाइल अंदाज में 18 अप्रैल 2016 को शुरू किया गया था, वो आज ठंडे बस्ते में है। बहरहाल पिछले तीन दिन से सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच दिव्य कुरुक्षेत्र सड़ रहा है और स्वच्छता के ब्रांड एंबेसडर सत्ता सुख में लीन है। बता दें कि थानेसर नगर परिषद की सफाई व्यवस्था संभालने वाले अधिकारियों की माने तो कुरुक्षेत्र में रोजाना करीब 70 टन कचरा निकलता है। इस कचरे की सफाई और उठान का जिम्मा नगर परिषद के कंधों पर है, मगर 9 मई से शुरू हुई सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण यह कचरा गली, कॉलोनियों और बाजारों की सड़कों पर बिखरा पड़ा है। चौतरफा दुर्गंध का आलम है। ये हालात तब है जब धर्मनगरी को दिव्य कुरुक्षेत्र मिशन के तहत देश में आदर्श शहर के रुप में स्वच्छ और सुंदर बनाने की मुहिम मौजूदा सरकार के कार्यकाल में अप्रैल 2016 को शुरू हुई थी। तब इस अभियान की शुरुआत करने के लिये राजनीति, धार्मिक और अलग-अलग क्षेत्रों के कई बड़े चेहरे सामने आये थे, जो दावे उस रोज किये गये थे, वे आज शहर के चप्पे-चप्पे पर बिखरे पड़े कचरे के नीचे दबे पड़े हैं।
विज्ञापन

विपक्षी दलों के नेता और स्थानीय लोग अब इस अभियान पर चुटकी ले रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव पवन गर्ग का कहना है कि ये अभियान जनता के लिये नहीं, बल्कि इस अभियान से जुड़े कुछ चेहरों के उत्थान के लिये था, क्योंकि इन्हें ऐसे अभियान चलाकर अपने हित साधने के लिये सत्ता पक्ष से कुछ हासिल करना था। यही कारण है कि इस अभियान से जुड़े कुछ चेहरे बाद में या तो सरकारी पदों पर आसीन हो गये या कुछ औने पौने दाम में सरकारी जमीने हथियाने में सफल हुये। इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने कहा कि जो हालात शहर में उसे देखकर जनता ठगी की ठगी हुई महसूस कर रही है। बहरहाल सरकार और सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच गंदगी से जूझने का संकट जनता झेल रही है। यहां बता दें कि दिव्य कुरुक्षेत्र मिशन की कार्यकारिणी के 10 सदस्यों में से अधिकांश सरकार की कृपा से कोई न कोई सरकारी पद हासिल कर चुके हैं। अब इसके बाद दिव्य मिशन क्या करे? इसका जवाब देते किसी के पास नहीं बन रहा है। हालांकि वर्तमान में सरकारी पद पर विराजमान दिव्य कुरुक्षेत्र मिशन के पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर यह जरूर कहा कि संगठन ने 18 अप्रैल 2016 के बाद 2017 अगस्त में एक बड़ा कार्यक्रम तैयार किया था, लेकिन डेरा विवाद के चलते वो कार्यक्रम टल गया।
विज्ञापन
विज्ञापन



10 हजार विद्यार्थी और ये बड़े चेहरे पहुंचे थे अभियान शुरू कराने
18 अप्रैल 2016 को जोरशोर से शुरू किये गये दिव्य मिशन अभियान में स्वामी ज्ञानानंद महाराज, स्वामी धर्मदेव महाराज, थानेसर के विधायक सुभाष सुधा और लाडवा के विधायक पवन सैनी, सीएम के ओएसडी डा. योगेंद्र मलिक, केयू के रजिस्ट्रार डा. प्रवीण सैनी सहित जिला प्रशासन के लगभग तमाम अधिकारी एवं करीब 10 हजार विद्यार्थी जुड़े। अभियान का हिस्सा बने, वहीं इस मौके पर हिमाचल के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने भी विशेष रुप से शिरकत की थी।


ये था उद्देश्य
अभियान के दौरान दावा किया गया था कि पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए शहर को स्वच्छ रखना बेहद जरुरी है। धर्मनगरी को स्वच्छ बनाने के लिए अब शहर में हर महीने की 26 तारीख को ये अभियान चलाया जाएगा, जिसका मुख्य मकसद धर्मनगरी को स्वच्छता के मामले में एक आदर्श शहर बनाना है।


दो साल में नहीं चल सका हर माह की 26 तारीख को स्वच्छता अभियान
दिव्य कुरुक्षेत्र मिशन के अध्यक्ष डा. कृष्ण गोपाल ने माना कि अभी गतिविधियां ठंडे बस्ते में है, पिछले दो वर्षों में हर माह की 26 तारीख को जो अभियान चलाया जाना था वह नहीं चल सका। उन्होंने माना कि सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते शहर के जो हालात बने हुये है, उसमें दिव्य कुरुक्षेत्र मिशन अहम रोल अदा कर सकता था। वे जल्द दिव्य मिशन की बैठक बुलाएंगे।


कहां है स्वच्छता की मुहिम चलाने वाले
ज्योतिषाचार्य नारायण भारद्वाज का कहना है कि शहर में गंदगी के अंबार लगे हैं और झाडू़ उठाकर स्वच्छता की मुहिम चलाने वाले संगठन और नेता इन हालात में सुधार करने में नाकाम है।


दुकान के सामने लगे हैं गंदगी के ढेर
सुनीता वालिया के मुताबिक बाजार में उनकी आटा चक्की है, उनकी चक्की के ठीक सामने गंदगी कचरे के अंबार लगे हैं। इसकी वजह से कामकाज प्रभावित हो रहा है और यहां बैठना उनके लिये भी मुहाल हो गया।


जनता की सिर्फ वोट चाहते हैं नेता
दुकानदार काका जिंदगी के मुताबिक नेता वोट आते हैं और उसके बाद उनका नागरिकों की सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं होता। उन्होंने कहा कि नेता सिर्फ झाडू़ खिचवा कर फोटो खिंचवाकर स्वच्छता का संदेश देते हैं, जबकि हकीकत सड़कों पर दिख रही है।



हड़ताल से पहले भी करते रहे हैं स्वच्छता एप पर शिकायतें
डा. पवन वशिष्ट के मुताबिक थानेसर नगर परिषद ने जो स्वच्छता एप बनाया है, उस पर हड़ताल से पहले भी कई बार शिकायतें भेज चुके हैं, लेकिन कचरे गंदगी और सफाई की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed