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शोध होता है लम्बी अवधि तक किया जाने वाला अनुसंधान: प्रो. राजबीर
Updated Tue, 13 Jun 2017 11:55 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। एमडी विश्वविद्यालय रोहतक के मनोविज्ञान विभाग के पूर्व प्रोफेसर एवं अध्यक्ष प्रो. राजबीर सिंह हुड्डा ने कहा कि शोध किसी एक विषय या विषयों पर लंबी अवधि तक किया जाने वाला अनुसंधान होता है। जिसके आधार पर उस विषय के संदर्भ में अधिक विश्वसनीय निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। वे मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में चल रहे आईसीएसएसआर क्षमता संवर्धन कार्यक्रम के 8वें दिन बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।
प्रो. राजबीर सिंह हुड्डा ने बताया कि प्रोफेसर वार्नर नाम के एक मनोवैज्ञानिक ने अमेरिका में एक ऐसा ही शोध गरीब व स्लम बस्ती में रहने वाले लोगों को कराया था। इस शोध में उन्होंने लगभग दो सौ लोगों का अध्ययन उनके बचपन से लेकर लगभग 50 वर्ष की आयु तक पहुंचने की अवधि में लगातार किया। इस शोध के आधार पर उन्होंने कहा कि उन दो सौ लोगों में से लगभग एक तिहाई लोग अपनी गरीबी तथा गरीबी जनित तमाम समस्याओं के बावजूद जिंदगी में न केवल उठ खडे़ हुए बल्कि अच्छे परिवार के लोगों की तरह स्थापित हो गए।
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कुरुक्षेत्र। एमडी विश्वविद्यालय रोहतक के मनोविज्ञान विभाग के पूर्व प्रोफेसर एवं अध्यक्ष प्रो. राजबीर सिंह हुड्डा ने कहा कि शोध किसी एक विषय या विषयों पर लंबी अवधि तक किया जाने वाला अनुसंधान होता है। जिसके आधार पर उस विषय के संदर्भ में अधिक विश्वसनीय निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। वे मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में चल रहे आईसीएसएसआर क्षमता संवर्धन कार्यक्रम के 8वें दिन बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।
प्रो. राजबीर सिंह हुड्डा ने बताया कि प्रोफेसर वार्नर नाम के एक मनोवैज्ञानिक ने अमेरिका में एक ऐसा ही शोध गरीब व स्लम बस्ती में रहने वाले लोगों को कराया था। इस शोध में उन्होंने लगभग दो सौ लोगों का अध्ययन उनके बचपन से लेकर लगभग 50 वर्ष की आयु तक पहुंचने की अवधि में लगातार किया। इस शोध के आधार पर उन्होंने कहा कि उन दो सौ लोगों में से लगभग एक तिहाई लोग अपनी गरीबी तथा गरीबी जनित तमाम समस्याओं के बावजूद जिंदगी में न केवल उठ खडे़ हुए बल्कि अच्छे परिवार के लोगों की तरह स्थापित हो गए।
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