{"_id":"5a0ddcaf4f1c1bc1678bbf35","slug":"111510857903-kurukshetra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सच की राह पर चलना कठिन कार्यभ: शास्त्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सच की राह पर चलना कठिन कार्यभ: शास्त्री
Updated Fri, 17 Nov 2017 12:15 AM IST
विज्ञापन
सच की राह पर चलना कठिन कार्य : शास्त्री
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। गाय -गीता-गायत्री सत्संग सेवा समिति द्वारा पिपली के श्रीराम मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन भागवताचार्य पंडित अनिल शास्त्री ने भक्त ध्रुव और प्रह्लाद की तपस्या, नृपसिंह, मत्स्य अवतार और गजेंद्र मोक्ष की कथा सुनाई। प्रसंगों में उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में लोगों में परस्पर ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध और एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी रहती है। याद रखों, ईर्ष्यालु व्यक्ति अपने जीवन में कभी तरक्की नहीं कर सकता। झूठा आदमी सच से बहुत घबराता है कि कहीं उसकी पोल न खुल जाए। सच की राह पर चलना कठिन कार्य है और झूठ कुछ समय के लिए होता है। सच हमेशा मौजूद रहता और इसे आज तक कोई नहीं छिपा सका। संतों ने कहा कि सच के बराबर कोई दूसरा तप नहीं है। सच्चाई कभी नहीं मरती, बल्कि किसी न किसी रूप में स्वयं ही प्रकट हो जाती है। इसलिए व्यक्ति को सदैव सच बोलना चाहिए। कथा के बीच-बीच में सुनाए गए भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। गाय -गीता-गायत्री सत्संग सेवा समिति द्वारा पिपली के श्रीराम मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन भागवताचार्य पंडित अनिल शास्त्री ने भक्त ध्रुव और प्रह्लाद की तपस्या, नृपसिंह, मत्स्य अवतार और गजेंद्र मोक्ष की कथा सुनाई। प्रसंगों में उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में लोगों में परस्पर ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध और एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी रहती है। याद रखों, ईर्ष्यालु व्यक्ति अपने जीवन में कभी तरक्की नहीं कर सकता। झूठा आदमी सच से बहुत घबराता है कि कहीं उसकी पोल न खुल जाए। सच की राह पर चलना कठिन कार्य है और झूठ कुछ समय के लिए होता है। सच हमेशा मौजूद रहता और इसे आज तक कोई नहीं छिपा सका। संतों ने कहा कि सच के बराबर कोई दूसरा तप नहीं है। सच्चाई कभी नहीं मरती, बल्कि किसी न किसी रूप में स्वयं ही प्रकट हो जाती है। इसलिए व्यक्ति को सदैव सच बोलना चाहिए। कथा के बीच-बीच में सुनाए गए भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे।