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वक्फ बोर्ड के खिलाफ रोष प्रदर्शन, 15 मिनट सड़क पर डटे रहे प्रदर्शनकारी
Updated Sun, 22 Apr 2018 01:04 AM IST
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वक्फ बोर्ड के खिलाफ प्रदर्शन, तहसीलदार ज्ञापन लेने नहीं आए तो 15 मिनट सड़क जाम
अमर उजाला ब्यूरो
शाहाबाद। कस्बे के सैकड़ों वक्फ बोर्ड के किराएदारों ने बाजारों में रोष प्रदर्शन करते हुए बोर्ड का पुतला फूंका और तहसीलदार के माध्यम से सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। तहसील कार्यालय के सामने जब तहसीलदार ज्ञापन लेने के लिए नहीं पहुंचे तो रोष स्वरूप प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर दी। करीब 15 मिनट तक सड़क को जाम रखा तब नायब तहसीलदार मौके पर आकर ज्ञापन लिया। प्रदर्शनकारी देवी मंदिर में इकट्ठा हुए और वक्फ बोर्ड के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विभिन्न बाजारों से गुजरे और शाहाबाद बस स्टैंड के नजदीक जाकर वक्फ बोर्ड का पुतला फूंका। यहां से तहसील पहुंचकर सीएम के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन करने वालों का नेतृत्व कर रहे प्रधान कुलवंत सिंह, नपा उपप्रधान डा. गुलशन क्वात्रा, हरभजन सिंह सेठी, दीपक आनंद, आशु बंसल, बिट्टू शर्मा, शुभम साहनी, राजन शर्मा, सतपाल बुद्धिराजा, पप्पू, कुलदीप सिंह, गुलशन, आशु अरोड़ा, महेश भगत ने ज्ञापन में मांग की कि वक्फ बोर्ड का काला कानून वापस लिया जाए। नगर पालिका के बनाए नए कानून की तरह मालिकाना हक दिया जाए। वक्फ बोर्ड द्वारा किए जा रहे जुल्मों पर रोक लगाई जाए, ताकि इन घरों में रहने वाले लोग सुरक्षित रह सकें। व्यापारी वर्ग को भी वक्फ बोर्ड से निजात दिलाई जाए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वक्फ बोर्ड की मनमर्जी की नीतियों के कारण आज बेकसूर और गरीब जनता को अपने ही मकानों में किरायदार के तौर पर रहना पड़ रहा है और उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है। वक्फ बोर्ड द्वारा अपने ही मकानों में रह रहे लोगों को बाहर निकाला जा रहा है। अब इस नीति को बर्दाश्त न करके डटकर विरोध किया जाएगा। सभी ने कहा कि वक्फ बोर्ड को ही खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि जनता 50-50 साल से ज्यादा समय से मकानों के किराए दे रही है। ऐसे में अब वक्फ बोर्ड का कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। आजादी के बाद लोगों ने पाकिस्तान से यहां पहुंचकर व्यवसाय शुरू किया और मकान बनाकर जीवन यापन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह जमीनें भारत सरकार की हैं । 1954 से वजूद में आया वक्फ बोर्ड इन जमीनों पर अपना हक जताने लगा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013-14 में शुरू किए गए काले कानून को भी रद्द किया जाए।
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अमर उजाला ब्यूरो
शाहाबाद। कस्बे के सैकड़ों वक्फ बोर्ड के किराएदारों ने बाजारों में रोष प्रदर्शन करते हुए बोर्ड का पुतला फूंका और तहसीलदार के माध्यम से सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। तहसील कार्यालय के सामने जब तहसीलदार ज्ञापन लेने के लिए नहीं पहुंचे तो रोष स्वरूप प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर दी। करीब 15 मिनट तक सड़क को जाम रखा तब नायब तहसीलदार मौके पर आकर ज्ञापन लिया। प्रदर्शनकारी देवी मंदिर में इकट्ठा हुए और वक्फ बोर्ड के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विभिन्न बाजारों से गुजरे और शाहाबाद बस स्टैंड के नजदीक जाकर वक्फ बोर्ड का पुतला फूंका। यहां से तहसील पहुंचकर सीएम के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन करने वालों का नेतृत्व कर रहे प्रधान कुलवंत सिंह, नपा उपप्रधान डा. गुलशन क्वात्रा, हरभजन सिंह सेठी, दीपक आनंद, आशु बंसल, बिट्टू शर्मा, शुभम साहनी, राजन शर्मा, सतपाल बुद्धिराजा, पप्पू, कुलदीप सिंह, गुलशन, आशु अरोड़ा, महेश भगत ने ज्ञापन में मांग की कि वक्फ बोर्ड का काला कानून वापस लिया जाए। नगर पालिका के बनाए नए कानून की तरह मालिकाना हक दिया जाए। वक्फ बोर्ड द्वारा किए जा रहे जुल्मों पर रोक लगाई जाए, ताकि इन घरों में रहने वाले लोग सुरक्षित रह सकें। व्यापारी वर्ग को भी वक्फ बोर्ड से निजात दिलाई जाए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वक्फ बोर्ड की मनमर्जी की नीतियों के कारण आज बेकसूर और गरीब जनता को अपने ही मकानों में किरायदार के तौर पर रहना पड़ रहा है और उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है। वक्फ बोर्ड द्वारा अपने ही मकानों में रह रहे लोगों को बाहर निकाला जा रहा है। अब इस नीति को बर्दाश्त न करके डटकर विरोध किया जाएगा। सभी ने कहा कि वक्फ बोर्ड को ही खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि जनता 50-50 साल से ज्यादा समय से मकानों के किराए दे रही है। ऐसे में अब वक्फ बोर्ड का कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। आजादी के बाद लोगों ने पाकिस्तान से यहां पहुंचकर व्यवसाय शुरू किया और मकान बनाकर जीवन यापन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह जमीनें भारत सरकार की हैं । 1954 से वजूद में आया वक्फ बोर्ड इन जमीनों पर अपना हक जताने लगा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013-14 में शुरू किए गए काले कानून को भी रद्द किया जाए।
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